जैसे वो किसान नहीं अपराधी हों, दिल्ली में घुसने से रोका, पुलिस ने जहां देखा वहीं से गिरफ्तार कर लिया

जैसे वो किसान नहीं अपराधी हों, दिल्ली में घुसने से रोका, पुलिस ने जहां देखा वहीं से गिरफ्तार कर लियाकिसानों को जहां-तहां रोक लिया गया है।

कर्ज माफी और फसलों का लागत मूल्य से डेढ़ गुणा अधिक न्यूनतम समर्थन मूल्य की मांग को लेकर किसान आंदोलित हैं। शुक्रवार को किसानों ने विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली कूच किया। कई किसान पुलिस प्रशासन की निगाहों के बचकर दिल्ली कूच करने में सफल रहे, जबकि कई किसानों को पुलिस ने पहले ही हिरासत में ले लिया। अकेले जींद में 50 से अधिक किसानों को हिरासत में लिया गया है। दिल्ली की सीमा से सटे इलाकों में बड़ी संख्या में पुलिस व अर्धसैनिक बलों को तैनात किया गया है।

अपनी प्रस्तावित मांगों के लिए शुक्रवार को देशभर के 68 किसान संगठनों के बैनर तले लाखों की संख्या में किसान राजधानी दिल्ली में प्रदर्शन करने जा रहे थे। हरियाणा, पंजाब, राजस्थान के किसान ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के साथ शुक्रवार को दिल्ली की सड़कों पर उतरे हैं। इस प्रदर्शन में दक्षिण भारत व छत्तीसगढ़ के किसान भी अपने-अपने राज्‍यों में विरोध-प्रदर्शन करके शामिल होंगे। कयास लगाए जा रहे थे कि किसान संगठन दिल्ली के पॉश इलाकों में अपना प्रदर्शन करते।

क्यों प्रदर्शन कर रहे किसान

68 किसान संगठनों की मांग है कि जितने भी राज्यों में किसानों पर कर्ज है उसे केंद्र और राज्य सरकार माफ करें। इसके साथ ही उनकी मांग हैं कि वर्ष 2006 केंद्र सरकार की ओर से एमएस स्वामीनाथन की जी रिपोर्ट आई थी, उसे लागू किया जाए, ताकि किसानों के आर्थिक हालात सुधर सके।

अनशन पर बैठे किसान

दिल्ली जा रहे किसान हरविंदर सिंह बताते हैं "मेरे गंगानगर (राजस्थान) के सभी साथियों को जाट धर्मशाला जींद मे गिरफ्तार कर लिया गया है। वे नहा रहे थे। बताओ उनका क्या दोष है। जेल में ही किसानों ने अनशन शुरू कर दिया है। गंगानगर के किसानों में से आधे किसान ही आंदोलन में शामिल हो पाए हैं। आधे किसानों को हरियाणा पुलिस ने नजरबंद कर रखा है। रास्ते भर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात है।

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हरविंदर आगे कहते हैं “नजरबन्द किसानों ने भी अनशन शुरू कर दिया है। मेरे गंगानगर के काफी साथियों को जाट धर्मशाला जींद मे गिरफ्तार कर लिया गया है। किसानों के एक जत्थे को जींद में गिरफ्तार कर पुलिस स्टेशन में बंद कर दिया गया है। सरकार किसानों के आंदोलन को दबाना चाहती है। ये लोकतंत्र की हत्या है। किसान अपनी आवाज भी नहीं उठा सकता। रणजीत सिंह राजू, दल सिंह बराड़, जगदीश नायक, कुलवंत सहारन, संदीप सहारन, रजिंदर सिंह, नरिंदर मान, मोहिन्दर भुवाल, समीर साहू, प्रदीप सियाग, प्रकाश भादू, रिषपाल सिंह मक्कासर, मनप्रीत बराड़ जैसे किसान आमराण धरने पर बैठ गये हैं।"

ट्रैक्टर ट्रॉली के साथ हिरासत में किसान

शुक्रवार को दिल्ली में कूच करने से पहले गुरुवार को तय कार्यक्रम के अनुसार सभी किसान गन्नौर में अपनी ट्रैक्टर ट्रॉली के साथ इक्ट्ठा हुए थे। किसानों के इक्ट्ठा होने की जानकारी मिलते ही पुलिस ने उनसे बात करने की कोशिश की। अधिकारियों के समझाने के बाद भी किसान नेता और यूनियन के सदस्य नहीं माने तो पुलिस ने उन्हें हिरासत में लेकर ट्रैक्टर ट्रॉली को भी अपने कब्जे में ले लिया। किसान मामलों के जानकार रमनीदप सिंह मान कहते हैं "किसानों को दिल्ली पहुंचने ही नहीं दिया जा रहा है। जहां-तहां किसानों को रोक लिया गया है। पुलिस किसानों को बढ़ने नहीं दे रही है।"

हरियाणा में राष्ट्रीय किसान महासंघ के आह्वान पर कई राज्यों के किसान दिल्ली घेराव के लिए सीमावर्ती जिलों में डेरा जमाए हुए थे। आंदोलनकारियों से निपटने के लिए प्रमुख किसान नेताओं की गिरफ्तारियां की जा चुकी हैं। किसान संगठनों का दावा है कि हरियाणा से सैकड़ों किसान हिरासत में लिए गए हैं। किसान नेता कर्म सिंह मथाना, कुरुक्षेत्र जिला प्रधान कृष्ण कुमार, भूरा राम पपनवा सहित कई किसान नेताओ को हिरासत में लिए जाने की बात कही जा रही है।

गुरुवार को राष्ट्रीय किसान महासंघ की कोर कमेटी के सदस्य सरदार गुरनाम सिंह चढ़ूनी के घर पर पुलिस ने धावा बोला और उनके बड़े भाई गुरदीप सिंह और बड़े बेटे हर्षपाल को उठाया। मंडल प्रधान सत्यवान नरवाल, यमुनानगर से संजू सरवा, कृष्ण सुड़ल, संदीप महेश्वरी, सोनीपत से रोहतास बेनीवाल, हिसार के सुरेश कोथ को हिरासत में लिया गया है। करनाल के घरौंडा, कैथल और जींद के नरवाना में भी किसानों को हिरासत में लिया गया है। आइजी ममता सिंह ने बताया कि राज्य में पैरा मिलिट्री फोर्स की 25 कंपनियां तैनात की गई हैं।

वहीं कैथल (हरियाणा) में किसान आंदोलन के मद्देनजर फरल निवासी गुणी प्रकाश को सहयोगियों के साथ अनौपचारिक रूप से उनके गांव से ही सुबह हिरासत में ले लिया गया है। इसी प्रकार कौल से सेवा सिंह कौल को उनके साथियों के गिरफ्तार किया गया है। गुरुवार को डीजीपी ने कुरुक्षेत्र में 6 जिलों के पुलिस अधीक्षकों की बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए थे कि किसान आंदोलन के चलते किसी प्रकार का नुकसान, परेशानी आमजन को न हो और न ही अफरा-तफरी का माहौल बने।

किसान महासंघ के नेता सुरेश मुन्नारेहड़ी बताते हैं "हमारे साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया जा रहा है। हमारे साथियों को घर से उठा लिया गया। ऐसा तो अंग्रेजों के समय भी नहीं होता था। हमें अब अपनी मांग रखने का भी अधिकार नहीं है। हमारा आंदोलन जारी रहेगा।"

मध्य प्रदेश से नई दिल्ली जा रहे किसानो को फरीदाबाद में ही रोक लिया गया है। फरीदाबाद के अनाज मंडी पहुंचे मध्य प्रदेश से आए हजारों किसानों को गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे पुलिस ने अनाजमंडी में ही राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिव कुमार शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष देवनारायण पटेल समेत कई किसानों को गिरफ्तार कर लिया है। इसके बाद किसानों ने अनाज मंडी में ही अपनी मांगों को लेकर आमरण अनशन शुरू कर दिया है।

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अनशन पर बैठे शिव कुमार शर्मा ने कहा "किसानों को अपनी मांगों के लिए लामबंद होना पड़ेगा। जिस दिन दो करोड़ किसान दिल्ली में इकट्ठा हो जाएंगे उस दिन सरकार गिर जाएगी। किसानों को किसान विरोधियों निति के खिलाफ उठना होगा। आगे आना होगा। अब तो सबसे बड़ा सवाल विश्वास का है। सरकार आती हैं, नेता आते हैं, लेकिन किसानों के लिए कोई नहीं सुनता। किसानों को अपनी आवाज उठाने के लिए खुद आगे आना होगा।"

क्यों बना था स्वामीनाथन आयोग ?

बता दें कि वर्ष 2004 में केंद्र सरकार ने किसानों की आर्थिक हालात को बेहतर करने और अन्न की आपूर्ति को भरोसेमंद बनाने के लिए वर्ष 2004 में एमएस स्वामीनाथन की अध्यक्षता में नेशनल कमीशन ऑन फार्मर्स का गठन किया था। इस आयोग ने 2006 में अपनी रिपोर्ट सौंपते हुए कहा था कि किसानों के तेज व ज्यादा समग्र आर्थिक विकास के 11वीं पंचवर्षीय योजना के लक्ष्य को लेकर बनी है।

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