खाली हाथ किसानों का अल्टीमेटम, 60 से ज्यादा किसान संगठन मिलकर करेंगे देश में चक्का जाम

खाली हाथ किसानों का अल्टीमेटम, 60 से ज्यादा किसान संगठन मिलकर करेंगे देश में चक्का जाममध्यप्रदेश में सरकार और किसानों के बीच अबतक समझौता नहीं हुआ है। (फोटो-विनय गुप्ता)

मंदसौर/रतलाम/प्रतापगढ़। बाजार बंद हैं, सड़कें बेज़ार, सरकार बेबस और किसानों के हाथ ख़ाली। यह है मध्य प्रदेश की तस्वीर। 10 दिन से चल रहे किसान आंदोलन के नतीजे की गवाही देने के लिए यह सड़क और उस पर हाथ झुलाता जा रहा यह किसान काफी है। सीएम शिवराज चौहान के पास हल नहीं है।

राज्य में शांति के लिए शिवराज सिंह भोपाल में उपवास पर बैठते हैं, और किसानों को बातचीत के लिए बुलाते हैं, लेकिन बैठक बेनतीजा निकलने के बाद खुद किसान प्रतिनिधि वहां उपवास पर बैठ जाते हैं। यह नए तरह की गवर्नेंस है। सरकार के पास हल नहीं है, तो वह खुद उपवास पर बैठी है। बंजर, सूखे खेतों में तपिश झेलने वाला किसान एक और टकराव के लिए तैयार है। किसानों की दो प्रमुख मांगों कर्जमाफी और लाभकारी मूल्य देने से सरकार ने हाथ खड़े कर दिए। कृषि मंत्री जीएस बिसेन ने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा, ‘’एमपी में किसानों का कर्ज नहीं बनता क्‍योंकि आज हम ब्‍याज नहीं बल्कि सामग्री में मूलधन पर 10 प्रतिशत कम ले रहे हैं। जब हमने किसान से ब्‍याज ही नहीं लिया, जब किसान पर ब्‍याज ही नहीं लगने दिया तो किस बात का कर्ज माफ होगा?''

राजस्थान के प्रतापगढ़ में किसान धरने पर बैठे हुए। फोटो: विनय गुप्ता

वहीं आम किसान यूनियन से जुड़े केदार सिरोही ने गांव कनेक्शन को बताया, “बात बनीं नहीं बल्कि और बिगड़ गई है। सरकार ने दोनों मांगें मानने से इनकार कर दिया, जिसके बाद हम लोग भी उसी पंडाल में मुख्यमंत्री के सामने ही उपवास पर बैठ गए हैं। रविवार से पूरे प्रदेश के किसानों को सरकार के खिलाफ उपवास में शामिल होने के आह्वान किया गया है।

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दिल्ली से लेकर भोपाल तक सियासत गर्म है लेकिन मध्यप्रदेश के बाकी इलाकों में सड़कों पर सन्नाटा पसरा है। मंदसौर में फूंके गए घर और गाड़ियों की आग ठंडी पड़ चुकी है लेकिन आंदोलन की आंच दूसरे इलाकों यहां तक की राज्यों में अपनी जद में ले रही है। मंदसौर से 30 किलोमीटर दूर राजस्थान के प्रतापगढ़ में हजारों किसानों ने प्रदर्शन किया और बाजार बंद रहे।

मंदसौर में किसानों पर हुई हिंसा के बाद का दृश्य। फोटो: विनय गुप्ता

मंदसौर पहुंचे गांव कनेक्शन के संवाददाता को ख़बर भेजने के लिए राजस्थान के प्रतापगढ़ जाना पड़ा। यहां भी हालात मुश्किल हो रहे हैं। एमपी के बड़े शहरों में धारा 144 लगी है और इंटरनेट बंद है। मंदसौर से 90 किलोमीटर दूर रतलाम में मोबाइल सिर्फ बात करने के काम आ रहा है। ज्यादातर लोग घरों में हैं। सड़कों पर पुलिस और सीआरपीएफ है और बहुत जरूरी काम होने पर ही लोग घर से निकल रहे हैं। आंदोलन में झुलस चुके नीमच और मंदसौर से 200 किमी दूर इंदौर में भी शनिवार को पत्थरबाजी की ख़बरें आईं हैं।

यहां : तस्वीरों में देखिए: बुझ गई मंदसौर में हिंसा की आग लेकिन तपिश अभी बाकी है

इतना ही नहीं, नयी दिल्ली में 62 किसान संघों की बात हुई है,जिसमें फैसला हुआ है 16 जून को देशभर में चक्का जाम होगा। वहीं 12 जून को मेधा पाटकर मंदसौर पहुंचने वाली हैं। इसी बीच कई नेताओं से मंदसौर पहुंचने की कोशिश की लेकिन पुलिस ने अनुमति नहीं दी। वहीं सभी टोल नाकों की सीसीटीवी कैमरों को सक्रिय कर भागे उसे आरोपियों की तलाश जारी है।

तिरंगे में लपेटकर किसान के शव का अंतिम संस्कार

इंदौर के साथ उज्जैन में भी नेट सेवा पर प्रतिबंद हैं, लेकिन ख़बरें और लोगों का गुस्सा छन-छन कर बाहर आ रही हैं। मंदसौर के दलोदा तहसील के गांव बड़वन में मृत किसान घनश्याम धाकड़ (27) के शव को तिरंगे में लपेट कर अंतिम संस्कार किया गया। शव यात्रा में 2000 लोग शामिल हुए। शव यात्रा में शामिल हुए किसान नितिन मंत्री ने गांव कनेक्शन को बताया, “आंदोलन में घायल घनश्याम गंभीर रुप से घायल होने के बाद इंदौर के एमवाय अस्पताल में भर्ती था। पुलिस ने कस्टडी उसकी पिटाई की थी।” वहीं एसपी मनोज सिंह ने इसपर कुछ बोलने से इंकार किया। उन्होंने कहा कि मामले की जाँच चली रही है। कलक्टर ओपी श्रीवास्तव ने बड़वन पहुंचकर परिजनों को आश्वस्त कराया है कि उनकी सभी मांगे पूरी की जाएंगी। मंदसौर में सुबह से शाम 8 बजे तक कर्फ्यू में ढील दी गई।

मृतक किसानों के घर कोई भी जनप्रतिनिधि नहीं पहुंचे

प्रदेश सरकार भले ही डैमेज कंट्रोल की कोशिश कर रही हो, लेकिन उनके ही पार्टी के नेता उनके प्रयासों पर पानी फेर रहे हैं। मंदसौर में विधायक और सांसद, दोनों ही भाजपा के हैं, बावजूद इसके किसी प्रतिनिधि ने मृतक किसानों के घर जाने की जहमत नहीं उठाई। इस बारे में मृत किसान बबलू पाटीदार के बड़े पिता (ताऊ) बबलू पाटीदार ने कहा, “नेता तो बस चुनाव के समय आते हैं। अब ये नेता अगले चुनाव के समय आएंगे, अभी तक घोषित मुआवजे की हमें तो खबर ही नहीं है। न किसी ने इसके बारे में बताया।”

पुलिस से गुस्सा किसान

मंदसौर मुख्यालय से 25 किमी दूर टकरावत गांव में कई दिनों से सन्नाटा है। यहां के 23 साल युवा पूनम चंद उर्फ बबलू पाटीदार की 6 तारीख को पुलिस की गोली से मौत हुई थी। एक साल पहले ही उसकी शादी हुई थी। बबलू के बड़े पिता उसके बारे में बात करते वक्त छलक आए आंसु पोछते हुए कहते, “सीने में गोली मारी थी, पैर में भी तो मारी जा सकती थी।” बबलू के साथ उस दिन रहे उनके पड़ोसी कहते हैं, कुछ समझ में नहीं आया ये प्रदर्शन में ये हंगामा कैसे हो गया। हम तो प्रदर्शन कर रहे थे, पुलिस ने भी तब रोका नहीं, हमें लगा बातचीत होगी लेकिन नजदीक आते ही फायरिंग हो गई, तीन लोग मौके पर मर गए, बबलू ने अस्पताल ले जाते वक्त दम तोड़ दिया।”

क्या हैं किसानों की मांग

किसान नेता विजय झाला ने कहा कि किसान जमीन के बदले मुआवजे के लिए कोर्ट जाने का अधिकार देने, फसल पर आए खर्च का डेढ़ गुना दाम देने, किसानों पर दर्ज मुकदमें वापस लेने, कर्ज माफ करने और दूध खरीदी के दाम बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। सीएम चौहान ने दो दिन की चर्चा के बाद किसानों पर केस खत्म करने, जमीन मामले में किसान विरोधी प्रावधानों को हटाने, फसल बीमा को वैकल्पिक बनाने, मंडी में किसानों को 50% कैश पेमेंट और 50% आरटीजीएस से देने का एलान किया था। यह भी कहा था कि सरकार किसानों से इस साल 8 रु. किलो प्याज और गर्मी में समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदेगी। खरीदी 30 जून तक चलेगी। अपने इन वादों को सरकार पूरा करे।

आंदोलन की वजह

इस साल मध्य मंदसौर की मंडी में 2 रुपए की दर से प्याज की खरीद हुई। पिछले साल प्याज 6 से 8 रुपये किलो तक खरीद गई थी। किसान राजेंद्र और मारे गए किसान कनहैया लाल के बड़े भाई केसुलाल पाटीदार ने बताया कि प्याज की कीमत से हमारी लागत भी नहीं निकल पायी। हमने करीब 40 क्विंटल प्याज खेतों में ही छोड़ दिया। 2.20 पैसे के हिसाब प्याज बेचने का कोई फायदा ही नहीं। वहीं मृत किसान बबलू पाटीदार के बड़े भाई बालूराम पाटीदार ने बताया कि मैंने 25 दिन पहले अपनी फसल को मंडी में बेचा था। देर से चेक मिला, वो भी 20 दिन हो गए अभी तक कैश नहीं हुआ वो चेक। ऐसे में किसान आंदोलन नहीं करेगा तो क्या करेगा। हमारे पास दूसरा कोई विकल्प ही नहीं बचता।

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