अगर आज यक्ष युधिष्ठिर से पूछते कि सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है तो वो मृत्यु नहीं ‘खेती’ कहते : गिरिराज सिंह

अगर आज यक्ष युधिष्ठिर से पूछते कि सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है तो वो मृत्यु नहीं ‘खेती’ कहते : गिरिराज सिंहगिरिराज सिंह।

''आजादी के बाद से जब भी मैं खड़ा हुआ सोचा समझा जाना, तो मंचों से कहा गया, भारत के हृदय स्थली गाँव, गरीब और किसान हैं। लेकिन आज किसानों की हालत खराब है। अभी तक गाँवों में 70 प्रतिशत किसान हुआ करते थे जो अब घटकर 58 प्रतिशत रह गया है। इन परिस्थितियों में ऐसा क्यों हुआ?'' ये बात सीमैप में आयोजित किसान मेले में देश भर से आए करीब 7000 किसानों को स‍ंबोधित करते हुए केन्द्रीय राज्य मंत्री गिरिराज सिंह ने कही।

गिरिराज सिंह ने कहा, ''मुझे खुशी है कि आज के दिनों में IIT से पढ़ी हुई बेटियां/बेटे कृषि के क्षेत्र में आ रहे हैं। लेकिन आज गाँव में 10वीं कक्षा पास करने के बाद कोई नौजवान खेत पर नहीं जाना चाहता है, क्योंकि खेती अब घाटे का सौदा बन गई है।'' उन्होंने कहा कि मैं बार-बार कहता हूं कि जब पांडव अज्ञात वास के दौरान वनों में घूम रहे थे तो उस समय यक्ष ने युधिष्ठिर से प्रश्न पूछा था कि दुनिया का सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है? युधिष्ठिर ने कहा था 'मृत्यु', क्योंकि मरना सबको है लेकिन मरना कोई नहीं चाहता। लेकिन आज के समय में अगर ये प्रश्न पूछा जाता तो जवाब होता 'खेती', क्योंकि आज भोजन सबको चाहिए लेकिन खेती कोई नहीं करना चाहता।

खाना सब खाते हैं, लेकिन खेती कोई नहीं करना चाहता, किसान देश की आर्थिक रीढ़ हैं, हमारा मंत्रालय हर तरह से किसानों के साथ है।
गिरिराज सिंह, केंद्रीय मंत्री

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किसान मेले में शामिल होने पहुंचे थे हजारों किसान। फोटो- विनय गुप्ता।

गिरिराज सिंह ने कहा कि आखिर ऐसी स्थिति क्यों आई ? 60 के दशक में हम पीएल 480 के तहत सड़ा हुआ गेहूं अमेरिका से लेते थे। जब उस समय के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री वहां गए और गेहूं देखा, तो उन्होंने कहा चलो वापस। अधिकारी सब डरे सहमे थे उन्होंने उनसे कहा, सर हमारे पास हफ्ते में सिर्फ 6 दिन भर का ही आनाज है। इस पर लाल बहादुर शास्त्री ने कहा 6 दिन का है न, चलो। उस समय स्वामिनाथन उनके साथ थे। जब स्वामिनाथन से उन्होंने पूछा, इम्प्रूव्ड वरायटी की क्रॉप कितने दिन में लाओगे?

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उन्होंने कहा, एक साल में। तब लाल बहादुर शास्त्री ने कहा चलो। वो वापस आए और घोषणा कर दी कि देशवासियों आज अन्न खाद्यान का संकट है, लेकिन भारत गौरवशाली देश रहा है। सप्ताह में एक दिन हिंदू एकादशी मनाए, मुसलमान रोजा रखें हम किसी के सामने हांथ नहीं फैलाएंगे। तब देश में सभी ने उत्सव मनाया, दुनिया के सामने भारत ने हांथ नहीं फैलाए। लेकिन अगर उस समय हम एग्रीकल्चर विथ लाइवस्टॉक (खेती के साथ पशुपालन), एग्रीकल्चर विथ हॉर्टीकल्चर (कृषि और बागवानी साथ-साथ), एग्रीकल्चर विथ एरोमाफार्मिंग को हम साथ-साथ ले चलते तो आज हम जिस तरह से मेंथा में लीडर हैं उसी तरह दूसरे फसलों में भी लीडर होते।

''एक किलो चावल पैदा करने में 4000 से 5000 लीटर पानी खर्च होता है। आज हम मिंट में लीडर तो हैं लेकिन हमे सोचना होगा कि एक लीटर मिंट पैदा करने में कितना पानी खर्च होता है।'' मेंथा के कुल उत्पादन का 80 प्रतिशत मेंथा भारत पैदा करता है।

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अब कई मंत्रालयों को एक मंत्रालय बनाने की ज़रूरत

''जब प्रधानमंत्री ने कहा है कि किसानों की आय दोगिनी हो, मेरे मन में भी आया कि भारत के 14 राज्य हैं जो कॉस्टल एरिया हैं, उनको भी लिया जाए और नदियों के छोर को भी लिया जाए। क्योंकि नदियों के छोर पर अगर हम पांच साल का क्रॉप्स निकालते हैं, तो डेढ़ फसल ही आता है, एक सबसे अधिक है दो हो गया तो बहुत है।'' गिरिराज सिंह ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, ''इस स्थिति में हमने आग्रह किया है कि एरोमा मिशन के तहत 300 क्रस्टर बनाएंगे। इसके साथ ही हम एक्सट्रेक्शन का यूनिट भी जोड़ेंगे।''

सीमैप में पौधा लगाते केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और यूपी के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही।

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उन्होंने किसानों की समस्या का ज़िक्र करते हुए कहा, ''सीमैप साइंस एण्ड टेक्नोलॉजी से जुड़ा हुआ है, एस्ट्रेक्शन एमएसएमई से जुड़ा हुआ है, ज़मीन एग्रीकल्चर से जुड़ी हुई है और इन तीनों का कभी कॉम्बीनेशन मिलता नहीं। भारत सरकार के कृषि मंत्री या कृषि के सचिव कुछ ऐसा बनाते कि तीनों की बराबर की मीटिंग होती। शाही जी (सूर्य प्रताप शाही, यूपी के कृषि मंत्री) कह रहे थे, मंत्रालय हमारे यहां कई बने हुए हैं। लेकिन अब ये ज़रूरत है कि कई मंत्रालयों को एक मंत्रालय कैसे किया जाए।''

इंटरप्रेन्योर के बिना नहीं बढ़ सकती किसानों की आमदनी

किसानों को नई तकनीकों के बारे में जानकारी दी गई।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में सात नदिया हैं। इन नदियों के किनारे का क्षेत्रफल 15 लाख 23 हज़ार 496 एकड़ है, जो सुगंधित पौधों के लिए एक लाख 52 हज़ार 349 एकड़ आता है। कुल रोजगार 22 लाख 85 हज़ार 244 सृजित होता है। सीमैप के साथ मिलकर एक रोडमैप बनाने का काम किया है कि शायद ये उत्तर प्रदेश को ही एक एक्सपेरिमेंटल क्षेत्र मान लें। अगर हमें इस काम में सफलता मिली तो निश्चित रूप से किसानों को लाभ होगा। लेकिन इंटरप्रेन्योरशिप के बिना सरकारी मॉडल पर नहीं होने वाला।

सरकारी मॉडल में कई तरह की अड़चने आती हैं। उन अड़चनों को दूर करने में कई कठिनाइयां आती हैं। अगर कोई इंटरप्रेन्योर किसी जिले को किसी राज्य को कोई एक ऐसी व्यवस्था बना कर किसान की मदद करे कि तुम्हारे धान में जितना लगता था उतना पैसा मैं दूंगा तो किसान को हिम्मत मिलेगी और किसान उस उद्योग के साथ जुटेगा।

इसके साथ ही गिरिराज सिंह ने कहा, ''किसान के मामले में राजनीति नहीं होनी चाहिए, क्योंकि किसान देश की रीढ़ है। किसान के मामले पर हर राजनीतिक दल अगर एक सुर मिला दे, एक विचार रख ले, तो भारत समृद्ध हो जाएगा, क्योंकि भारत की आर्थिक रीढ आज भी किसान है।

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