सरकार और किसानों के बीच 10वें दौर की वार्ता एक दिन टली, अब बुधवार को होगी बैठक, कृषि सचिव ने लिखा खत

Arvind ShuklaArvind Shukla   18 Jan 2021 6:13 PM GMT

19 जनवरी को कृषि कानूनों पर होने वाली सरकार के साथ वार्ता टल गई है।किसान संगठनों की सरकार के साथ अब 20 जनवरी को वार्ता होगी।

नई दिल्ली/ लखनऊ। कृषि कानूनों को लेकर सरकार और किसान संगठनों के बीच होने वाली 10वें दौर की वार्ता एक दिन के लिए टल गई है। अब ये बैठक 20 जनवरी यानि बुधवार हो होगी। कृषि सचिव संजय अग्रवाल ने किसान संगठनों को लिखे खत में इसकी जानकारी दी है। बुधवार को ही सुप्रीम कोर्ट में कृषि कानूनों को लेकर नई समिति बनाने की याचिका, किसानों की 26 जनवरी की प्रस्तावित ट्रैक्टर परेड को लेकर दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार की याचिकाओं पर सुनवाई होगी।

केंद्रीय कृषि सचिव संजय अग्रवाल का खत, जिसमें बैठक 19 की जगह 20 जनवरी को दोपहर 2 बजे प्रस्तावित है।

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि किसान नेता कृषि कानून रद्द करने के अलावा दूसरे विकल्प बताएं, सरकार उस पर विचार करेगी। इसी बीच किसान संगठनों के बीच मनमुटाव को शांत करते हुए संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है सभी संगठन एकजुट हैं।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि सरकार कृषि कानूनों में संशोधन को तैयार है तो किसानों को भी ज़िद नहीं करनी चाहिए। समाचार एजेंसी एनएआई से बात करते हुए नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, "भारत सरकार जब कोई कानून बनाती है तो वो पूरे देश के लिए होता है। ये कानून भी पूरे देश के लिए हैं। इन पर भी देश के अधिकांश किसान, कृषि वैज्ञानिक, विद्वान और कृषि के क्षेत्र काम करने वाले लोग सहमत हैं। अब तो सुप्रीम कोर्ट ने तीनों एक्ट का क्रियान्वयन रोक दिया है। ऐसे में किसान 19 तारीख की बैठक में कानून वापसी के अलावा उनमें जो भी बदलाव चाहते हैं, उन पर बिंदुवार चर्चा करें तो सरकार उनकी आपत्तियों पर विचार करने को तैयार है।" इससे पहले रविवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कर्नाटक की एक रैली में कृषि कानूनों को किसानों के हालात में आमूल चूल परिवर्तन लाने वाला बताया था। अमित शाह ने कहा, "नए कृषि कानूनों से 2022 तक किसानों की आमदनी दोगुनी हो जाएगी।" उन्होंने सवाल भी पूछा कि जो विपक्ष कृषि कानूनों पर किसानों को बरगला रहा है उसने अपने शासन में किसानों के लिए प्रधानमंत्री सम्मान निधि और प्रधानमंत्री फसल बीमा जैसी योजनाएं क्यों नहीं लागू की थी?

पंजाब किसान कमेटी दोआबा के प्रधान हरपाल सिंह सांगा ने गांव कनेक्शन को फोन पर बताया, "किसानों का एजेंडा शुरू से साफ है कानून वापस होने चाहिए। बैठक में भी सभी किसान जाएंगे, आगे सरकार बुलाएगी फिर जाएंगे। कानून वापसी तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा। इस बीच 26 जनवरी की तैयारियां भी जारी रहेंगी।"

इसी बीच किसान नेता गुरुनाम सिंह चढूनी को दोबारा संयुक्त किसान मोर्चा में शामिल कर लिया गया है। भारतीय किसान यूनियन हरियाणा के प्रधान चढ़ूनी पर राजनैतिक दलों के साथ बैठक करने करने का आरोप था। उन्हें रविवार की शाम को समिति से हटा दिया गया था। सोमवार को सिंघु बॉर्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा की सात बजे हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में योगेंद्र यादव ने कहा कि गुरुनाम सिंह चढ़ूनी सरकार से होने वाली वार्ता में शामिल होंगे।

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सरकार से 10वें दौर की वार्ता से पहले किसान संगठनों की अगुवाई कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा ने किसान संगठनों के बीच आई दरार की खबरों को निराधार बताते हुए कहा कि हम सब मिलकर लड़ाई लड़ेंगे।

किसान संगठनों की अगुवाई संयुक्त किसान मोर्चा की नेतृत्व 7 सदस्यीय कमेटी करती है, जिसके दो सदस्यों गुरुनाम सिंह चढ़ूनी (हरियाणा) और भारतीय किसान महासंघ (मध्य प्रदेश) के नेता शिव कुमार कक्का के बीच तनाव की खबरें थीं। चढ़ूनी पर आरोप है कि वो संयुक्त किसान मोर्चा को विश्वास लिए बिना विपक्षी दलों के नेताओं से बात कर रहे थे। जिसके जवाब में चढूनी ने शिवकुमार कक्का को राष्ट्रीय स्वयं सेवक का एजेंट बता दिया था।

सोमवार की शाम को सिंघु बॉर्डर पर हुई संयुक्त किसान मोर्चा की प्रेस कॉन्फ्रेंस में किसान नेता डॉ. दर्शनपाल, शिवकुमार कक्का, योगेंद्र यादव और जगजीत सिंह दलेवाल समेत कई किसान संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।

उधर, गुरुनाम सिंह चढ़ूनी ने एक प्रेस वार्ता में अपने पर लगे आरोपों पर कहा, वो किसी भी कीमत पर आंदोलन को टूटने नहीं देंगे। उन्होंने कहा, "हम लोग भी काफी लोगों से मिलते हैं और कई लोग हमारे आंदोलन में आते हैं। जिनमें कई राजनेता भी होते है लेकिन हम किसी को मंच शेयर करने नहीं देते हैं।"

20 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में नई समिति बनाने पर सुनवाई

किसान आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट की तरफ़ से बनाई गई समिति में बदलाव होगा या फिर नई समिति बनेगी इस पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा। बुधवार (20 जनवरी) को ही सुप्रीम कोर्ट किसान संगठनों की 26 जनवरी को प्रस्तावित ट्रैक्टर परेड पर भी सुनवाई करेगा। दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए 26 जनवरी की ट्रैक्टर परेड पर पाबंदी लगाने की मांग की है।

सोमवार को दिल्ली पुलिस की याचिका पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा, "दिल्ली की कानून व्यवस्था संभालना दिल्ली पुलिस की जिम्मेदारी है, 26 जनवरी को ये आपको तय करना है कि कौन दाखिल होगा कौन नहीं। हमें आपकी शक्तियों को याद दिलाने की जरुरत नहीं।"

वीडियो जिसमें गुरुनाम सिंह चढ़ूनी मामले को लेकर शिवकुमार कक्का ने क्या कहा सुनिए

27 नवंबर से दिल्ली के चारों तरफ पर डेरा डाले हैं किसान

सितंबर महीने में संसद के मॉनसून सत्र में तीनों नए कृषि कानून पास होने के बाद से ही पंजाब हरियाणा समेत कई राज्यों के किसान इन कानूनों का विरोध कर रहे हैं। इस आंदोलन की अगुवाई पंजाब के किसान कर रहे हैं। कई राज्यों के किसानों ने 26-27 नवंबर को चलो दिल्ली का ऐलान किया था। किसान अपने साथ कई महीनों का राशन और रहने का पूरा इंतजाम लेकर चले थे। इस दौरान इन्हें रोकने के लिए हरियाणा सरकार ने जगह-जगह बैरिकेड लगाए, हाईवे पर मिट्टी डलवाई, हाईवे को जेसीबी से खुदवाया लेकिन आंदोलनकारी किसान सभी बाधाओं को पार कर 27 नवंबर को दिल्ली पहुंच गए।

आंदोलन में राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के किसान भी भारी संख्या में शामिल हैं। यूपी के किसान गाज़ीपुर बॉर्डर पर डेरा डाले हुए हैं तो राजस्थान के किसान हरियाणा-राजस्थान के शाहजहांपुर बॉर्डर पर एक पखवाड़े से जमा है। देश के कई राज्यों से किसानों के दिल्ली आने का सिलसिला जारी है। किसान संगठनों ने 26 जनवरी की प्रस्तावित परेड में शामिल होने के लिए हर गांव से किसानों को ट्रैक्टर समेत दिल्ली आमंत्रित किया है। जिस पर दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से रोक की मांग की है।

रविवार को संयुक्त किसान मोर्चा ने साफ किया था कि ट्रैक्टर परेड आउटर रिंग रोड पर आयोजित की जाएगी। किसी किस्म की हिंसात्मक कार्रवाई, किसी भी तरह का हथियार नहीं होगा। किसी तरह का भड़काऊ भाषण नहीं होगा। औपचारिक गणतंत्र दिवस की परेड में किसी तरह की बाधा नहीं डाली जाएगी। किसी सरकारी प्रतीक या इमारत पर हमला या कब्जा करने की कोई रणनीति नहीं है।

गांव कनेक्शन से फोन पर बात करते हुए राष्ट्रीय किसान महासंघ के राष्ट्रीय प्रवक्ता अभिमन्यु कोहाड़ ने कहा, "ट्रैक्टर रैली तो ज़रुर होगी,लेकिन ये कहां होगी इसका फैसला सरकार के साथ 19 जनवरी की बातचीत के बाद लिया जाएगा।"

किसानों की प्रमुख 4 मांगे हैं

1.तीनों नए कृषि कानूनों को वापस लिया जाए।

2.एमएसपी पर संपूर्ण खरीद को कानून बनाया जाए।

3.प्रस्तावित बिजली विधेयक को वापस लिया जाए।

4.पराली संबंधी नए कानून से किसानों को हटाया जाए

अब तक दो मांगों पर बनी है सहमति

1."इलेक्ट्रिसिटी एक्ट' जो अभी आया नही हैं। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के मुताबिक किसान चाहते हैं, सिंचाई के लिए जो सब्सिडी राज्यों को दी जाती है वो उसी तरह जारी रहे, इस पर किसान यूनियन और सरकार के बीच सहमति हो गई है।

2. कृषि मंत्री के मुताबिक सरकार और किसान संगठनों के बीच हुई छठे दौर की बातचीत में बिजली संशोधन विधेयक 2020 और Delhi-NCR से सटे इलाकों में पराली जलाने को लेकर अध्यादेश संबंधी आशंकाओं को दूर करने के लिए सहमति बन गई है। कई किसान नेताओं ने भी कहा था कि पराली संबंधी कानून पर सहमति बनी है। जानकारी के मुताबिक इस संबंध में जो एक करोड़ के जुर्माने और सज़ा का प्रावधान है, उससे किसानों को अलग रखा जाएगा।

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