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झारखंड: 'परिवार के पास राशनकार्ड नहीं था, दो दिन चूल्हा नहीं जला, बच्ची की जान चली गयी'

प्रसिद्ध अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज ने आरोप लगाया कि जिस घर में पांच साल की बच्ची की मौत हुई है उस घर में दो दिन से चूल्हा नहीं जला था। बच्ची की माँ आसपास के लोगों से राशन मांगकर दो महीने से खाने का इंतजाम कर रही थी। बच्ची के पिता दो महीने से लॉकडाउन की वजह से ईंट-भट्टे पर थे। इस दलित परिवार के पास राशनकार्ड नहीं है तभी इस परिवार को राशन नहीं मिल रहा था।

Anand DuttaAnand Dutta   18 May 2020 1:45 PM GMT

झारखंड के लातेहार जिला में 16 मई को एक पांच साल की बच्ची निम्मी कुमारी की मौत हो गयी है। प्रसिद्ध अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज का आरोप है कि जिस परिवार की बच्ची की मौत हुई है उस घर में दो दिन से चूल्हा नहीं जला था, क्योंकि उस घर में अनाज का एक दाना नहीं था।

रांची जिला मुख्यालय से 154 किलोमीटर दूर लातेहार जिले के हेसातू गांव में बच्ची की मां कलावती देवी ने बताया कि उसके पति लातेहार में ईंटा भट्टा पर मजदूरी करते हैं। लॉकडाउन की वजह से वो दो महीने से घर नहीं आ पाए थे। दो बच्चे पति के साथ ही ईंटा भट्ठा पर रहते थे। छह बच्चे कलावती के साथ गाँव में रहते थे निम्मी के बाद अब परिवार में पति-पत्नी के अलावा कुल सात बच्चे बचे हैं।

प्रसिद्ध अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज ने आरोप लगाया कि जिस घर में पांच साल की बच्ची की मौत हुई है उस घर में दो दिन से चूल्हा नहीं जला था। बच्ची की माँ आसपास के लोगों से राशन मांगकर दो महीने से खाने का इंतजाम कर रही थी। बच्ची के पिता दो महीने से लॉकडाउन की वजह से ईंट-भट्टे पर थे। इस दलित परिवार के पास राशनकार्ड नहीं है तभी इस परिवार को राशन नहीं मिल रहा था।

ये हैं पाच साल की बच्ची निम्मी जिसकी 16 मई को मौत हो गयी. फोटो- नीतीश भारती

लॉकडाउन के बाद हेमंत सरकार ने आदेश दिया था कि जिनके पास राशन कार्ड नहीं भी है, उन्हें भी अगले तीन महीने तक प्रतिमाह दस किलो अनाज दिया जाए। राज्य में कई जिलों में यह दिया भी गया। वहीं ज्यां द्रेज कहते हैं, आदेश तो दे दिया गया, लेकिन सच्चाई ये है कि बड़ी संख्या में बिना कार्ड वाले ऐसे लोग हैं जिनको राशन नहीं दिया गया है, लातेहार जिले में ऐसे मामले और भी ज्यादा हैं।

कलावती का घर दो कमरों में टूटा छप्पर पड़ा हुआ है और एक बड़ा सा छेद है। कुछ बर्तन, बिस्तर और एक फटा हुआ मच्छरदानी को छोड़कर कोई दूसरा सामान इनके घर में नहीं है।

कलावती देवी ने बताया, "निम्मी बीमार नहीं थी, परसों शाम (16 मई) में अचानक बीमार पड़ी,थोड़ी देर बाद उसकी मौत हो गई। एक दिन पहले उसे उल्टी हुई थी।"

वहीं मौके पर पहुंचे लातेहार से एसडीओ सागर कुमार ने बताया, " बच्ची अपने भाई-बहन के साथ बगल के तालाब में नहाने गई थी। उसके बाद से उसकी तबियत खराब हो गई और फिर उसकी मौत हो गई।"

जिलाधिकारी जीशान कमर ने बताया, "फिलहाल तो यह भूख से मौत का मामला नजर नहीं आ रहा है। बच्ची का मेडिकल कराया जा चुका है। रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ बता पाएंगे।"

बच्चे की माँ अपने बच्चों के साथ. फोटो- नीतीश भारती

घटना के एक दिन बाद निम्मी के घर प्रसिद्ध अर्थशास्त्री ज्यां द्रेज भी पहुंचे। उन्होंने कहा, "मैंने बीडीओ व अन्य अधिकारियों से पूछा है कि जिनके पास राशन कार्ड नहीं है, उनके लिए राशन का क्या प्रवाधान है। इसकी जानकारी किसी अधिकारी ने उपलब्ध नहीं कराई है। इस परिवार में न अनाज का एक भी दाना था और न ही राशनकार्ड।"

मौत के वक्त उसके पिता जगलाल भुईंया घर पर नहीं थे। बच्ची के पिता जगलाल भुईयां ने बताया, "पिछले कुछ महीनो से वह अपने दो बच्चो के साथ लातेहार जिले के सुकुलहूट में इट भट्टे में माटी थोपने का काम कर रहे थे। आखिरी बार होली में अपने घर आये थे फिर वापस इट भट्टे पर काम करने चले गये थे।"

मुखिया ने नहीं दिया था राशन, कहा आवंटन खत्म हो गया था

कलावती के मुताबिक डोकी पंचायत के मुखिया पार्वती देवी के पास कई बार राशन लेने के लिए गए लेकिन राशन नहीं मिला। मुखिया पति ने कहा कि तुम लोग के लिए राशन नहीं है। वहीं बच्ची की मौत के बाद बीडीओ राशन लेकर घर आ गये।

वहीं डोंकी पंचायत के मुखिया पार्वती देवी के पति पति गोपाल उरांव ने बताया, "राशन नहीं दिया था. मेरे पास जो बजट था, वो खत्म हो गया था। जब आवंटन ही नहीं था तो कैसे देते?"

दूसरी क़िस्त की मांग के लिए मुखिया ने प्रखंड विकास पदाधिकारी को लिखित रूप में आवेदन दिया था।


सरकार में आते ही हेमंत ने नकारा था भूख से मौत के मामले को

हेमंत सरकार ने बीते साल 27 दिसंबर को शपथ ली थी। भोजन का अधिकार अभियान से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता सिराज दत्ता कहते हैं, "दिसंबर के बाद से अब तक भूख से मौत का यह आठवां मामला है। इससे पहले गढ़वा के रामप्रीत भुइयां और शांति देवी, बोकारो के भुखल घासी, रामगढ़ की उपासी देवी, गढ़वा की सोमरिया देवी, बोकारो की मीना मरांडी और बोकारो के ही जगलाल मांझी की मौत भूख से हो चुकी है. हालांकी सरकार ने अधिकारिक तौर पर इन सभी मौतों को भूख से मौत नहीं माना है।"

पूर्व की रघुवर सरकार में कुल 22 भूख से मौत के मामले सामने आए थे। सभी पर जांच रिपोर्ट तैयार की गई। हेमंत सोरेन ने सरकार में आते ही सभी मामलों को नकार दिया। विधानसभा में दिए जवाब में सरकार ने कहा कि राज्य में एक भी भूख से मौत नहीं हुई है।

बीते विधानसभा सत्र के दौरान माले विधायक विनोद सिंह ने खाद्य सुरक्षा से संबंधित सवाल किए थे। खाद्य आपूर्ति विभाग की ओर से दिए गए जवाब में लिखा गया है कि राज्य में अक्टूबर 2015 से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम लागू है। इसके तहत 2,64,43,330 लोगों को इससे जोड़ने का लक्ष्य रखा गया था। फिलहाल 2,63,39,264 लोगों को इसका लाभ मिल रहा है। यानी 99.60 प्रतिशत लोगों को फिलहाल अनाज मिल रहा है।

साल 2011 की जनगणना के मुताबिक झारखंड की जनसंख्या 3,29,88,134 करोड़ है। इस लिहाज से ढ़ाई करोड़ लोगों को खाद्य सुरक्षा अधिनियम से जोड़ा जा चुका है। लेकिन बीते दस सालों में जो जनसंख्या बढ़ी है, सरकार उसके हिसाब से जवाब नहीं दे रही है। वहीं नीति आयोग की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक हंगर इंडेक्स में झारखंड देशभर में पहले स्थान पर है, राज्य की 37 प्रतिशत जनता गरीबी रेखा के राष्ट्रीय मानक से नीचे रह रही है।

कलावती पड़ोसियों से राशन मांगकर गुजारा कर रही थीं. फोटो- नीतीश भारती

सात लाख से अधिक लोग अब भी कार्ड के इंतजार में

वहीं राशन बांटने को लेकर आम आदमी पार्टी के नेता राजन कुमार ने बीते को हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी, जिसके जवाब में सरकार ने बताया 25 अप्रैल 7 लाख 29 हजार 935 परिवार का कार्ड पेंडिंग था। इसमें लॉकडाउन के दौरान 32492 परिवारों ने अप्लाई किया है। राजन ने बताया कि पहली बार सरकार ने कोर्ट में कहा 27 अप्रैल तक 2लाख 60145 लोगों को 10 किलो राशन दे चुके हैं, फिर पांच मई को दुबारा सुनवाई हुई। इसमें सरकार ने कहा लगभग 50 प्रतिशत लोगों को सरकार ने राशन मुहैया करा दिया है।

उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी स्थिति का एक मुख्य कारण है कि जन वितरण प्रणाली के कार्डधारियों की सूची 2011 के जनगणना पर आधारित है। राज्य सरकार 2011 के आबादी को आधार मानकर कोर्ट में कह रही है कि खाद्य सुरक्षा कानून के तहत राज्य सरकार ने अपने 86 प्रतिशत ग्रामीणों और 60 प्रतिशत शहरी आबादी को राशन देने के लक्ष्य को 99 प्रतिशत पूरा कर लिया है, परंतु सरकार ने कोर्ट को यह नहीं बताया कि 2011 में राज्य की आबादी 3.3 करोड़ थी और अभी कम-से-कम 3.8 करोड़ है. आज की आबादी के अनुसार राज्य में अभी 40-50 लाख पात्र लोग है जो जन वितरण प्रणाली के दायरे से बाहर है।

इस पूरे प्रकरण पर विपक्षी पार्टी बीजेपी ने जेएमएम और कांग्रेस के गठबंधन की सरकार पर हमला बोला है। प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश ने कहा कि इस मामले की न्यायिक जांच होनी चाहिए। हेमंत सरकार में लगातार भूख से मौत के मामले सामने आ रहे हैं। यह सरकार इस मसले पर पूरी तरह संवेदनहीन हो चुकी है।

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