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ट्रैक्टर मार्च कर किसान दिखा रहे हैं अपनी ताकत, ट्रैक्टर रैली को बताया 26 जनवरी की परेड का रिहर्सल

हजारों ट्रैक्टर के साथ दिल्ली की सीमाओं पर किसान ट्रैक्टर मार्च कर रहे हैं। किसान संगठनों ने सरकार को अल्टीमेटम दिया था कि अगर सरकार ने उनकी मांगे नहीं मानी और वार्ता में कुछ हल नहीं निकला तो वो 26 जनवरी को दिल्ली में ट्रैक्टर परेड करेंगे। आज हो रहा ट्रैक्टर मार्च उसका रिहर्सल है..

दिल्ली की सीमाओं पर कृषि कानूनों के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हजारों किसानों ने आज ट्रैक्टर मार्च के जरिए अपनी ताकत दिखा रहे हैं। सिंघु बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर, गाजीपुर बॉर्डर, शाहजहांपुर बॉर्डर और ढासा बॉर्डर से ट्रैक्टर ट्रालियों पर सवार किसानों के पांच जत्थे तिरंगा लहराते हुए रवाना हो चुके हैं, जो कुछ देर बाद कुंडली पलवल मानेसर हाईवे पर मिलेंगे।

किसान आंदोलन में शामिल किसान यूनियन के संगठनों के साझा मंच संयुक्त किसान मोर्चा ने इस ट्रैक्टर मार्च का ऐलान 30 दिसंबर की सरकार के साथ बैठक के बाद 1 जनवरी को किया था। 4 जनवरी की सरकार के वार्ता में हल न निकलने पर सरकार से वार्ता के साथ आंदोलन तेज करने की बात कही गई थी, किसान नेताओं ने जनवरी के लिए देशव्यापी कार्यक्रम रखा है, जिसमें 26 जनवरी को दिल्ली में गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर परेड भी शामिल है। दिल्ली की परेड से पहले किसानों ने 6 जनवरी को कोंडली, मानेहर पलवल हाईवे (केएमपी) पर ट्रैक्टर रैली का ऐलान किया था, लेकिन खराब मौसम के चलते ये ट्रैक्टर मार्च 6 की जगह 7 जनवरी को आयोजित किया जा रहा है। आज यानि 7 जनवरी को हो रहे ट्रैक्टर मार्च को किसान संगठन 26 जनवरी की परेड का रिहर्सल बता रहे हैं।

सिंघु बॉर्डर पर हजारों ट्रैक्टर के साथ मार्च शुरु करने से पहले किसान यूनियन किसान मजदूर संघर्ष कमेटी के प्रदेश महासचिव सरवन सिंह पंधेर ने कहा- ये ट्रैक्टर रैली 26 जनवरी की परेड का रिहर्सल है। हम लोग सिंघु बॉर्डर से टिकरी तक मार्च करेंगे। अलग अलग बॉर्डर से किसान जत्थेबंदियों के जत्थे अलग-अलग दिशा में मार्च कर रहे हैं। पंजाब और हरियाणा के हजारों ट्रैक्टर इस रिहर्सल में शामिल हो रहे हैं। तरनतारण समेत पंजाब के कई जिलों से हजारों और ट्रैक्टर दिल्ली की परेड में शामिल होने आएंगे। ये लड़ाई लंबी चलेगी हम मानसिक रुप से तैयार हैं। "

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संयुक्त किसान मोर्चे में शामिल किसानों के अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति ने ट्रैक्टर मार्च को लेकर यात्रा का मैप और जानकारी साझा की है, जिन पांच जगहों से ट्रैक्टर मार्च रवाना हो रहे हैं, उन के लिए टीम लीडर तय किए गए हैं ताकि ट्रैक्टर मार्च शांति पूर्ण रहे।

1. सिंधु बॉर्डर से टिकरी बॉर्डर की तरफ

शुरुआत: कुंडली में केएमपी का एंट्री पॉइंट

संपर्क सूत्र- जगमोहन सिंह (9417354165) जगजीत सिंह डल्लेवाल (9417164682)

2.टिकरी बॉर्डर से कुंडली की तरफ

शुरुआत- सांपला में केएमपी का एंट्री पॉइंट

संपर्क सूत्र- शिंगारा सिंह मान (9417539714) बलदेव सिंह भैरुपा (9872432127)

यह दोनो जत्थे सांपला और कुंडली के मिड प्वाइंट को छूकर वापिस अपने शुरुआती बिंदु पर पहुंच जाएंगे।

3.गाजीपुर बॉर्डर से पलवल की तरफ

शुरुआत- दसना में केएमपी का एंट्री पॉइंट

संपर्क सूत्र- तेजेंदर सिंह विर्क (8433129622) युद्धवीर सिंह (9571313664)

4.रेवासन से पलवल की तरफ

शुरुआत- रेवासन में केएमपी का एंट्री पॉइंट

संपर्क सूत्र- रमजान चौधरी (9813124386)

यह दोनों जत्थे पलवल से वापिस अपने प्रस्थान बिंदु पर वापस आ जाएंगे।

5. ढासा बॉर्डर से मानेसर और वापिस

शुरुआत: ढासा स्थल से बादली टोल में एक्सप्रेस-वे का एंट्री प्वाइंट

संपर्क: विनोद गुलिया तीसा प्रधान 9896333539

विरेंद्र डागर, बीकेयू अध्यक्ष, दिल्ली 9953933612


इससे पहले भारतीय किसान यूनियन एकता उग्राहान ने 2 जनवरी को टिकरी बॉर्डर से शाहजहांपुर बॉर्डर तक मार्च किया था। बीकेयू उग्राहान के मुताबिक 2 जनवरी को 2500 से ज्यादा ट्रैक्टर मार्च में शामिल हुए थे। किसान यूनियन के मुताबिक ये मार्च लोगों को जागरुक करने के लिए किया गया था, जिसने 2 दिन में हरियाणा के 25 गांवों को कवर किया था। नीचे वीडियो देखिए

सितंबर से ही चल रहा है धरना प्रदर्शन 27 नवंबर से दिल्ली के बॉर्डर पर डेरा डाले हैं किसान

सितंबर 2020 में संसद से कृषि बिलों के विधेयक के रुप में पेश होने के बाद से ही पंजाब और हरियाणा में किसान विरोध कर रहे थे। पंजाब में इन कानूनों के खिलाफ किसानों ने मुहिम छेड़ रखी थी। प्रदेश में धरना प्रदर्शन, रेल रोको और हाईवे जाम करने के बाद भी कुछ हल न निकलने पर कई राज्यों के किसानों ने 26-27 नवंबर को चलो दिल्ली का ऐलान किया था। 26 नवंबर को पंजाब की 30 से ज्यादा कृषि यूनियन ने हजारों ट्रैक्टर ट्रालियों के साथ दिल्ली के लिए कूच था, किसान अपने साथ तीन महीने का राशन और रहने का पूरा इंतजाम लेकर चले थे। इस दौरान इन्हें रोकने के लिए हरियाणा सरकार ने जगह-जगह बैरिकेंड की, हाईवे पर मिट्टी डलवाई, हाईवे को जेसीबी से खुदवाया लेकिन आंदोलनकारी किसान सभी नाकों को तोड़कर 27 नवंबर को दिल्ली पहुंच गए थे।

आंदोलनकारी किसान 27 नवंबर से दिल्ली-हरियाणा के अलग-अलग नाकों (बॉर्डर) पर डेरा डाले हुए हैं। आंदोलन में भारी संख्या में राज्सथान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के किसान भी शामिल हैं। यूपी के किसान गाजीपुर बॉर्डर पर डेरा डाले हुए हैं तो राजस्थान के किसान हरियाणा-राजस्थान के शाहजहांपुर बॉर्डर पर एक पखवाड़े से जमा है। दिल्ली आने से रोके जाने पर मध्य प्रदेश के किसानों का एक बड़ा जत्था पलवल में भी आंदोलन कर रहा है। इस दौरान किसान संगठनों और सरकार के बीच 7 दौर की वार्ता हो चुकी है। आंठवें दौर की वार्ता 8 जनवरी शुक्रवार को प्रस्तावित है।

वीडियो में देखिए किस तरह दिल्ली सीमा तक पहुंचे थे किसान आंदोलनकारी


अब तक दो मांगों पर बनी है सहमति

1."इलेक्ट्रिसिटी एक्ट' जो अभी आया नही हैं। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के मुताबिक किसान चाहते हैं, सिंचाई के लिए जो सब्सिडी राज्यों को दी जाती है वो उसी तरह जारी रहे, इस पर किसान यूनियन और सरकार के बीच सहमति हो गई है।

2. कृषि मंत्री के मुताबिक सरकार और किसान संगठनों के बीच हुई छठे दौर की वार्ता में बिजली संशोधन विधेयक 2020 और Delhi-NCR से सटे इलाकों में पराली जलाने के लेकर अध्यादेश संबंधी आशंकाओं को दूर करने के लिए सहमति बन गई है। छठे दौर की बैठक से बाहर निकले कई किसान नेताओं ने भी कहा था कि पराली कानून संबंधी कानून पर सहमति बनी है। जानकारी के मुताबिक इस संबंध में जो एक करोड़ का जुर्माना और सजा का प्रवाधान है, उससे किसानों को अलग रखा जाएगा।

किसानों की प्रमुख 4 मांगे हैं

1.तीनों नए कृषि कानूनों को वापस लिया जाए।

2.एमएसपी पर संपूर्ण खरीद को कानून बनाया जाए।

3.प्रस्तावित बिजली विधेयक को वापस लिया जाए।

4.पराली संबंधी नए कानून से किसानों को हटाया जाए

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