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किसान के बेटे ने बाइक के इंजन से बनाई फ्लाइंग मशीन, भरी 10 हज़ार फीट की ऊंची उड़ान

किसान के बेटे ने बाइक के इंजन से बनाई फ्लाइंग मशीन, भरी 10 हज़ार फीट की ऊंची उड़ानकिसान के बेटे ने बाइक के इंजन से फ्लाइंग मशीन

हिसार जिले के आदमपुर हल्के के गाँव ढाणी मोहब्बतपुर निवासी बीटेक के छात्र 23 वर्षीय कुलदीप टाक ने वो काम कर दिखाया है जिसने हर किसी को हैरत में डाल दिया। कुलदीप ने देसी जुगाड़ से उडऩे वाली अनोखी फ्लाइंग मशीन तैयार की है। ये मशीन 1 लीटर पेट्रोल में करीब 12 मिनट तक आसमान में उड़ती है। इसे पैराग्लाइडिंग फ्लाइंग मशीन या मिनी हैलीकॉप्टर का नाम दिया गया है।

तीन साल की कड़ी मेहनत के बाद कुलदीप पैराग्लाइडिंग फ्लाइंग मशीन को आसमान में उड़ाने की सफलता मिली। मशीन दिखने में भले ही साधारण लगती हो, लेकिन ये उड़ान गजब की भरती है। ढाणी मोहब्बतपुर निवासी कुलदीप के पिता प्रहलाद सिंह टाक गाँव में खेतीबाड़ी करते हैं। चंडीगढ़ से बीटेक की पढ़ाई पूरी करने के बाद अब कुलदीप इसी प्रोजेक्ट पर कार्य कर रहा है। फ्लाइंग मशीन को बनाने में गाँव आर्यनगर निवासी सतीश कुमार का भी योगदान रहा।

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कुलदीप ने बताया कि मशीन को तैयार करने में करीब ढाई लाख रुपये का खर्च आया है। मशीन में बाइक का 200CC इंजन लगाया गया है। इसके अलावा लकड़ी का पंखा लगा हैं, साथ ही साथ छोटे टायर लगाए हैं। इसके ऊपर पैराग्लाइडर लगाया गया है जो उड़ान भरने और सेफ्टी के साथ लैंडिंग करवाने में सहायक है। फिलहाल इस मशीन में केवल 1 ही व्यक्ति बैठ सकता है, लेकिन कुलदीप ने दावा किया है कि कुछ ही माह में ये मशीन दो लोगों को लेकर उड़ेगी, जिसमें सबसे पहले वो अपने पिता को बैठाएगा।

यह मशीन 10 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ान भरने में सक्षम है। गाँव चौधरीवाली से आसपास के गाँवों में कुलदीप ने अब तक करीब दो हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ान भरी है। ये मशीन पेट्रोल से उड़ती है जिसमें 5-6 लीटर का टैंक है। पूरी फ्लाइंग मशीन में स्थानीय स्तर के सामान का प्रयोग किया गया है। यानी कुल मिलाकर इस मशीन की टंकी फुल होने के बाद आप 1 घंटे तक आसमान में उड़ सकते हैं।

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कुलदीप ने बताया कि उसके इस सपने को साकार करने में उसके परिवार का सबसे बड़ा योगदान है। उसके पिता प्रहलाद सिंह टाक और सहयोगी सतीश आर्यनगर ने भी उसकी मेहनत को हौसला दिया। पिता प्रहलाद सिंह खेत में रहते हैं। कुलदीप के पिता प्रहलाद सिंह टाक ने बताया कि उसका बेटा देर रात इस मशीन को बनाता रहता था।

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उसके मना करने के बावजूद कुलदीप मशीन को पूरा करने में लगा रहा। करीब 6 माह पहले गोवा में पायलट की 3 माह ट्रेनिंग की थी। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद भी कुलदीप का फ्लाइंग मशीन बनाने का जुनून कम नहीं हुआ। वहीं कुलदीप के सहयोगी सतीश आर्यनगर ने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास था कि कुलदीप उन्हें हवा में जरूर सैर कराएगा। कुलदीप की मां कमला ने बताया कि बेटे को हवा में उड़ता देखकर बहुत खुशी हो रही है बेटे ने बड़े साल मेहनत की आखिर अब जा कर इसका फायदा मिला है।

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सहयोगी सतीश ने बताया हालांकि इससे पहले भी उसने एक एयरक्राफ्ट तैयार किया था, लेकिन वो ट्रायल के दौरान पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। इसके बावजूद भी उसने हिम्मत नहीं हारी। फिर से पैराग्लाडिंग फ्लाइंग मशीन बनाने का निर्णय लिया और आज वो इसमें कामयाब हो ही गया।

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