आम बजट से क्या चाहते हैं डेयरी व्यवसाय से जुड़े किसान जानिए 

आम बजट से क्या चाहते हैं डेयरी व्यवसाय से जुड़े किसान जानिए दूध उत्पादन में नंबर एक है भारत।

वित्त मंत्री अरुण जेटली एक फरवरी को देश का आम बजट पेश करेंगे। वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) लागू होने के बाद यह देश का पहला बजट होगा। इस बजट में डेयरी सेक्टर से जुड़ें किसान दूध के दामों में बढ़ोत्तरी से पाउडर और घी से जीएसटी हटाने की उम्मीदें जुड़ी है।

उत्तराखंड के ऋषिकेश में रहने वाले प्रमोद बहुगणा (45 वर्ष )पिछले छह साल से डेयरी व्यवसाय से जुड़े हुए है। प्रमोद के पास 25 पशु है जिनसे रोजाना 200 लीटर दूध का उत्पादन होता है। बजट में डेयरी के लिए क्या होना चाहिए इसके बारे में प्रमोद बताते हैं, "जब भी कोई सरकार बनती है तो हम यही उम्मीद करते है कि इस बार दूध के दाम बढ़ेंगे। इसलिए डेयरी क्षेत्र के बजट दूध के दामों में बढ़ोत्तरी होनी चाहिए, इससे देश के डेयरी पालकों को फायदा होगा। इसके साथ-साथ मिलावटी दूध की बिक्री पर सरकार को रोक लगानी चाहिए।20 और 21 तरह की चीजों को मिलाकर मिलावटी दूध तैयार किया जा रहा है। ऐसे में सरकार को इस पर रोक लगानी चाहिए।"

अपनी बात को जारी रखते हुए प्रदीप बताते हैं, जैसे हर कोई केमिस्ट की दुकान नहीं खोल सकता है उसके पास दवाई बेचने का लाइसेंस है। ऐसे ही डेयरी क्षेत्र में करना चाहिए ताकि मिलावटी दूध को बनने से रोका जा सके।"

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सोमवार को संसद में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण के साथ बजट के पहले सत्र की शुरुआत हुई। बजट सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा, ''किसानों की आय बढ़ाने के लिए डेयरी सेक्टर में 11,000 करोड़ रुपए की ‘डेयरी प्रसंस्करण और अवसंरचना विकास निधि’ के द्वारा एक महत्त्वाकांक्षी योजना प्रारंभ की गई है।"

लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद अपने अभिभाषण में कहा कि सरकार आर्थिक परिस्थिति को मजबूत करने को काम कर रही है।

"दूध के दाम बढ़ नहीं रहे है और पशुओं पर आने वाला रोज का खर्चा दिन पर दिन बढ़ रहा है। जीएसटी लागू होने के बाद पशु की दवाईंयों की कीमतें बहुत बढ़ गई है, जिससे किसानों को काफी नुकसान हुआ। लगभग 20 प्रतिशत भाग पशुओं के स्वास्थ्य पर खर्च होता है वो भी सरकार ने मंहगा कर दिया। सरकार को दवाईंयों से जीएसटी हटाना चाहिए। इससे किसानों को कुछ राहत मिल सकेगी।" जसप्रीत ने बताया। पंजाब के जांलधर जिले के दकोहा गाँव में रहने वाले जसप्रीत सिंह पिछले कई वर्षों से डेयरी व्यवसाय से जुड़े हुए है।

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देश में भूमिहीन एवं सीमांत किसान के लिए डेयरी व्यवसाय उनके जीवनयापन का एक जरिया बन गया है। करीब सात करोड़ ऐसे ग्रामीण किसान परिवार डेयरी से जुड़े हुए हैं जिनके पास कुल गायों की 80 प्रतिशत आबादी है। इतना ही नहीं कामकाज करने वाली 70 प्रतिशत महिलाओं का हिस्सा डेयरी व्यवसाय में कार्य कर रहा है। पर इस व्यवसाय से जुड़े किसान कई दिक्कतों का सामना उठा रहे हैं।

दिल्ली स्थित इंडियन डेयरी एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ जीएस राजोरिया बताते हैं, "जीएसटी के बाद घी मंहगा होना और स्किम्ड मिल्क पाउडर (एसएमपी) की दरों में गिरावट आना डेयरी पालकों के लिए संकट बन रहा है। हमने सरकार से भी जीएसटी हटाने की मांग की है। अभी करीब एक लाख टन पाउडर डेयरियों में पड़ा हुआ है। तो उसके लिए प्राईवेट सेक्टर की डेयरियां और कोओपरेटिव ने सब्सिडी की देने की मांग की है, जिससे किसानों को सही दाम दे पाए। सरकार को दूध के दामों को बढ़ाने के लिए कोई कदम उठाना होगा वरना आने वाले समय में विदेशों से दूध मंगवाना पड़ सकता है।"

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अपनी बात को जारी रखते हुए डॉ राजोरिया बताते हैं, "सरकार बोल रही है 2022 तक किसानों की आय दोगुनी होगी। लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा दूध का है। जब उत्पादन ही नहीं होगा तो कैसे आय दोगुनी होगी। अभी अंतराष्ट्रीय बाजार को उपलब्ध कराना होगा तभी किसानों की आय बढ़ पाएगी।"

हाल ही में किसानों की आय दोगुनी करने के लिए डेयरी क्षेत्र में केन्द्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने नेशनल एक्शन प्लॉन के आधार पर बने 2022 दस्तावेज को जारी किया। इस विजन डाक्यूमेंट में डेयरी के विकास की रूपरेखा बनायी गयी है और दूध और दूध के उत्पाद को शुद्ध और सुरक्षित बनाने की भी बात कही गयी है।

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डेयरी व्यवसाय से जुड़ें हरियाणा के सिरसा के ऐलानाबाद तहसील के राजवीर गिल बताते हैं, "डेयरी के क्षेत्र में कई बेरोजगार युवा आ रहे है लेकिन उनको सही गाइडलाइन नहीं मिल पाती है। उदाहरण के लिए अगर कोई गाँव का पढ़ा-लिखा युवक डेयरी व्यवसाय को शुरू करना चाहता है तो उसके पास कोई जानकारी ही नहीं है। इसके लिए अलग से सरकार को ध्यान देना चाहिए कि जो दूध व्यवसाय शुरू कर रहा है वो निशुल्क प्रशिक्षण कैसे ले सकता है। हर कोई बड़े संस्थानों में जाकर प्रशिक्षण नहीं ले सकता है।"

सरकार ने देश में पशुधन की स्थिति में सुधार लाने के लिए दिसम्बर वर्ष 2014 में देशी नस्लों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए राष्ट्रीय गोकुल मिशन की शुरूआत की। इसका उद्देश्य दुग्ध उत्पादन एवं उत्पादकता में तेजी से वृद्धि तथा दुग्ध उत्पादन व्यवसाय को अधिक लाभकारी बनाना है। इसके साथ ही नवम्बर वर्ष 2016 में देश मे पहली बार राष्ट्रीय बोवाइन उत्पादकता मिशन के अंतर्गत ई-पशुहाट पोर्टल शुरू किया। यह पोर्टल देशी नस्लों के लिए प्रजनकों और किसानों को जोड़ने मे एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

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लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही हैं सरकार लगातार देसी नस्लों पर काम भी काम कर रही है। लेकिन उसका फायदा किसानों को नहीं मिल रहा है। उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले के कलीना गाँव में रहने वाले सुभाष चंद्र बताते हैं, "सरकार नस्ल सुधार की बात करती है। जब कोई किसान अपनी गाय या भैंस को ग्याभिन कराता है तो उसको खुद पता नहीं होता है किसका सीमन है। पशुचिकित्सकों को भी कोई जानकारी नहीं रहती है। ऐसे कैसे नस्ल सुधार किया जा सकेगा। किसानों को इसके लिए जागरूक करना जरूरी है और गाँव-गाँव उच्च गुणवत्ता नस्ल के सीमन को भी पहुंचाना चाहिए।"

सरकार द्वारा चल रहे राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत देश में पहली बार 1,24,000 पशुओं का देशी नस्लों के उच्च गुणवता वाले वीर्य से कृत्रिम गर्भाधान किया गया। इन सभी पशुओं को यूआईडी के द्वारा चिन्हित किया गया तथा इनको डाटा बेस पर रजिस्टर भी किया गया। इस कार्यक्रम के तहत सरोगेट गायों में उच्चम आनुवंशिक गुणता वाली देसी नस्लों जैसे साहीवाल, गिर, रेड सिंधी, ओंगोल, देवनी तथा वेचुर के 391 भ्रूणों को अंतरित किया गया।

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"अगर डेयरी व्यवसाय शुरू करना है तो लोन की सबसे ज्यादा समस्या आती है। सरकारी बैंक कभी लोन नहीं देती है। प्राईवेट बैंक के भरोसे ही रहना पड़ता है। सरकार जो योजनाएं बनाती है वो जमीनी स्तर पर उतर रहीं है या नहीं इसको जरूर देखना चाहिए सरकार को। बजट में डेयरी व्यवसाय को शुरू करने में जो लोन की सुविधा है उसको सरल कर देनी चाहिए।" ऐसा बताते हैं, धर्मेंद्र सिंह मंडलोई।

मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के सरगोन में रहने वाले धर्मेंद्र के पास आठ पशु है, जिनसे रोजाना 80 लीटर दूध का उत्पादन होता है। दूध व्यवसाय से पिछले पांच वर्षों से धर्मेंद्र जुड़े हुए है। उनके परिवार का जीवनयापन करने का यहीं जरिया है। उनको सरकार से काफी उम्मीदें है कि सरकार इन ऋण को लेकर ध्यान देगी।

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