रोजगार को लेकर FICCI ने जताई चिंता, सरकार से मांगा अलग मंत्रालय

रोजगार को लेकर FICCI ने जताई चिंता, सरकार से मांगा अलग मंत्रालय

लखनऊ। देश में रोजगार को लेकर सभी लोग चिंता व्‍यक्‍त कर रहे हैं ऐसे में उद्योग एवं वाणि‍ज्य मंडल फिक्की ने भी बेरोजगारी को नई सरकार की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताते हुए रोजगार सृजन के प्रयासों का प्रभावी तरीके से समन्वय करने के लिये एक अलग मंत्रालय बनाने की मांग की है।

फिक्की के अध्यक्ष संदीप सोमानी ने बुधवार को कहा कि नरेंद्र मोदी की सरकार हालिया लोकसभा चुनाव में पहले से भी अधिक बहुमत के साथ सत्ता में वापस आयी है। ऐसे में उद्योग जगत को इस सरकार से उम्मीद है कि ग्रामीण क्षेत्र की बदहाल स्थिति और रोजगार सृजन समेत मौजूदा चुनौतियों से निपटने तथा अर्थव्यवस्था को तेजी से वृद्धि के रास्ते पर लाने के लिये बड़े सुधार किये जाएंगे।

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फि‍क्की के अध्यक्ष ने कहा कि अभी देश में कारोबार करने की लागत काफी अधिक है। ऐसे में अभी रेपो दर को एक से डेढ़ प्रतिशत कम करने तथा सभी कंपनियों के लिये कॉरपोरेट कर की दर मौजूदा 30 प्रतिशत से घटाकर 25 प्रतिशत करने की जरूरत है। पूर्व वि‍त्त मंत्री अरुण जेटली ने एक फरवरी 2018 को पेश बजट में 250 करोड़ रुपये तक के कारोबार वाली कंपनियों के लिये कॉरपोरेट कर की दर घटाकर 25 प्रतिशत करने की घोषणा की थी। हालांकि 250 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार वाली कंपनियों को अभी भी 30 प्रतिशत की दर से कॉरपोरेट कर का भुगतान करना पड़ रहा है।

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सोमानी ने कहा कि यह सरकार द्वारा सुधार के नये चरण को विशेषकर भूमि, श्रम एवं न्याय जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सुधार किये जाने का समय आ गया है। उन्होंने कहा, न्यूनतम वैकल्पिक कर के ढांचे की भी समीक्षा किये जाने की जरूरत है। अभी यह बहुत अधिक है। इसके साथ ही कारोबार सुगमता के परिदृश्य को बेहतर बनाने के लिये जीएसटी एवं अन्य कानूनों में प्रशासनिक सरलीकरण की भी जरूरत है। उन्होंने गैर-बैंकिंग वि‍त्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) में तरलता के संकट का हवाला देते हुए रिजर्व बैंक के साथ मिलकर सरकार को काम करने की जरूरत पर भी बल दिया।

गौरतलब है कि चुनाव से पहले बेरोजगारी के आंकड़ों पर लीक रिपोर्ट में अनुमानित बेरोजगारी दर की पुष्टि करते हुए श्रम मंत्रालय ने आंकड़े जारी किए थे। इसके मुताबिक 2017-18 के दौरान देश में बेरोजगारी कुल श्रम शक्ति का 6.1 प्रतिशत रही, जो 45 वर्षों में सबसे अधिक है।

चुनाव से पहले बेरोजगारी के आंकड़ों पर जो रिपोर्ट लीक हुई थी सरकारी ने भी इन्‍हीं आंकड़ों की पुष्टि की है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश में 2017-18 के दौरान देश में बेरोजगारी कुल श्रम शक्ति का 6.1 प्रतिशत रही, जो 45 वर्षों में सबसे अधिक है। श्रम मंत्रालय ने यह आंकड़ा ऐसे समय जारी किया है जब नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत करते हुए मंत्रियों ने पदभार संभाला। मंत्रालय द्वारा जारी इन आंकड़ों के अनुसार शहरी क्षेत्र में रोजगार योग्य युवाओं में 7.8 प्रतिशत बेरोजगार रहे जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह अनुपात 5.3 प्रतिशत रहा। पूरे देश में पुरूषों की बेरोजगारी दर 6.2 प्रतिशत जबकि महिलाओं के मामले में 5.7 प्रतिशत रही।

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नोटबंदी के बाद का पहला सर्वे...

यह रिपोर्ट काफी महत्वपूर्ण है। यह जुलाई 2017 से जून 2018 के बीच जुटाए गए डेटा पर आधारित है। यानी यह नोटबंदी के बाद का पहला आधिकारिक सर्वेक्षण है। सरकार पर यही रिपोर्ट दबाने का आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग के कार्यकारी अध्यक्ष सहित दो सदस्यों ने जनवरी में इस्तीफा दे दिया था। उनका कहना था कि रिपोर्ट को आयोग की मंजूरी मिलने के बाद भी सरकार जारी नहीं कर रही। यह रिपोर्ट दिसंबर 2018 में जारी की जानी थी।

शहरी क्षेत्र में युवा ज्यादा बेरोजगार...

एनएसएसओ रिपोर्ट में कहा गया था कि 2017-18 में बेरोजगारी दर ग्रामीण क्षेत्रों में 5.3% और शहरी क्षेत्र में सबसे ज्यादा 7.8% रही। पुरुषों की बेरोजगारी दर 6.2% जबकि महिलाओं की 5.7% रही। इनमें नौजवान बेरोजगार सबसे ज्यादा थे, जिनकी संख्या 13% से 27% थी। 2011-12 में बेरोजगारी दर 2.2% थी। जबकि 1972-73 में यह सबसे ज्यादा थी। बीते सालों में कामगारों की जरूरत कम होने से ज्यादा लोग काम से हटाए गए। (इनपुट भाषा)

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