गांव के 36 फीसदी युवाओं को नहीं पता देश की राजधानी का नाम : सर्वे

गांव के 36 फीसदी युवाओं को नहीं पता देश की राजधानी का नाम : सर्वेप्रतीकात्मक तस्वीर

केंद्र सरकार इस समय शिक्षा में सुधार और गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दे रही है। केंद्र और राज्य सरकारें ऐसी कई ऐसी योजनाएं चला रही है जिससे शिक्षा का स्तर सुधर सके। ख़ास कर उच्च शिक्षा को बढ़ावा देना सरकार का उद्देश्य है। लेकिन मंगलवार को ज़ारी हुई असर (एनुअल स्टेटस एजुकेशन) की 2017 की रिपोर्ट कुछ और ही कहती है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, देश के 36 प्रतिशत युवाओं को ये भी नहीं पता कि देश की राजधानी का क्या नाम है। वहीं करीब 40 फीसद युवा ऐसे हैं जो 12 वीं के आगे पढ़ना ही नहीं चाहते।

रिपोर्ट के मुताबिक देश में इस समय 14 से 18 आयु वर्ग के करीब 10 करोड़ युवा हैं। इनमें 86 फीसद युवा ही ऐसे हैं, जो मौजूदा समय में औपचारिक शिक्षा ले रहे हैं। इनमें करीब 60 फीसद ऐसे हैं, जो उच्च शिक्षा यानी 12वीं के आगे पढ़ना चाहते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 12वीं के आगे न पढ़ने वालों में से ज्यादातर ऐसे हैं, जिनके ऊपर पढ़ाई के साथ-साथ काम का भी दबाव है। लगभग 42 फीसद ऐसे युवा हैं, जो पढ़ाई के साथ काम भी करते हैं। इनमें 79 फीसदी खेती का काम करते हैं। तीन चौथाई ऐसे युवा हैं, जिन्हें पढ़ाई के साथ-साथ घर पर प्रतिदिन काम करना होता है। इनमें भी करीब 71 फीसदी लड़के हैं, जबकि 89 फीसदी लड़कियां हैं।

इस दौरान लड़के और लड़कियों की व्यावसायिक इच्छाओं में भी फर्क साफ देखा गया। ज्यादातर लड़कों की रुचि सेना, पुलिस में जाने के साथ इंजीनियर बनने की है, जबकि लड़कियां नर्स और शिक्षक बनना चाहती हैं।

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सर्वे में शामिल किए गए युवाओं में से करीब 25 फीसद युवा ऐसे हैं, जो अपनी भाषा में एक सरल पाठ को धारा प्रवाह रूप में नहीं पढ़ सकते। इसी तरह 12वीं के आगे पढ़ाई करने वाले युवाओं में करीब 35 फीसद ऐसे हैं, जो दूसरी कक्षा की भी किताब नहीं पढ़ पाते हैं। 14 वर्ष की आयु में से 53 प्रतिशत बच्चे अंग्रेजी के वाक्य पढ़ लेते हैं तो 18 वर्ष की आयु के 60 फीसदी बच्चे ऐसे हैं जिन्हें अंग्रेजी पढ़नी आती है लेकिन गणित के मामले ये युवा कुछ कच्चे हैं। आधे से ज्यादा युवा ऐसे हैं, जो गणित का भाग करने में कठिनाई का सामना करते हैं। गणित के बुनियादी सवाल हल करने के मामले में 14 साल के और 18 साल के युवाओं का प्रतिशत एक बराबर ही रहा।

सर्वे में यह जानने की कोशिश की गई कि क्या युवा ऐसी सामान्य गणनाएं कर सकते हैं जिनकी आम - तौर पर ज़रूरत पड़ती है- जैसे रुलर की मदद से लंबाई नापना, समय की गणना करना आदि। इस दौरान 86 फीसदी युवाओं ने उस वक्त सही लंबाई नापी जब वह वस्तु रूलर पर '0' के निशान पर रखी थी लेकिन जब उसी वस्तु को रूलर पर किसी और जगह रख दिया गया तब 40 प्रतिशत ही सही जवाब दे पाए। सर्वे में भूगोल और सामान्य ज्ञान के सवाल भी पूछे गए। जब युवाओं को भारत का नक्शा दिखाकर उनसे पूछा गया कि यह किस देश का नक्शा है तो 86 प्रतिशत युवाओं ने सही जवाब दिया। देश की राजधानी का नाम क्या है इसका जवाब 64 प्रतिशत युवाओं ने सही दिया। जब उनसे ये पूछा गया कि वे किस राज्य में रहते तो हैं, तो 79 प्रतिशत युवा ही इसका जवाब दे पाए और 42 प्रतिशत युवा ऐसे थे जिन्होंने अपने गृह राज्य को नक्शे पर पहचान लिया।

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युवाओं से उनकी मोबाइल व दूसरे डिजिटल उपकरणों की पहुंच की भी जानकारी ली गई। सर्वे में शामिल 14 से 18 साल के 73 प्रतिशत युवाओं ने उस पिछले एक सप्ताह में मोबाइल का इस्तेमाल किया था। हालांकि लड़कों और लड़कियों के मोबाइल फोन के उयोग में अंतर नज़र आया। सर्वे में शामिल सिर्फ 12 प्रतिशत लड़के ही ऐसे थे जिन्होंने कभी मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं किया था लेकिन लड़कियो में ये संख्या 22 फीसदी रही। इन युवाओं ने कम्प्यूटर और इंटरनेट का इस्तेमाल बहुत कम किया था। पिछले एक सप्ताह में सिर्फ 28 प्रतिशत युवाओं ने इंटरनेट और 26 प्रतिशत ने कम्प्यूटर का इस्तेमाल किया था।

सर्वे के मुताबिक, 14 से 18 साल के लगभग 44 प्रतिशत युवाओं की मां कभी स्कूल नहीं गईं, 25 प्रतिशत के पापा कभी स्कूल नहीं गए और 20 प्रतिशत युवा ऐसे हैं जिनके माता - पिता दोनों ही कभी स्कूल नहीं गए।

ये सर्वे पहली बार 14 से 18 वर्ष की आयुवर्ग के युवाओं पर किया गया है। 2005 में जब इस सर्वे की शुरुआत हुई थी तब से 2016 तक इसमें 5 से 16 आयु वर्ग के बच्चों को शामिल किया जाता था। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, देश में प्रत्येक 10 में से एक युवा 14 से 18 वर्ष की आयु का है और इनकी कुल संख्या 10 करोड़ है। इस सर्वे को देश के 24 राज्यों के 28 ज़िलों में किया गया है। इसमें 1641 गाँवों के 30,000 से अधिक युवाओं को शामिल किया गया है। असर के सर्वे में जिन 24 राज्यों के जिलों को शामिल किया गया है, उनमें उत्तर प्रदेश से वाराणसी और बिजनौर, मध्य प्रदेश से भोपाल और रीवा, छत्तीसगढ़ से धमतरी, बिहार से मुजफ्फरपुर और हरियाणा से सोनीपत जैसे जिलों को शामिल किया गया है।

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Tags:    rural education 
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