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नीली क्रांति की स्याह हकीकत, ‘मछुआरों को किसान जितनी ही सुविधाएं दे दो’

Diti BajpaiDiti Bajpai   23 Nov 2017 11:42 AM GMT

नीली क्रांति की स्याह हकीकत, ‘मछुआरों को किसान जितनी ही सुविधाएं दे दो’फोटो: गाँव कनेक्शन 

गाँव कनेक्शन

नई दिल्ली। "किसानों के साथ समस्याएं हैं लेकिन हमारी कोई तो भी सुनने वाला नहीं। कुछ ही किसानों को सही फसल बीमा का फायदा मिलता है, बिजली का बिल कई राज्यों में कम आता है, फसल खराब होने पर मुआवजा मिलता है, लेकिन मछुवारों के साथ ऐसा कुछ नहीं होता। मछुवारों को किसानों जिनती भी सुविधाएं नहीं मिलती है।' मध्य प्रदेश के बड़े मछली पालकों में शामिल रज्जू सिंह बताते हैं।

रज्जू सिंह को उसी सम्मेलन में शामिल होने के लिए बुलाया गया था, जिसमें देश के कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह केंद्र में एनडीए सरकार बनने के बाद मत्स्य उद्योग में हुईं उपलब्धियां गिनवा रहे थे।

रज्जू सिंह मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के बांगडोगरी गांव में रहने वाले हैं। उन्हें 21 नवंबर को विश्व मात्स्यिकी दिवस में शामिल होने के लिए बुलाया गया था। सरकार नीली क्रांति को किसानों की आमदनी बढ़ाने का बड़ा जरिया मान रही है। नीली क्रांति यानि पानी में खेती यानी मछली पालन।

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समारोह को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा, भारत में मत्स्य पालन तेजी से बढ़ रहा है। पिछले तीन वर्षों में मछली उत्पादन में 18.86 प्रतिशत की वृद्वि हुई इसके साथ ही स्थलीय मात्स्यिकी क्षेत्र में 26 प्रतिशत की वृद्धि हुई। देश में चल रही नीली क्रांति योजना के तहत वर्ष 2022 तक 15 मिलियन टन तक पहुंचाना है।''ऐसा कहना था केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह का।

लेकिन इस उद्योग की रीढ़ कहे जाने वाले किसान भी समस्याओं से जूझ रहे हैं। रज्जू आगे बताते हैं,कई बार हम सरकार से मांग कर चुके है इस पर एक मांपदंड तैयार किया जाए उसके बाद मुआवजा दिया जाए। प्राकृतिक आपदा या किसी बीमारी से मछलियों के मरने पर बहुत नुकसान हो जाता है। क्योंकि किसान उसके लिए कर्जा ही लेता है।"

21 नवंबर को दिल्ली में संसद मार्ग पर किसान मुक्ति संसद के दौरान की राज्यों के आए मछुवारे, किसान का दर्जा और वैसी सुविधाएं दिए जाने की मांग कर रहे थे। उत्तर प्रदेश के झांसी जिले से आए गुलाब सिंह ने बताते हैं, ''ऐसा कार्यक्रम पहली बार हुआ है जिसमें मैंने भाग लिया। जहां-जहां मछली पालन होता है वहां-वहां के किसानों में हिस्सा लिया है। देश में जो हो रहा है वो तो पता ही चल जाएगा लेकिन उसके पीछे किसानों को क्या दिक्कतें आती है इस बारे में कोई बात नहीं करता है। गुलाब सिंह झांसी पांच एकड़ में दस तालाब बनाकर मछली उत्पादन कर रहे है।

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"भारत सरकार ने हमको मत्स्य कृषक की श्रेणी में रखा गया है लेकिन मछली उत्पादन में जो बिजली उपयोग करते है उसका पांच से दस हजार बिजली का बिल देना पड़ता है जबकि जो किसान धान और गेहूं या किसी अन्य फसल का उत्पादन करता है उसके लिए बहुत ही कम दर पर बिल चुकाना पड़ता है। जितनी लागत लगती है उससे कुछ कम ही हिस्से का मुनाफा हो जाता है।" ऐसा कहना था हरियाणा के मत्स्य पालक जसवंत सिंह का।

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