डिग्री हिंदी की पेशा डॉक्टरी का

जिगनिया और करपिया दोनों गाँव के बीच की दूरी मात्र दो किमी. है। दोनों गाँव में कुल 10 झोलाछाप डॉक्टर लोगों का इलाज कर रहे हैं।

डिग्री हिंदी की पेशा डॉक्टरी का

बरेली/बदायूं। गाँवों में मौतें बुखार से हों या किसी दूसरी बीमारी से, दु:ख तो होता है, लेकिन गाँवों और कस्बों में होने वाली इन मौतों के पीछे गाँवों में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली के साथ-साथ ग्रामीणों की लापरवाही काफी हद तक जिम्मेदार है। यही नहीं, इस बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था का परिणाम है कि गाँवों में फलफूल रहे झोलाछाप डाक्टर ज़िंदगी कम, मौत अधिक बांट रहे हैं।

बरेली और बदायूं जिले के कई गाँवों में बुखार से हुई मौतों के बाद जब उन गाँवों में जब जमीनी पड़ताल के लिए 'गाँव कनेक्शन' पहुंचा तो गाँव गंदगी और झोलाछाप डाक्टरों की दुकानों से भरे पड़े थे। इन दो जिलों में स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार अब तक 36 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग बीमार हैं।


बरेली जिला मुख्यालय से 40 किमी दूर जिगनिया गाँव में एक छोटी सी दुकान में मरीज को बोतल चढ़ाते हुए एक आदमी ने अपना नाम तोताराम बताया। तोताराम एक झोलाछाप डॉक्टर हैं और गांव में ही मरीजों का इलाज करते हैं। बुखार में मरीज को ग्लूकोज चढ़ा रहे इस गाँव के डॉक्टर ने बताया, "हम रात में डॉ. टैगोर के यहां काम करते हैं और दिन में मजदूरी करने से अच्छा है कि लोगों को दवाई दे दूं, "आगे कहा, "हमने हिंदी से एमए किया है। लोग अस्पतालों में कई दिनों तक परेशान रहते हैं। इसलिए हम उनका यहां उनका आसानी से इलाज कर देते हैं।"

वहीं, इस जिगनिया गाँव से मात्र दो किमी दूर करपिया गाँव के बीच सड़क पर 10 झोलाछाप डाक्टरों की दुकाने सजी मिल जाएंगी। हर दुकान पर दो-चार मरीज लेटे भी मिलेंगे, जिनका इलाज भी चल रहा है।

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करपिया गाँव में चारपाई पर लेटे 33 वर्ष के शीतलपाल की हालत इतनी नाजुक है कि वे ठीक से बोल भी नहीं पा रहे। उनके बड़े भाई सुखराम (50) ने बताया, "पिछले 20 दिन पहले इसे बुखार आया। गाँव के एक डॉक्टर के यहां से दवाई कर रहा हूं, लेकिन स्थिति बिगड़ती जा रही है। अब तो आवाज़ भी चली गयी है।" शीतलपाल का इलाज गाँव के ही एक डॉक्टर के यहां से चल रहा है। सुखराम आगे बताते हैं, "जब यह बीमार था उसी बीच इसके बेटे अवधेश (5 वर्ष) को भी बुखार आया, लेकिन उसे अस्पताल ले जाने वाला कोई नहीं था। कुछ दिन गाँव में इलाज करवाते रहे लेकिन वह बच नहीं सका।"


करपिया गाँव में बड़ी संख्या में लोग बुखार से पीड़ित हैं, लेकिन कोई सरकारी अस्पताल नहीं जाना चाहते। गाँव के ही 32 वर्षीय बुद्धपाल ने कहा, "सरकारी अस्पताल में हमारी सुनने वाला है कौन? वहां से तो अच्छा है कि हम अपने गाँव में ही दवाई ले लें। एक दो गोली दे देते हैं, वो काम भी कर देती है। सरकारी अस्पताल में तो बाहर की दवा लिख देते हैं।"

गाँव में ही कुछ दूरी पर छत्रपाल का घर है, जहाँ घर के बाहर चारपाई पर ढेर सारी दवाएं इकट्ठा किए हुए एक डॉक्टर बैठे हैं। इनका नाम गेंदन लाल (45 वर्ष) है और एक डॉक्टर के साथ काम करके अब वह भी डॉक्टर बन गये।

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गेंदन लाल ने बताया, "गाँव के लोग गरीब हैं, हम इनका इलाज 20 रुपए में ही कर देते हैं।" यह पूछने पर कि दवा देने का अधिकार आपको किसने दिया तो बोले, "हम किसी को बुलाने थोड़े ही जाते हैं, सभी मरीज अपनी इच्छा से आते हैं।"

वहीं, हाथ में पर्चा लिए छत्रपाल (45 वर्ष) हाथ में एक पर्चा लेकर बैठे हैं, जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया, "यह जांच गाँव के ही एक दूसरे डॉक्टर राम सिंह ने लिखी है। पत्नी को पिछले 15 दिनों से बुखार आ रहा था।" राम सिंह गाँव के दूसरे झोलछाप डॉक्टर हैं।


मतलब यहां एक तरह से झोलाछाप डाक्टरों की मंडी सजी है। जो बीमार लोगों का इलाज करके अपनी झोली भर रहे हैँ।

करपिया गाँव के चौराहे पर एक कृष्णा चश्मे वाले की दुकान के बगल आठ साल का अखिलेश 104 डिग्री सेल्सियस बुखार से तप रहा है, जबकि दूसरे कई मरीजों को ग्लूकोज चढ़ाया जा रहा है। कथित डॉक्टर ने अपना नाम बताने से इनकार करते हुए कहा, "डॉक्टर श्याम मोहन के अस्पताल में काम करता हूं। वह यहां भी आते हैं।" वहीं डॉक्टर श्याम मोहन ने फोन परकहा "हमारा इनसे कोई लेना देना नहीं हैं और हमने इनसे कभी नहीं कहा है कि अस्पताल खोलें।"

सीएमओ रिपोर्टर से ही मांगने लगे झोलाछाप डाक्टरों की लिस्ट

इस बारे में जब बरेली के सीएमओ डॉ. वीके शुक्ला को बताया गया तो उन्होंने कहा, "अभी जिले में बुखार के मामले आ रहे हैं। अगर आप इन झोलाछाप डॉक्टरों की लिस्ट बनाकर कर भेजते हैं तो निश्चित रूप से इनके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।"

महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग डॉ पद्माकर सिंह ने गाँव कनेक्शन को बताया, "बरेली में मैंने भी बुखार का दौरा किया है। मलेरिया, टायफाइड से लोग पीड़ित हो रहे हैं। हमारी टीम से तेजी से काम कर रही हैं। झोलाछाप डॉक्टर जो भी सक्रीय हैं मैं बरेली सीएमओ को बोलकर उनपर कार्यवाई करवाता हूँ।"


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