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किसानों पर आफत के ओले, अनाज, सब्जी और दलहन की फसलों को नुकसान

Mithilesh DubeyMithilesh Dubey   6 March 2020 1:45 PM GMT

"बारिश के साथ ओले भी गिरे जिससे बहुत नुकसान हो गया है। जीरे की लगभग 35 फीसदी फसल खराब हो गई है। इसके अलावा गेहूं और सरसों भी बर्बाद हुआ है। इस मौसम में हमारे यहां ज्यादा बारिश नहीं होती लेकिन इस बार भगवान से हमारी खुशी देखी नहीं गई।" जगदीश कुमार गर्ग बताते हैं।

जगदीश राजस्थान के जिला बाडमेर, तहसील गुड़ामालानी के गांव देवनग में रहते हैं। उन्होंने इस साल लगभग 5 बीघे खेत (एक एकड़ से ज्यादा) में जीरा लगाया था। वे कहते हैं, " बाजार में अभी जीरे की कीमत 100 से 150 रुपए प्रति किलो के बीच मिल रही है। मेरे एक बीघा खेत में लगभग 10 कुंतल जीरा पैदा होता है। इस हिसाब से अगर मुझे एक किलो जीरे के बदले 100 रुपए भी मिलता तो मेरा नुकसान एक लाख 25 हजार रुपए से ज्यादा का हुआ है।" भारत में जीरे की खेती सामान्यत: नवंबर-दिसंबर में होती है और उपज लगभग 120-125 दिनों में तैयार हो जाती है।

देश के अलग-अलग राज्यों में फरवरी 2020 के आखिरी सप्ताह से लगातार बारिश हो रही है, लेकिन दो से छह मार्च के बीच बारिश के साथ-साथ कई जिलों में ओले भी गिरे हैं। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी, सीतापुर, महाराजगंज, रायबरेली, गोरखपुर, जौनपुर, आगरा फिरोजाबाद सहित 15 से ज्यादा जिलों में बारिश के साथ के ओले गिरे हैं। वहीं मध्य प्रदेश के ग्वालियर बेल्ट, बिहार के सीतामढ़ी, सिवान और हरियाणा के भिवानी, रोहतक, हांसी समेत कई जिलों में आसमानी आफत से सरसों, अहरह, गेहूं, आम, सब्जी, तिलहन और प्याज की फसल बर्बाद हुई है।

मौसम विभाग ने छह और सात मार्च को उत्तर भारत के कई राज्यों में भारी बारिश की आशंका व्यक्त की है।

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बिहार में गुरुवार देर रात (5 मार्च) और शुक्रवार सुबह (6 मार्च) को तेज हवाओं के साथ बारिश हुई और कई जिलों में ओले भी गिरे। दरभंगा, सीवान, अररिया, मधेपुरा, मधुबनी, कटिहार सहित कई जिलों में गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचा है। मौसम विभाग ने अगले 72 घंटे के अंदर और बारिश, ओलावृष्टि की आशंका व्यक्त की है।

बिहार, मधुबनी के गांव बसौली में रहने वाले किसान पंकज कुमार गांव कनेक्शन को फोन पर बताते हैं, "बाढ़ की वजह से धान की पूरी फसल बर्बाद हो गई थी। एक एकड़ में गेहूं लगाया था, फसल अच्छी थी लेकिन रात में तेज हवाओं के साथ ओले भी गिरे जिससे पूरी फसल जमीन पर आ गई है। पता नहीं अब इसमें कितना अन्न निकलेगा।"

मौसम की जानकारी देने वाली एजेंसी स्काईमेट की रिपोर्ट के अनुसार 10 और 11 मार्च को भी कई राज्यों में बारिश हो सकती है। मतलब होली और उसके अगले दिन भी बारिश हो सकती है।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से लगभग 66 किलोमीटर दूर जिला बाराबंकी के फतेहपुर तहसील, गांव बेलहरा के किसान रमेशचंद्र मौर्य बताते हैं, "इस साल किसान तबाही के कगार पर पहुंच गया है। अभी फरवरी में जब बारिश हुई थी तब आलू की मेड़ें भर गई थीं। नाली भरने के बाद पानी मेड़ों पर चढ़ गया था। उसकी नमी अभी खत्म ही नहीं पाई थी कि बारिश अचानक से फिर शुरू हो गई। बारिश इतनी हुई है कि जो आलू मेड़ों पर था वह सब खुल गया है दो-चार दिन में हरा हो जायेगा। जहां बलूई मिट्टी है वहां तो कुछ गलीमत भी है। हमें तो लग रहा कि इस साल आलू खोदना ही नहीं पड़ेगा, सारा आलू खेत में ही सड़ जायेगा।"

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"तरबूज की खेती करने वाले किसानों पर भी खतरा आ गया है। ज्यादा नमी के कारण पौधे खराब हो जायेंगे। सरसों की कटाई चल रही थी, लेकिन ओलावृष्टि के कारण फलियां टूट गई। किसानों पर चौतरफा मार पड़ी है।" वे आगे कहते हैं।

लखनऊ से लगभग 88 किमी दूर जिला सीतापुर में भी हालात ऐसे ही हैं। किसान सुधीर कुमार कहते हैं, " इस साल हमें आलू का रेट अच्छा मिला था। लगा कि यह साल अच्छा बीतेगा लेकिन बारिश और पत्थर (ओले) से गेहूं की फसल बर्बाद हो गई है। पूरी फसल खेत में बिछ गई है। खेतों में पानी भी जमा है। मुश्किल है कि इस साल गेहूं से कुछ मिले।"

उत्तर प्रदेश-मध्य प्रदेश की सीमा से सटे सोनभद्र में बारिश ने तबाही मचाई है। किसान बनवारी लाल

पिछले 24 घंट में पंजाब, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और बिहार में भी कुछ जगहों पर बारिश और ओलावृष्टि हुई है। वहीं स्काईमेट के अनुसार अगले 24 घंट यानी कि 6, 7 मार्च को पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तरी राजस्थान में ओलावृष्टि के साथ अधिकांश स्थानों पर गरज के साथ बौछारें गिरने के आसार हैं।

ओडिशा, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। छत्तीसगढ़ में भी छिटपुट बारिश की संभावना है। केरल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के कुछ हिस्सों में गरज के साथ हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। अंडमान व निकोबार द्वीपसमूह तथा लक्षद्वीप में भी हल्की से मध्यम बारिश की उम्मीद है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों के लिए जारी किया टोल फ्री नंबर

उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव कृषि देवेश चतुर्वेदी ने कहा है कि सभी बीमित किसान, जिनकी फसलों को ओलावृष्टि, अतिवृष्टि, जलभराव से नुकसान हुआ है, वे उसकी सूचना प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्राविधानों के अनुसार बीमा कंपनी को तय समय में दे दें। बीमा का लाभ लेने के लिए किसानों को 72 घंटे के अंदर टोल फ्री नंबर 1800120909090 पर सूचना देगी होगी। प्रमुख सचिव ने यह भी कहा कि इसके अलावा किसान संबंधित बैंक शाखा, जनपद के कृषि, राजस्व विभाग के किसी अधिकारी, ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत सदस्य के माध्यम से व्यक्तिगत दावा भी बीमा कंपनी को प्रस्तुत कर सकते हैं।


नियमानुसार मध्य अवस्था में सूखा, बाढ़, ओला, भूस्खलन, चक्रवात, जलभराव से खड़ी फसल की उपज में ग्राम पंचायत स्तर पर 50 प्रतिशत से अधिक क्षति की स्थिति में प्रभावित क्षेत्र में सर्वेक्षण कराकर बीमित किसानो को बीमा कंपनी द्वारा सहायता के रूप में बीमित राशि के 25 प्रतिशत तक क्षतिपूर्ति प्रदान की जाती है।

यूपी के सात जिलों में एक लाख 72 हजार हेक्टयेर की फसल प्रभावित

उत्तर प्रदेश सरकार ने जानकारी दी है कि प्रदेश के सात जिलों में एक से छह मार्च तक हुई बारिश और ओलावृष्टि के कारण 237,374 किसानों की कुल 172,00.18 हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई है। अभी तक केवल तीन जिलों सोनभद्र, जालौन और सीतापुर में 1819.32 हेक्टेयर क्षेत्र में 33 फीसदी (भारत सरकार द्वारा निर्धारित सीमा) से अधिक फसल नुकसान की सूचना मिली है। इस नुकसान के एवज में 5,853 किसानों को 179.53 लाख रुपए का अनुदान दिया जायेगा जिसमें से 1955 किसानों को 35.95 लाख रुपए दिया जा चुका है। जिलों से मिली खबर के अनुसार 68 जिलों में बारिश और ओलावृष्टि से कोई नुकसान नहीं हुआ है। सरकार ने यह भी बताया कि ओलावृष्टि के लिए एडवांस में 24.49 करोड़ रुपए जारी कर दिये गये हैं।

इनपुट- सीतापुर से मोहित शुक्ला और रणविजय सिंह, बाराबंकी से वीरेंद्र सिंह, सोनभद्र से भीम कुमार

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