लोकसभा चुनाव से पहले FACEBOOK की बड़ी कार्रवाई, रिमूव किए कई फेक राजनीतिक पेज

Ranvijay SinghRanvijay Singh   1 April 2019 10:43 AM GMT

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लोकसभा चुनाव से पहले FACEBOOK की बड़ी कार्रवाई, रिमूव किए कई फेक राजनीतिक पेज

लखनऊ। फेसबुक ने अपने प्‍लैटफॉर्म पर फेक न्‍यूज और प्रोपगैंडा न्‍यूज के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। फेसबुक ने 687 पेज को हटा दिया है, जिनसे चुनाव में लोगों की सोच प्रभावित करने का शक हो रहा था। फेसबुक ने अपने बयान में कहा है कि इन पेज में से ज्‍यादातर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के IT सेल से जुड़े लोगों के थे।

फेसबुक ने बयान जारी कर बताया, ''हमने 687 पेज और एकाउंट रिमूव कर दिए हैं, जिनमें से ज़्यादातर को हमारे ऑटोमेटिड सिस्टमों ने डिटेक्ट कर सस्पेंड कर रखा था। ये एकाउंट और पेज भारत में 'को-ऑर्डिनेटिड इनऑथन्टिक बिहेवियर' में लिप्त थे तथा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के IT सेल से जुड़े लोगों के थे। इसके अलावा 15 ऐसे फेक पेजों को हटाया गया, जो आईटी कंपनी 'सिल्वर टच' से संबंधित थीं।'' समाचार एजेंसी रायटर्स के अनुसार सिल्वर टच वही आईटी कंपनी है जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नमो ऐप का देख-भाल करती है। फेसबुक ने 321 ऐसे फेसबुक पेज और अकाउंट को भी हटाया है जो उसकी पॉलिसी का उल्‍लंघन करते पाए गए।




फेसबुक के इस कदम को लोकसभा चुनाव के मद्देनजर उठाए गए कदम के तौर पर देखा जा रहा है। लोकसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा करते वक्‍त ही निर्वाचन आयोग ने सोशल साइट को लेकर कई निर्दश जारी किए थे। इसके बाद फेसबुक की टीम से भी चुनाव अयोग से मुलाकात की थी।

फैक्ट चेकर और फेक न्यूज को उजागर करने वाले प्रतीक सिन्हा ने ट्वीट करते हुए बताया कि भले ही सिल्वर टच के कम ही पेज रिमूव हुए हैं लेकिन उसके फॉलोवर्स, कांग्रेस आईटी सेल के फॉलोवर्स से कई गुना अधिक थे। इसके अलावा उन पेजों पर ऐड का खर्चा भी कांग्रेस के ऐड के खर्चे से कहीं ज्यादा है।

फेसबुक इससे पहले भी फेक न्यूज, हेट स्पीच, स्पैम और टेररिस्ट प्रोपगैंडा के बारे में बात करने वाले कई फेस पेज को डिलीट करता आया है। पिछले साल नवंबर में फेसबुक ने कम्यूनिटी स्टैंडर्ड रिपोर्ट जारी की थी। इस रिपोर्ट में बताया था कि अप्रैल से लेकर सितंबर 2018 तक कंपनी ने करीब 1.5 अरब फेसबुक अकाउंट डिलीट किए हैं। ऐसे ही फेसबुक लगातार फेक अकाउंट और प्रोपगैंडा पेज को लेकर एक्‍शन ले रहा है।

फेसबुक पेज के द्वारा किसी खास विचारधारा का प्रसार प्रचार करने के लिए सोशल मीडिया एक्‍सपर्ट्स काम करते हैं। ऐसे ही एक एक्‍सपर्ट ने नाम न लिखने की शर्त पर बताया, ''फेसबुक उन पेज को डिलीट करता है जिससे एक खास विचार को उग्र तरीके से प्रसार किया जाता हो। उग्र तरीके से मतलब हैं कि जो तरीके फेसबुक के पॉलिसी के अनुसार गलत हों, जैसे रोबोटिक लाइक या ऑटो लाइकर। साथ ही किसी पेज से बहुत ज्‍यादा शेयर करने पर भी ऐसी कार्यवाही की जाती है।''


एक्‍सपर्ट ने बताया, ''हालांकि, फेसबुक पहले एडमिन को इस बात के बारे में चेतावनी जारी करता है कि अगर ऐसा ही रहा तो पेज डिलीट किया जा सकता है, लेकिन जब इस चेतावनी को नजरअंदाज किया जाता है तो फेसबुक उन पेज को डिलीट कर देता है। जब से फेसबुक का डेटा चोरी वाला मामला हुआ था तबसे फेसबुक ने अपनी पॉलिसी भी बदली है। इसका ही यह असर है।''

एक्‍सपर्ट ने आगे बताया, ''मैं पहले एक खास वर्ग की विचारधारा को लेकर दो पेज चलाता था। एक पेज पर करीब 60 हजार और दूसरे पर 1 लाख के करीब लोग थे। 2018 में जब कई पेज डिलीट किए गए, उस वक्‍त इन दोनों पेज को भी डिलीट कर दिया गया। अब इनका कोई वजूद नहीं बचा है।''

एक्‍सपर्ट ने कहा, ''अभी चुनाव आचार संहिता को लेकर भी फेसबुक कड़े कदम उठा रहा है। ऐसे में आने वाले वक्‍त में और कई पेज डिलीट होंगे। क्‍योंकि अब चुनाव का प्रचार फेसबुक के माध्‍यम से किया जा रहा है। इसलिए कई फेक अकाउंट भी बनाकर तैयार किए गए हैं।''

गौरतलब है कि न्यू यॉर्क टाइम्स ने एक रिपोर्ट पब्लिश की थी जिसमें कहा गया था कि 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति पद के नतीजे को प्रभावित करने के लिए रूस ने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म्स के जरिए हस्तक्षेप किया था और सोशल मीडिया कंपनियों ने इन प्रयासों को रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाए थे। इसके बाद फेसबुक ने अपना पक्ष भी रखा था। इस दावे के बाद फेसबुक लगातार राजनीतिक तनाव पैदा करने वाले फेक अकाउंट्स और फेक पेज को लेकर एक्‍शन ले रहा है।

 

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