अाखिर कैसे रुकेगी किसानों की आत्महत्याएं, नई दिल्ली में देशभर के किसानों ने सरकार को घेरा

अाखिर कैसे रुकेगी किसानों की आत्महत्याएं, नई दिल्ली में देशभर के किसानों ने सरकार को घेरादिल्ली में धरना ्देते किसान। (सभी फोटो- अभिषेक वर्मा)

नई दिल्ली। देश भर से किसान इस समय नई दिल्ली में अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) के बैनर तले के बैनर तले दो दिनों के प्रदर्शन में भाग लेंगे। वे अपने उत्पाद के लिए बेहतर कीमतों और कर्ज से पूरी आजादी की मांग कर रहे हैं।

समिति के मुताबिक प्रदर्शन में करीब 184 किसान संगठन भाग ले रहे हैं। अखिल भारतीय किसान सभा के अध्यक्ष अशोक धावले ने समाचार एजेंसी आईएनएस से कहा, हमारी मुख्य मांग सही कीमत आंकलन के साथ वैध हक के तौर पर पूर्ण लाभकारी कीमतें और उत्पादन लागत पर कम से कम 50 फीसदी का लाभ अनुपात पाना है। उन्होंने कहा, हम फौरन व्यापक कर्ज माफी सहित कर्ज से आजादी की मांग कर रहे हैं।

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उन्होंने कहा कि किसानों की कर्ज की समस्या के हल के लिए सांविधिक संस्थागत तंत्र स्थापित किए जाने की भी मांग की है। धावले ने कहा, यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान वादा किया था कि यदि वह चुने जाते हैं तो किसानों को अपनी फसलों के लिए अच्छी कीमतें मिलेंगी और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू किया जाएगा।

एआईकेएससीसी के मुताबिक वर्तमान में लागत और आमदनी के बीच असंतुलन की वजह ईंधन, कीटनाशक, उर्वरक और यहां तक कि पानी सहित लागत की कीमतों में लगातार वृद्धि का होना है. इन चीजों का किसान सामना कर रहे हैं।

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अखिल भारतीय किसान सभा के नेता ने कहा कि कीमतों में घोर अन्याय किसानों को कर्ज में धकेल रहा है, वे आत्महत्या के लिए मजबूर हो रहे और देश भर में बार-बार प्रदर्शन हो रहे हैं। किसानों की दुदर्शा के हल के लिए हम बड़ी तादाद में देश की राजधानी में इकट्ठा हुए हैं।

महारष्ट्र बीड जिला गांव मोरगांव जिला पंचायत समिति सदस्य सबसे कम उम्र की सदस्य पूजा मोरे पहले इंजीनियर थी लेकिन अब वो किसान नेता राजू शेट्टी के साथ हैं जिन्होंने हाल ही में एनडीए छोड़ दिया है। वो इस आंदोलन से जुड़ी हैं। उनका कहना है कि सिर्फ किसान ही नहीं उनकी पत्नियां व बच्चे भी खदकुशी करने की कोशिश कर रहे हैं। गाँव में 100-100 लड़कियां ऐसी हैं जिनकी दहेज न होने की वजह से शादी नहीं हो रही तो वो खुदकुशी कर रही हैं। ये हमारी समाज व्यवस्था है, इस तरह सिर्फ किसान ही नहीं उसका पूरा परिवार मर रहा है। मैं 250 ऐसे किसानों के परिवारों से मिली हूं जिनके घर के किसान ने आत्महत्या कर ली। अगर महाराष्ट्र की बात करें तो ये आंकड़ा 50 हजार लांघ चुका है और पूरे देश में अब तक साढ़े चार लाख किसान आत्महत्या कर चुके हैं। ये बहुत गंभीर समस्या है।

मोदी साहब से ये बात कहना चाहती हूं कि मन की बात न करें काम की बात करें। अब राष्ट्रपति से आशा है कि वो कुछ करेंगे क्योंकि मोदी जी तो कुछ कर न सके सिर्फ आश्वासन दिए उन्होंने। इस बार हम बोलेंगे कि मोदी हटाओ किसान बचाओ, मोदी हटाओ किसान बचाओ। मोदी सरकार ने कहा था कि वो किसानों के लिए कुछ करेगें हमें भी उम्मीद थी इसलिए किसान नेता राजू शेट्टी भी उनसे जुड़े थे लेकिन जब ऐसा नहीं हुआ तो उन्होंने सत्ता छोड़ दी। उनमें ये ताकत थी कि वो इस्तीफा दे सकें बाकी लोग इस्तीफा नहीं दे सकते।

हमारी सरकार से लड़ाई है। हमें नहीं लगता कि ये भारत की सरकार है, ये पाकिस्तान की सरकार है प्याज उन्होंने पाकिस्तान से मंगाया। जबकि हमारे महाराष्ट्र में दो गाँवों में आंदोलन चल रहा था वहां किसानों पर गोलीबारी की गई। किसानों ने ऐसा क्या किया है कि उनपर गोली बारी कर रहे हो। उन्होंने कहा था कि हम आंतकवाद मिटा देंगे और आज खुद आंतकी बनकर गोली बरसा रहे हो।

ये हैं मांगें

सड़क, शिक्षा, गाँव को शहर के बराबर बजट दें, कर्जमुक्ति व स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू हो।

नहीं रुक रहीं आत्महत्याएं

महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में कर्ज और तंगी के चलते आत्महत्या करने वाले किसानों का आंकड़ा 814 हो गया है। जनवरी से अब तक मराठवाड़ा क्षेत्रे में कर्ज के चलते 814 किसान आत्महत्या कर चुके हैं। एक अन्य खबर के मुताबिक, महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या को लेकर नवंबर में जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, जून से लेकर अक्टूबर तक यानी पांच महीनों के भीतर 1254 किसानों ने आत्महत्या की। आकड़े के अनुसार, इस साल जनवरी से लेकर अक्टूबर तक 10 महीनों में महाराष्ट्र में 2414 किसानों ने आत्महत्या की हैं।

स्वराज इंडिया के नेता योगेंद्र यादव ने किसानों की रैली को संबोधित करते हुए मांग की कि केंद्र सरकार को सभी राज्यों के किसानों का ऋण माफ करना चाहिए। यादव ने कहा, "हमारी दो मांगें हैं, पहली कि लाभकारी कीमतें स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुसार उत्पादन लागत और उसके ऊपर 50 फीसदी होनी चाहिए और दूसरी मांग है कि सभी कृषि ऋण पर एक बार छूट देनी चाहिए। पिछले कुछ वर्षो में राज्य सरकारों ने अधिकतर कदम उठाए हैं, लेकिन अनुभव कहता है कि जब तक केंद्र सरकार इसमें कदम नहीं उठाएगी, ऋण को माफ नहीं किया जा सकता।"

(नई दिल्ली से- अरविंद शुक्ला, अश्वनी निगम, दिति वाजपेई की रिपोर्ट)

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