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बजट से पहले वित्त मंत्री ने कृषि विशेषज्ञों के साथ की बैठक, कृषि उत्पादों को बाजार देने पर जोर

बजट से पहले वित्त मंत्री ने कृषि विशेषज्ञों के साथ की बैठक, कृषि उत्पादों को बाजार देने पर जोर

लखनऊ। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट से पहले कृषि विशेषज्ञों और संगठनों के साथ बैठक की। इसमें उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार कृषि क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने के काम को उच्च प्रथमिकता दे रही और सरकार ऐसे नए उद्यमों को प्रोत्साहन देने का विचार कर रही जो कृषि उत्पादों को लाभदायक कीमत दिलाने में मदद करने के साथ-साथ उपभोक्ताओं को ये उत्पाद मुनासिब दाम पर पहुंचाने में सहयोग कर सकें।

सीतारमण ने मंगलवार को कृषि विशेषज्ञों और कृषक संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ राजधनी में बजट-पूर्व परामर्श बैठक की। इस दौरान विशेषज्ञों ने सरकार से कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ाये और किसानों की बाजार पहुंच को बढ़ाने के लिए कदम उठाये जाने पर जोर दिया। निर्माणा सीतारमण पांच जुलाई को वर्ष 2019-20 का बजट पेश करेंगी। वित्त मंत्रालय के एक बयान में कहा गया है, "उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र की चिंताएं वर्तमान सरकार की प्राथमिकताओं में उच्च सथान पर हैं।"

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उन्होंने इन कृषि विशेषज्ञों को आश्वस्त किया कि सरकार कृषि क्षेत्र के मुद्दे, रोजगार सृजन और गरीबी उन्मूलन के काम पर प्रमुखता से ध्यान दे रही है। कृषि और ग्रामीण विकास क्षेत्रों के प्रतिनिधियों के साथ यह उनका पहला बजट-पूर्व परामर्श था। बाद में वह बैंकरों और अर्थशास्त्रियों से मिलने वाली हैं। बैठक के दौरान, सीतारमण ने ग्रामीण क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक बुनियादी ढांचे को बढ़ाने के उपायों तथा कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के साथ-साथ गैर-कृषि क्षेत्र के विकास के माध्यम से बेरोजगारी और गरीबी को दूर करने के तरीकों पर जोर दिया। सीतारमण ने स्टार्ट अप्स को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया जो कृषि उत्पादों के लिए लाभकारी बाजार प्रदान करने तथा उचित मूल्य पर अंतिम उपभोक्ताओं को आपूर्ति करने में मदद करेगा।

मंत्रालय की ओर से बताया गया है कि बैठक में कृषि अनुसंधान और विस्तार सेवाओं, ग्रामीण विकास, गैर-कृषि क्षेत्र, बागवानी, खाद्य प्रसंस्करण, पशुपालन, मत्स्य पालन और कृषि क्षेत्र में स्टार्टअप सहित अन्य मुद्दों पर चर्चा की गई। बैठक के दौरान, कृषि और ग्रामीण विकास क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने निवेश को बढ़ावा देने और किसानों की बाजार पहुंच बढ़ाने और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में सुधार लाने और गैर-कृषि क्षेत्र में प्रौद्योगिकी-गहन प्रक्रियाओं की शुरुआत करने के तरीके सुझाए। बयान में कहा गया, "यह भी सुझाव दिया गया था कि सौर ऊर्जा को किसानों की आय बढ़ाने के लिए तीसरा फसल माना जाये।" अन्य सुझावों में, मिट्टी में कार्बन तत्व के स्तर में सुधार लाने के लिए जैविक खाद को प्रोत्साहन देने, किसान उत्पादक संगठनों से संबंधित जीएसटी मुद्दों का समाधान करने, सीमावर्ती जिलों में कृषि प्रसंस्करण इकाइयों के लिए प्रोत्साहन देने तथा शोध एवं विकास में निवेश को बढ़ाना देने का सुझाव भी शामिल है।

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कृषि क्षेत्र के विशेषज्ञों ने कृषि विश्वविद्यालयों में रिक्त पदों को भरने, सूक्ष्म सिंचाई और सौर पंपों में निवेश बढ़ाने, राज्यों को कृषि बाजार सुधारों को लागू करने के लिए वित्तित प्रोत्साहन देने और पूर्वोत्तर राज्यों में हथकरघा और हस्तशिल्प को बढ़ावा देने का भी सुझाव दिया। कर और शुल्क ढांचे से संबंधित डेयरी क्षेत्र के बारे में तथा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में सुधार लाने के बारे में भी सुझाव सामने आए।

बैठक में कृषि और ग्रामीण विकास क्षेत्रों के प्रतिनिधियों में भारत कृषक समाज के अध्यक्ष अजय वीर जाखड़, वाटरशेड ऑर्गेनाइजेशन ट्रस्ट मैनेजिंग ट्रस्टी क्रिस्पिनो लोबो, भारतीय राष्ट्रीय सहकारी संघ (एनसीयूआई) के मुख्य कार्यकारी एन सत्य नारायण और नाबार्ड के अध्यक्ष हर्ष कुमार भानवाला शामिल थे। परामर्श के दौरान, सीतारमण ने देश के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों से प्रतिवेदन का सुझाव दिया ताकि इन क्षेत्रों की विशिष्ट आवश्यकताओं पर भी विचार किया जा सके।

वहीं प्याज के निर्यात पर मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट्स फ्रॉम इंडिया स्कीम (एमईआईएस) के तहत निर्यात माल के एफओबी (लदान मूल्य) के 10 फीसदी के बराबर शुल्क की पर्ची का लाभ दिया जा रहा था। इस पर्ची का इस्तेमाल मूल आयात शुल्क सहित कई प्रकार के शुल्कों के भुगतान में इस्तेमाल किया जा सकता है। नौ जून को जारी एक सार्वजनिक सूचना में विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने कहा कि वह ताजा और शीत भंडारित प्याज के निर्यात के लिए दिये जाने वाले लाभों को समाप्त कर रहे है।

इसमें कहा गया है प्याज पर एमईआईएस के लाभ को तत्काल 10 प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दिया गया है। पिछले साल दिसंबर में इस योजना के तहत प्याज निर्यात पर प्रोत्साहन की दर को पांच प्रतिशत से बढ़ाकर 10 प्रतिशत कर दिया था। इसे इस वर्ष 30 जून तक जारी रखना था।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्याज के एशिया के सबसे बड़े थोक बाजार, महाराष्ट्र के लासलगांव में मंगलवार को प्याज की कीमत लगभग 48 प्रतिशत बढ़कर 13.30 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई, जबकि पिछले महीने इसी दिन यह कीमत नौ रुपये प्रति किलोग्राम थी। राष्ट्रीय राजधानी में खुदरा प्याज की कीमतें इसकी विभि‍न्न कि‍स्मों के आधार पर 20 से 25 रुपये प्रति किलोग्राम चल रही हैं। महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे प्रमुख प्याज उगाने वाले राज्य इस साल सूखे की स्थिति का सामना कर रहे हैं।

बयान में कहा गया है कि वित्त मंत्री ने कहा कि मंत्रालय समुद्री संसाधनों से नीली क्रांति लाने के लिए मत्स्य पालन क्षेत्र के विभिन्न हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श भी करेगा। बैठक में वित्त और निगमित मामलों के राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर, वित्त सचिव सुभाष गर्ग, कृषि सचिव संजय अग्रवाल, ग्रामीण विकास सचिव अमरजीत सिन्हा और अन्य वरिष्ठ सरकारी अधिकारी भी मौजूद थे। (भाषा से इनपुट)

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