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गुजरात: टिड्डियों को भगाने के लिए कहीं चल रही बंदूक, कहीं बज रही थाली, अब तक करोड़ों का नुकसान

Arvind ShuklaArvind Shukla   26 Dec 2019 11:09 AM GMT

बनासकांठा (गुजरात)। गुजरात के पांच जिलों में टिड्डियों ने आतंक मचा रखा है। टिड्डियों को भगाने के लिए किसान दिन रात एक कर रहे हैं। किसान अपने स्तर पर अलग-अलग उपाय कर भी कर रहे हैं। कईं खेतों में थालियां बजाई जा रही हैं, तो कई किसान अपने इन दुश्मनों पर गोलियां तक चला रहे हैं। किसान सरकार से प्रभावित इलाकों में हेलीकाप्टर से छिड़काव की मांग कर रहे हैं।

टिड्डियों से सबसे ज्यादा नुकसान कच्छ, साबरकांठा, पाटण, महेसाणा और बनासकांठा में हुआ है। इन जिलों में गेहूं, जीरा, दिवेला, काटन, राई, मकई (मक्का) अरंडा समेत इस सीजन में होने वाली हजारों हेक्टेयर फसल बर्बाद हो गई है। बनासकांठा में पाकिस्तान बार्डर से सटे इलाकों में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। टिड्डियों के हमले का वीडियो देखने के लिए लिंक पर पर जाएं‍



बनासकांठा में सुईगा गांव के सरपंच और किसान राम सिंह राजपूत ने गांव कनेक्शन को फोन पर बताया, "14 दिसंबर को पहली बार इलाके में टिड्डी के दल देखे गए उसके बाद से लगातार इनकी संख्या बढ़ती जा रही है। ये राजस्थान की तरफ से आए थे और अब तक हजारों हेक्टेयर फसल चट गए गए हैं। कई गांवों में एक भी खेत नहीं बचा है। सरकार की तरफ से किए गए इंतजाम से कोई फायदा नहीं हो रहा है।"

बनासकांठा में कृषि अधिकारी पीके पटेल ने कहा-केंद्र सरकार की 19 और जिले के 27 टीमें टिड्डी दल की लोकेशन पताकर उनपर छिड़काव कर रही हैं। बनासकांठा के पूरे जिले में नहीं थराट में नुकसान ज्यादा है। जहां लोकेशन मिल रही है टिट्डियों पर मैलाथियान का छिड़कांव किया जा रहा है।"


टिड्डियों से अपनी फसल को बचाने के लिए किसान काफी मेहनत कर रहे हैं। राम सिंह राजपूत के मुताबिक तीन महीने पहले भी टिड्डियों का हमला हुआ था लेकिन तब तादात इतनी ज्यादा नहीं थी। इसके साथ ही जल्द काबू पा लिया गया था।

हैलीकॉप्टर से छिड़काव नहीं

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपानी में मीडिया से बातचीत में कहा कि गुजरात पर ये प्राकृतिक आपदा आई है। खासकर बनासकांठा के पाकिस्तान के सटे इलाके में नुकसान हुआ है। केंद्र सरकार की लोकस कंट्रोल टीम की मदद से इन पर काबू पाने की कोशिश जारी है।"

उन्होंने आगे कहा, "हेलीकाप्टर से टिड्डी मारक दवा का छिड़काव नहीं करा सकते, क्योंकि ये दवा जहरीली है। वो मनुष्य, पशु और पानी (तालाब-नदी) पर गिरा तो उससे नुकसान हो सकता है। इसलिए टीमें जमीन से छिड़काव कर रही हैं। उम्मीद है जल्द काबू पा लिया जाएगा।"

राजस्थान में मचा चुकी हैं तबाही

साल 2019 में टिड्डियों के लगातार कई बार भारत की ओर रुख किया है। इस साल 21 मई को पहली बार जैसलमेर के फलौदी इलाके में टिड्डियों ने हमला किया था, इस हमले में बाड़मेर, जोधपुर, जैसलमेर, और जालोर समेत कई जिलों में काफी नुकसान हुआ था। जिसके बाद केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने एक विशेष दल राजस्थान भेजा था। पाकिस्तान से सटी राजस्थान की 1070 किमी की अंतरराष्ट्रीय सीमा को उस वक्त अलर्ट पर रखा गया था। जुलाई में राजस्थान में ये मामला राजस्थान विधानसभा में भी उठा था। उस वक्त राजस्थान सरकार ने कहा था कि टिट्डि दल से यमन, ईरान और पाकिस्तान के रास्ते भारत में प्रवेश किया।


1993 के बाद 2019 में हुआ बड़ा हमला

इससे पहले टिड्डियों का बड़ा हमला 1993 में हुआ था, उस वक्त सितंबर-अक्टूबर में पाकिस्तान से आए टिड्डियों के हमले में लाखों हेक्टेयर फसल चौपट हो गई थी। ग्रासहोपर की एक खास प्रजाति टिड्डी के बारे में कहा जाता है कि इनका एक दल 150 किलोमीटर तक हवा में उड़ता है। किसान परेशान इसलिए भी हैं क्योंकि टिड्डियों का एक दल एक दिन में 35000 लोगों जितना भोजन कर सकता है। ये अपने रास्ते में आने वाले पेड़-पौधों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। (सभी फोटो- साभार सोशल मीडिया)

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