अमेरिका के मदर ऑफ ऑल बम से 4 गुना ज्यादा खतरनाक है रूस का फादर ऑफ ऑल बम

अमेरिका के  मदर ऑफ ऑल बम से 4 गुना ज्यादा खतरनाक है रूस का फादर ऑफ ऑल बमफादर ऑफ ऑल बम। (फोटो साभार यू-ट्यूब)

लखनऊ। गुरुवार को देर रात अमेरिका ने अफगानिस्तान में आतंकी संगठन आईएस के ठिकानों पर सबसे बड़ा गैर परमाणु बम गिराया था। ऐसा दावा किया जा रहा है कि इस हमले में आईएस के सैकड़ों आतंकी मारे गए हैं। अमेरिका ने अफगानिस्तान में जो तो बम गिराया उसे मदर ऑफ ऑल बम कहा जाता है। चारों ओर इसी बम के चर्चे हो रहे हैं। ऐसे में ये सवाल भी उठ रहा है कि जब मदर ऑफ ऑल बम है तो फादर ऑफ ऑल बम कहां है, वो कितना खतरनाक है। तो आइये पहले मदर ऑफ ऑल बम के बारे में थोड़ा जानते हैं-

मदर ऑफ ऑल बम

डेली मेल के अनुसार इसका असली नाम जीबीयू-43 है, इस मैसिव ऑर्डिनेंस एयर ब्लास्ट बम का परीक्षण साल 2003 में किया गया था। इस बम का वजन 9,797 किला है जो सेटेलाइट से गाइड किया जाता है। इसकी लंबाई 20 फीट होती है। ये जमीन में बनी 200 फीट तक की गुफाओं और 60 फीट तक के कॉन्क्रीट को ध्वस्त कर सकता है। इस बम की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें 11 टन टीएनटी भरा होता है जो 8 टन बारूद से बना होता है।

कुछ रोचक तथ्य

मदर ऑफ ऑल बम।

  • इस बम का वजन करीब 21600 पौंड (9,797 किग्रा) होता है
  • इस बम के गिराए जाने पर सवा तीन किलोमीटर के दायरे में आने वाली हर एक चीज तबाह हो जाती है।
  • इसकी कीमत करीब 2000 करोड़ रुपए है।
  • अमेरिका के पास फिलहाल ऐसे करीब 20 बम है।
  • पहली बार इसका परीक्षण 2003 में इराक युद्ध शुरू होने से पहले किया गया था।

ये तो रही मदर ऑफ ऑल बम की कहानी। अब नजर डालते हैं फादर ऑफ ऑल बम की कहानी पर

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फादर ऑफ ऑल बम

मदर ऑफ ऑल बम से चार गुना ताकतवर होता है फादर ऑफ ऑल बम है। ये बम फिलहाल रूस के पास है। ये एक थर्मोफेब्रिक बम है जो फटने के बाद हवा में मौजूद ऑक्सीजन के साथ क्रिया करता है और अपनी ताकत को कई गुना बढ़ा लेता है। जब इस बम को गिराया जाता है तो ये हवा में ही फट जाता है और हवा और ईंधन के मिलने से इसकी प्रतिक्रिया और भी भयानक हो जाती है। इस बम से इतनी ऊर्जा और ताप निकलती है कि यह अपने निशाने को भाप में बदल देता है। बम के झटके कई किलोमीटर तक महसूस किए जा सकते हैं। इस बम का परीक्षण साल 2007 में किया गया था और इसकी तुलना परमाणु बम से की जाती है।

कुछ रोचक तथ्य

  • इस बम का पहली बार परीक्षण 11 सितंबर, 2007 में किया गया था।
  • साइज में ये बम एमओएबी से छोटा है, लेकिन विनाश करने की इसकी क्षमता एमओएबी से दोगुनी है।
  • इसे सबसे शक्तिशाली गैर-परमाणु बम माना जाता है।
  • इससे होने वाली तबाही लगभग परमाणु बम जैसी ही होती है, लेकिन इससे रेडिएशन का खतरा नहीं होता।

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