किसान नेता बोले, नाकाफी है एमएसपी में बढ़ोतरी, किसान अब भी घाटे में

किसानों का कहना है कि यह वह डेढ़ गुना दाम नहीं है जो किसान आंदोलन ने मांगा था और न ही वह है जिसका वादा नरेंद्र मोदी ने चुनावों से पहले किया था।

किसान नेता बोले, नाकाफी है एमएसपी में बढ़ोतरी, किसान अब भी घाटे में

बुधवार को मोदी सरकार ने अपने वादे के मुताबिक, खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढोतरी की है। इस फैसले के बाद गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने उम्मीद जताई कि सरकार के इस निर्णय से जहां किसानों को अपनी फसलों का लाभकारी मूल्य मिलेगा वहीं इसका सकारात्मक प्रभाव देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। उन्होंने बताया कि एमएसपी बढ़ाने से सरकार के खजाने पर 15,000 करोड़ का बोझ आएगा। केंद्र ने सबसे अधिक रागी की एमएसपी में 52 फीसदी की बढ़ोतरी की है, वहीं धान के समर्थन मूल्य में 200 रुपये का इजाफा किया है। लेकिन देश के किसान नेता सरकार के इस फैसले से बहुत ज्यादा खुश नहीं दिखाई देते हैं।

देश के मशहूर सामाजिक और राजनीतिक विश्लेषक योगेंद्र यादव इसे किसान आंदोलन की छोटी जीत बताते हैं। उनका कहना है, "किसानों के ऐतिहासिक संघर्ष ने इस किसान विरोधी सरकार को मजबूर किया कि वो चुनावी वर्ष में अपने पिछले चुनावी वादे को आंशिक रूप से लागू करे।" इसके साथ ही योगेंद्र यह भी याद दिलाते हैं कि सरकार ने जिस एमएसपी का ऐलान किया है यह वह डेढ़ गुना दाम नहीं है जो किसान आंदोलन ने मांगा था और न ही वह है जिसका वादा नरेंद्र मोदी ने किया था। यह महज ऐसा वादा है जो सरकारी खरीद पर निर्भर है। यह अस्थाई है। वह कहते हैं, "किसान को संपूर्ण लागत पर ड्योढ़ा दाम की गारंटी चाहिए।"


आम किसान यूनियन के नेता और किसान मुद्दों पर खुलकर बोलने वाले केदार सिरोही ने एमएसपी व्यवस्था पर चुटकी लेते हुए ट्वीट किया है, "उन सभी 6% किसान जिनको समर्थन मूल्य का लाभ मिलता है सभी को बधाई। बाकी 94% किसानों को इस तरह की योजना पर विचार करना चाहिए कि कैसे हम सब मिलकर किसानों के हित मे योजना बनाएं। वैसे मोदी जी अपनी तासीर के अनुसार ही निकले जो वादा किया था उसको नहीं निभा पाए।"



कृषि जानकार कहते रहे हैं कि महज 6 फीसदी किसान ही अपनी उपज एमएसपी पर बेच पाते हैं, बाकी किसानों तक सरकारी एजेंसियों की पहुंच ही नहीं है। अपने अगले ट्वीट में केदार पूछते हैं, "मूल्य वृद्धि में सरकार द्वारा मजबूती दिखाई है मगर फिर प्रश्न वही कि इनकी खरीदने की व्यवस्था कैसे होगी।

उन सभी फसलों के मूल्य में बड़ी वृद्धि की गई जो 1 %से कम खरीदी जाती हैं बाकी फसलों के दाम कम बढ़े हैं। सरकार द्वारा यह सुनिश्चित होना चाहिए कि कोई भी व्यापारी MSP से नीचे न खरीदे तो बात बन सकती है।"

कृषि अर्थशास्त्री और किसान मुद्दों पर मुखर रहने वाले भगवान मीना का मानना है कि सरकार ने किसानों को धोखा दिया है। उनका ट्वीट है :



इसी तरह किसान मामलों के जानकार रमनदीप सिंह मान कहते हैं, " मोदी जी जिस स्वामीनाथन रिपोर्ट का हवाला देकर प्रधानमंत्री बने थे उस हिसाब से धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2226रुपए प्रति क्विंटल होना चाहिए था, जबकि यह बढ़ाकर 1750 रुपए किया है। इस हिसाब से किसान 476 रुपए प्रति क्विंटल के घाटे में है।" रमनदीप सिंह के मुताबिक, सरकार ने जो एमएसपी का ऐलान किया है वह 2014 की गणना के हिसाब से है जब बीजेपी सरकार को किसानों ने वोट दिया था।



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