नकली खाद, घटतौली व सरकारी दफ्तरों का फेरा

नकली खाद, घटतौली व सरकारी दफ्तरों का फेराप्रतीकात्मक तस्वीर

लखनऊ। एक तरफ मौसम की मार दूसरे घटतौली और मिलावटखोर किसान की किस्मत पर डाका डाल रहे हैं। जहां इफ्को खाद कंपनी की बोरियों की सील खोल कर घटतौली का मामला सामने आया है, तो वहीं सीतापुर जिले में नकली खाद बनाने का भंडाफोड़ करते हुए कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

एक किसान द्वारा इफ्को खाद की बोरी खरीदे जाने पर तौल में कम होने पर जब मामला सोशल मीडिया के जरिए प्रधानमंत्री कार्यालय, इफ्को कंपनी और रसायन उर्वरक मंत्रालय के संज्ञान में आया तो इफ्को कंपनी ने ट्वीट कर जवाब दिया- इस बोरी में सोसाइटी ने हेरफेर किया है, क्योंकि इफ्को बोरी सील-बंद करने के लिए 'हरे रंग का धागा' उपयोग करता है, जबकि जिस किसान को कम वजन की बोरी दी गई उस फोटो में खाद की बोरी 'सफ़ेद रंग के धागे' से सील-बंद की गई है'। कंपनी ने आगे कहा-ये धांधली सोसाइटी में की जाती है। इसमें कंपनी का कुछ लेना देना नहीं है। इस मामले की जांच के आदेश केन्द्रीय उर्वरक और रसायन मंत्री अनंत कुमार ने दे दिए हैं, कि घटतौली किस स्तर से की जाती है।

वहीं, शुक्रवार को सीतापुर जिले में बहराइच मार्ग पर रेउसा कस्बे में संतोष खाद भंडार एक किसान की शिकायत पर पुलिस और कृषि विभाग की टीम ने नकली खाद बनाने के कारोबार का भंडाफोड़ करते हुए नकली खाद बनाने में प्रयुक्त होने वाला 17 गत्ता पाउडर और 500 खाली बोरियां बरामद कीं।

इस खाद की दुकान से एक किसान ने चार बोरी डीएपी खरीदी। जब उसे नकली खाद का शक हुआ तो उसने इसकी सूचना थाने पर दी। पुलिस ने जब दुकान पर छापेमारी की तो गोदाम में एक कंपनी की खाद को दूसरी बोरियों में भरा जा रहा था। छापेमारी के दौरान करीब 50 बोरी डीएपी पिकअप में लोड मिलीं। इसके बाद तहसीलदार बिसवां नीरज पटेल ने गोदाम में मौजूद सभी बोरियों को सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए। अफसरों ने खाद का सैंपल जांच के लिए भेज दिया है।

वहीं, इसके बाद एसडीएम बिसवां व कृषि रक्षा अधिकारी ने कस्बे में मौजूद दूसरी खाद की दुकानों की भी जांच की। सीतापुर बिसावां के तहसीलदार नीरज पटेल ने बताया, "छापेमारी में खाली बोरियों सहित भरी हुई खाद की बोरियां मिली हैं। जांच के के बाद खाद में मिलावट मिली। इस मामले को प्रकाश में आते ही उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने तुरंत कार्रवाई करते हुए इस मामले में खाद बेचने वाले दुकानदार पिता-पुत्र बृजलाल और संतोष कुमार और गोदाम संचालक रामचंद्र के खिलाफ कार्रवाई की। आरोपियों को जेल भेज दिया गया।"

वहीं मामले के संज्ञान में आते हुए कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने बताया, ''किसानों से अपील है कि वह प्रमाणिक दुकान से ही खाद जांच-परख करके खरीदें। जहां कहीं भी उन्हें खाद को लेकर संदिग्ध मामला दिखे इसकी सूचना वह तुरंत संबंधित थाने और कृषि विभाग को दें,'' आगे बताया, ''कृषि विभाग नकली खाद के खिलाफ लगातार अभियान चला रहा और नकली क खाद की पहचान के लिए किसानों के बीच में जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं।"

एक विशेषज्ञ ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "नकली पोटाश बालू, लाल रंग का दीवार रंगने वाला से और नमक से तैयार किया जाता है। वहीं, असली डीएपी किसान को 1050 से लेकर 1060 रुपये प्रति बोरी पड़ती है। जबकि नकली डीएपी को बनाने में 350 से लेकर 360 रुपये प्रति बोरी खर्च होते हैं।

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खादों में मिलावट के ये हैं तरीके

खाद की मिलावट के कई तरीके हो सकते है जिनमें खाद की नकली बोराबंदी यानी बोरे पर किसी नामी कंपनी का नामनिशान छपा होता है, पर उस के अंदर घटिया खाद भरी होती है। इस के लिए मशहूर कंपनियों की खादों के खाली बोरे खरीद कर उन में नकली खादें भर दी जाती हैं। दूसरे तरीके के तहत महंगी खादों में सस्ती खादें मिलाई जाती हैं और तीसरे तरीके में खाद में नमक और रेत वगैरह मिलाया जाता है। यूरिया में नमक, सिंगल सुपर फास्फेट में बालू, राख, कापर सल्फेट, फेरस सल्फेट और म्यूरेट आफ पोटाश में रेत व नमक मिलाया जाता है। डीएपी में दानेदार सिंगल सुपर फास्फेट और राक फास्फेट, एनपीके में सिंगल सुपर फास्फेट या राक फास्फेट, जिंक सल्फेट में मैगनीशियम सल्फेट मिला दिया जाता है।

केंद्रीय उर्वरक गुण नियंत्रण एवं प्रशिक्षण संस्थान, फरीदाबाद, हरियाणा की रिपोर्ट के अनुसार खाद में मिलावट रोकने, नमूने लेने, जांच-परख का सरकारी इंतजाम और कायदेकानून हैं, लेकिन इसपर अमल कम ही होता है, इसीलिए खाद में हो रही मिलावट रोके नहीं रुक रही।

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बीते पांच वर्ष में अधिक मात्रा में फेल हुए नमुनें

बीते 5 सालों में भरे गए खाद के कुल 6,44,983 नमूनों में से 32,283 नमूने फेल हो गए थे। बीते 5 सालों में खादों के जितने सैंपल भरे गए, उन में फेल सैंपलों की गिनती 5 फीसदी के आसपास बनी रही। मिलावटी खादों पर नकेल कसने के इंतजाम आधे-अधूरे हैं, लिहाजा मिलावटखोर जल्दी नहीं पकड़े जाते, जो पकड़े जाते हैं, उन पर सख्त कार्यवाही नहीं होती है। इतने बड़े कृषि प्रधान देश में खाद की क्वालिटी जांचने के लिए सिर्फ 78 लैबें ही हैं, जिन की सालाना सिर्फ 152470 नमूने जांचने की क्षमता रखती है। दिल्ली, गोवा, त्रिपुरा, नागालैंड, मणीपुर, मेघालय, सिक्किम, अरुणांचल प्रदेश व पांडिचेरी के अलावा संघ शासित राज्यों में खाद जांचने की कोई क्वालिटी कंट्रोल लैब नहीं है।

सरकारी लिस्ट में कुल 29 तरह की खादें

फर्टीलाइजर कंट्रोल आर्डर 1985 के तहत सरकारी लिस्ट में कुल 29 तरह की खादें हैं, उनमें से सिर्फ 14 को ही खास बढ़ावा दिया जाता है। उत्तर भारत के ज्यादातर इलाकों में खादों में मिलावट के मामले ज्यादा मिलते हैं।

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मिलावट की वजह से होती है कीमतों में बढ़ोतरी

खादों में मिलावट की वजह कीमतों और मांग में बढ़ोतरी भी है। साल 2011-12 में यूरिया की खपत 295 लाख टन, 2012-13 में 300 लाख टन व साल 2013-14 में 306 लाख टन हुई थी। इस दौरान डीएपी की खपत क्रमश: 101, 91 व 73 लाख तथा एनपीके की खपत क्रमश: 277, 255 व 244 लाख टन थी। जाहिर है कि देश में यूरिया की खपत सब से ज्यादा होती है और इस में लगातार इजाफा हो रहा है। रासायनिक खाद की सब से ज्यादा खपत पंजाब में प्रति हेक्टेयर 250 किलोग्राम, बिहार में 212 किलोग्राम और हरियाणा में 207 किलोग्राम है। उड़ीसा में रासायनि खाद की प्रति हेक्टेयर खपत 90 किलोग्राम, राजस्थान में 51 किलोग्राम और हिमाचल प्रदेश में 50 किलोग्राम है। खाद की सब से कम खपत पूर्वोत्तर राज्यों में सिर्फ 5 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर से भी कम है। उधर के किसान देसी खादों पर ज्यादा भरोसा करते हैं। वे बिना खाद और दवा की फसलें उगा कर ज्यादा दाम पाते हैं।

रासायनिक खाद खरीदते समय इन बातों को रखें ध्यान

केंद्रीय उर्वरक गुण नियंत्रण एवं प्रशिक्षण संस्थान, फरीदाबाद, के निदेशक शैलेन्द्र सिंह ने बताया कि किसानों से खाद खरीदते हुए कुछ खास बातों का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसान इफको और कृभको की खादें कोआपरेटिव सोसायटी से लें या फिरकिसी नामी कंपनी की खाद भरोसे की दुकान से खरीदें। खाद लेते वक्त रसीद और बोरे की सिलाई अच्छी तरह से देख लें। यदि जरा सा भी शक हो तो सुबूत सहित कृषि विभाग के अधिकारियों से उस की शिकायत जरूर करें।

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खाद असली है या नकली इस तरीके से कर सकते हैं जांच

भारत सरकार ने रासायनिक उर्वरकों की क्वालिटी कंट्रोल के लिए एक संस्था बना रखी है, जिस का नाम है केंद्रीय उर्वरक गुण नियंत्रण एवं प्रशिक्षण संस्थान। इस संस्था ने खादों में मिलावट की जानकारी देने के लिए फोल्डर ओर मिलावट जांचने के लिए किट बनाया है। इन के जरीए किसान खुद खाद में मिलावट की जांच कर सकते हैं। इसके अलावा खाद खरीदते वक्त दुकानदार से मिली रसीद की फोटो कापी के साथ खाद का नमूना इस संस्थान को जांचने के लिए भेज सकते हैं।

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