कृषि मंत्रालय से मिले आश्वासन के बाद किसानों का धरना खत्‍म, सरकार ने मानी 5 मांगें

Vivek ShuklaVivek Shukla   21 Sep 2019 10:01 AM GMT

कृषि मंत्रालय से मिले आश्वासन के बाद किसानों का धरना खत्‍म, सरकार ने मानी 5 मांगेंकिसान कई मांगों को लेकर दिल्‍ली के दरवाजे पर दस्‍तक दी थी।

दिल्‍ली। कम रेट पर बिजली मिलने, ब्याज सहित गन्ना मूल्य का भुगतान, गोवंश की देखभाल का बढ़ा भत्ता, किसान पेंशन, स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू करने समेत कई मांगों को लेकर दिल्ली के बार्डर पर डेरा डालने वाले किसानों ने अपना आंदोलन आश्वासन के बाद समाप्त कर दिया। भारतीय किसान संगठन के 11 सदस्यों के प्रतिनिधि मंडल ने कृषि मंत्रालय के अधिकारियों से मिले आश्वासन के बाद किसानों यूपी गेट से ही वापस हो गए।

भारतीय किसान संगठन जिला अध्‍यक्ष नकुल अहलावत ने गांव कनेक्‍शन को बताया कि हमारे 11 प्रतिनिधियों से कृषि मंत्रालय में संयुक्‍त सचिव विवेक अग्रवाल से मुलाकात की। उन्‍होंने किसानों की बात सुनी। इसके बाद मंत्रालय ने हमारी कुछ मांगों को स्‍वीकार किया और कई मांगों पर विचार करने की बात कही। अब 'किसान बीमा योजना' का लाभ सभी किसानों को दिया जाएगा। प्रदूषित नदियों की सफाई के लिए विशेष टास्क फोर्स बनाई जाएगी। 14 दिन के अंदर गन्ना किसानों का भुगतान किया जाएगा। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को और आसान बनाया जाएगा। किसानों पर धरना प्रदर्शन के कारण लगे मुकदमों को जल्द खत्म करने का भी आश्‍वासन दिया गया है।

भारतीय किसान संगठन के अध्यक्ष पूरन सिंह ने कहा, "सरकार ने हमारी पांच मांगें मान ली हैं। हमने आंदोलन खत्म नहीं किया है बल्कि ये तो सिर्फ अस्थायी व्यवस्था है। हम प्रधानमंत्री से 10 दिन बाद फिर मिलेंगे और बाकी 10 मांगें उनके समक्ष रखेंगे।"

इससे पहले पूरन सिंह ने शनिवार सुबह ही क‍हा था कि 11 प्रतिनिधियों को कृषि मंत्रालय में भेजा गया है। अगर वहां हमारी मांगे मान ली जाती हैं, तो हम दिल्ली-यूपी सीमा लौट जाएंगे, अन्यथा हम दिल्ली तक मार्च करेंगे।

राष्ट्रीय संयोजक, राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के अध्‍यक्ष सरदार वीएम सिंह ने कहा, "बीते साल भी किसानों ने भारी संख्‍या में आकर सरकार को अपनी बात बताने की कोश‍िश की थी लेकिन उसी समय पुलवामा में राष्ट्र का मुद्दा आ गया। हमारा मुद्दा किसी राष्‍ट्रवाद से कम नहीं था। किसान अनाज उगाकर पुरे देश का पेट भरते हैं। किसान अपने अध‍िकार की मांग को लेकर दिल्‍ली आता है लेकिन उन्‍हें बार्डर पर ही रोक लिया जाता है।"

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सरकार की ओर से किसानों की 5 मांगें मान ली गई है।सरकार की ओर से किसानों की 5 मांगें मान ली गई है।

गौरतलब है कि देश की राजधानी दिल्ली में उत्तर प्रदेश के किसान मांगों को लेकर शनिवार सुबह किसान घाट पर प्रदर्शन करने पहुंच रहे थे। किसानों के इस प्रदर्शन को लेकर पुलिस भी हाई अलर्ट रही, सुरक्षा व ट्रैफ‍िक को देखते हुए रुट डायवर्ट कर दिया गया था।

यूपी के सहारनपुर से किसान मांगों को लेकर बीते 11 सितंबर को यात्रा शुरू करते हुए शुक्रवार को नोएडा पहुंची थी। किसानों की प्रमुख मांग है कि उन्हें कम रेट पर बिजली मिले, गन्ने का भुगतान ब्याज सहित हो, गोवंश की देखभाल का भत्ता बढ़ाया जाए, किसान पेंशन शुरू हो, किसान और मजदूरों की शिक्षा और स्वास्थ्य मुफ्त हो, किसान दुर्घटना बीमा मिले, स्वामिनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू हो, साथ ही किसानों की कर्ज माफी भी की जाए।

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प्रदर्शन में हजारों किसान शामिल हुए।प्रदर्शन में हजारों किसान शामिल हुए।

इन मांगों को लेकर नोएडा में इस रैली के नेतृत्वकर्ता भारतीय किसान संगठन और कृषि मंत्रालय के बीच बातचीत हुई लेकिन इसका कोई परिणाम नहीं निकला था। इसके बाद किसानों ने दिल्ली के किसान घाट पर प्रदर्शन करने का फैसला लिया।

गौरतलब है कि इससे पहले भी अक्‍टूबर 2018 में किसानों ने 'किसान क्रांति यात्रा' निकाली थी। यह यात्रा हरिद्वार से दिल्‍ली पहुंची थी और इस पदयात्रा में देश के अलग-अलग राज्यों से हजारों किसानों ने हिस्‍सा लिया था। हरिद्वार से दिल्ली के लिए रवाना हुई किसान क्रांति यात्रा में शामिल हजारों किसानों को दिल्ली सीमा से सटे गाजियाबाद के इलाके रोका गया था, किसानों द्वारा विरोध करने पर पुलिस ने आंसू गैस के गोलों और वॉटर कैनन का इस्तेमाल भी किया था। इन किसानों को दिल्ली में प्रवेश की अनुमति नहीं मिली थी।

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किसानों ने सहारनपुर से निकाली थी यात्राकिसानों ने सहारनपुर से निकाली थी यात्रा

ये थी किसानों की प्रमुख मांगें...

1. भारत के सभी किसानों के कर्जे पूरी तरह माफ हों।

2. किसानों को सिंचाई के लिए बिजली मुफ्त मिले।

3. किसान व मजदूरों की शिक्षा एवं स्वास्थ्य मुफ्त।

4. किसान-मजदूरों को 60 वर्ष की आयु के बाद 5,000 रुपये महीना पेंशन मिले।

5. फसलों के दाम किसान प्रतिनिधियों की मौजूदगी में तय किए जाएं।

6. खेती कर रहे किसानों की दुर्घटना में मृत्यु होने पर शहीद का दर्जा दिया जाए।

7. किसान के साथ-साथ परिवार को दुर्घटना बीमा योजना का लाभ मिले।

8. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट और एम्स की स्थापना हो।

9. आवारा गोवंश पर प्रति गोवंश गोपालक को 300 रुपये प्रतिदिन मिलें।

10. किसानों का गन्ना मूल्य भुगतान ब्याज समेत जल्द किया जाए।

11. समस्त दूषित नदियों को प्रदूषण मुक्त कराया जाए।

12. भारत में स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू हो।

13.घरेलू बिजली बिल पूर्व की भांति 100 रुपए प्रति माह किया जाए।

14. पुरकाजी में स्‍थ‍ित सूली वाला बाग शहीद स्‍थल घोषित हो।

15. भारत के सभी सदनों के सदस्‍यों की पेंशन बंद हो।

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