जन्मदिन विशेष: फिरोज़ गांधी ने खोली थी आजादी के बाद के सबसे बड़े घोटाले की पोल

जन्मदिन विशेष: फिरोज़ गांधी ने खोली थी आजादी के बाद के सबसे बड़े घोटाले की पोलफिरोज गाँधी व इंदिरा गांधी।

लखनऊ। स्वतंत्रता सेनानी और पूर्व सांसद फिरोज गांधी का जन्म 12 सितंबर 1912 को हुआ था, जबकि 8 सितंबर 1960 को हार्ट अटैक के कारण महज 48 साल की उम्र में उनका निधन हो गया था। भारत की पूर्व पीएम इंदिरा गांधी ने 1942 में फिरोज गांधी से शादी की थी।

कैसे हुई फिरोज व इंदिरा की शादी

फिरोज और इंदिरा गांधी की मुलाकात मार्च 1930 में हुई थी, जब आजादी की लड़ाई में एक कॉलेज के सामने धरना दे रही कमला नेहरू बेहोश हो गई थीं। उस समय फिरोज गांधी ने उनकी देखभाल की थी। कमला नेहरू को टीबी की बीमारी हो जाने के बाद फिरोज भुवाली के टीबी सैनिटोरियम में उनके साथ रहे और जब कमला इलाज के लिए यूरोप गईं तो वहां भी वो उन्हें देखने पहुंचे। 1936 को जब कमला नेहरू का निधन हुआ तब भी फिरोज गांधी वहां मौजूद थे। लेकिन उस दौर में भी अर्न्तजातीय विवाह बड़ी बात थी, इस रिश्ते के लिए इंदिरा के पिता जवाहर लाल नेहरू तैयार नहीं थे, फिर भी इंदिरा ने पिता की मर्जी के खिलाफ मार्च 1942 में शादी कर ली। तब महात्मा गांधी ने इंदिरा और फिरोज को अपना सरनेम गांधी दिया। इसके बाद जवाहर लाल नेहरू ने भी इस रिश्ते को अपनी मंजूरी दे दी।

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हिंदू रीति रिवाज के अनुसार हुई थी शादी।

मुंधड़ा-एल.आई.सी घोटाले की वजह से करनी पड़ी थी नेहरू से बगावत

फिरोज गांधी ने 1957 में लोकसभा में मुंधड़ा-एल.आई.सी घोटाले का मामला जोरदार ढंग से उठाया था। इस कांड में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री टी. टी. कृष्णामाचारी को इस्तीफा देना पड़ा था, जबकि कृष्णमाचारी प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के खास करीबी माने जाते थे। उससे पहले फिरोज गांधी ने एक अन्य बड़े उद्योपति के भ्रष्टाचार का मामला उठाया और उस उद्योगपति को जेल जाना पड़ा था। मुंधड़ा घोटाला आजादी के बाद का सबसे बड़ा घोटाला था जिसके कारण एक मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा था। दरअसल एल. आई. सी ने कलकत्ता के व्यापारी हरिदास मुंधड़ा की एक कंपनी के एक करोड़ 26 लाख रुपए मूल्य के शेयर खरीद लिए थे जबकि उस कंपनी की कोई साख नहीं थी। इससे एल.आई.सी को 37 लाख रुपए का घाटा हुआ। शेयर खरीदते समय अन्य किसी कंपनी को ऐसा अवसर नहीं दिया गया। एल. आई. सी ने मुंधड़ा कंपनी से व्यक्तिगत तौर पर बातचीत की और उसके शेयर खरीद लिए। ऐसा उच्चस्तरीय साठगांठ के तहत किया गया था। लाइफ इंश्योरेंस ऑफ इंडिया एक्ट, 1956 पास करवाने के पीछे भी फिरोज गांधी की महत्वपूर्ण भूमिका थी। फिरोज गांधी ने 16 दिसंबर 1957 को लोकसभा में अपना यादगार भाषण दिया। इस प्रकरण के बाद जवाहर लाल नेहरू से फिरोज गांधी का संबंध पहले से भी अधिक खराब हो गया।

जवाहर लाल नेहरू के साथ फिरोज़ गाँधी।

हार्ट अटैक से हुई थी मौत

फिरोज गांधी राजनीति के साथ-साथ एक पत्रकार के रूप में भी जाने जाते थे। नेशलन हेराल्ड व नवजीवन समाचार पत्र के संपादक रहे। आजादी के पहले आम चुनाव में वो रायबरेली से पहली बार सांसद चुने गए और 1960 तक लोकसभा में वो रायबरेली का प्रतिनिधित्व करते रहे। हालांकि समय के साथ फिरोज और इंदिरा के बीच संबंध बिगड़ता चला गया. फिरोज और इंदिरा दिल्ली में अलग-अलग रहते थे। 1958 में उन्हें पहली बार दिल का दौरा पड़ा और 1960 में दूसरे दौरे को फिरोज गांधी झेल नहीं सके और उनकी मृत्यु हो गई।

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