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बाढ़ आपदा : 'अभिनेत्री का घर गिरा, उसकी सब सुन रहे और हम लोगों के घर के घर गिर गये, कोई सुनने वाला नहीं'

तिलवारी गाँव में दूर तक किसानों के खेत के खेत डूबे नजर आते हैं, जबकि मटमैले और गंदे पानी में गाँव के रास्ते पहले ही गायब हो चुके हैं। अब ग्रामीणों के घर भी इस नदी के कटान के जद में हैं।

Virendra SinghVirendra Singh   24 Sep 2020 3:26 PM GMT

बाढ़ आपदा : अभिनेत्री का घर गिरा, उसकी सब सुन रहे और हम लोगों के घर के घर गिर गये, कोई सुनने वाला नहींबाराबंकी के तिलवारी गाँव में नदी की कटान के कारण ग्रामीण खुद तोड़ रहे अपना घर । फोटो : गाँव कनेक्शन

बाराबंकी (उत्तर प्रदेश)। "यहाँ घर के घर बाढ़ में बह रहे हैं, अपने हाथ बनाया घर लोग खुद तोड़ रहे हैं, ऐसे लोगों को कितना दर्द है, वो कोई सुन नहीं रहा, महाराष्ट्र में एक अभिनेत्री का घर गिरा तो उसके लिए सारी व्यवस्थाएं हो रही हैं, हमारी कोई सुनने वाला नहीं," बाराबंकी के तिलवारी गाँव की ममता सिंह (40 वर्ष) कहती हैं।

उत्तर प्रदेश में राजधानी लखनऊ से सटे बाराबंकी जिले के सिरौलीगौसपुर तहसील के सिर्फ इस गाँव में अब तक सरयू नदी में आई बाढ़ के कारण 15 घर नदी की कटान में पहले ही समा चुके हैं। सिर्फ 500 की आबादी वाले इस छोटे से गाँव में कई ग्रामीण अभी भी अपने घर तोड़ने में लगे हैं।

सरयू नदी में बाढ़ की वजह से बाराबंकी जिले में अब तक 88 गाँव बाढ़ से प्रभावित हो चुके हैं, जबकि ग्रामीणों के 60 मकानों को अब तक बाढ़ ने अपने आगोश में ले लिया है। जिला प्रशासन के यह आंकड़ें खुद इस बात की गवाही देते हैं। ऐसे में चार महीनों बाद भी ग्रामीणों की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।

बाराबंकी के तिलवारी गाँव में ग्रामीण खुद तोड़ रहे अपना घर। फोटो : गाँव कनेक्शन

इन दिनों तिलवारी गाँव में लोग खुद अपने मकान तोड़ रहे हैं ताकि कम से कम ईंट-सरिया कुछ हाथ लग जाए वर्ना नदी के कटान में इन ग्रामीणों का पूरा का पूरा घर बाढ़ में बह जाएगा।

ममता सिंह 'गाँव कनेक्शन' से बताती हैं, "नदी की कटान में हमारे खेत पहले ही समा चुके थे और अब घर बचा था, वह भी सरयू नदी की कटान में जा रहा है। सरकार ने हमें कोई सुरक्षित जगह पर बसाने की भी कोई व्यवस्था नहीं की, हमारी कोई सुनने को तैयार नहीं है।"

बाराबंकी के जिला प्रशासन के आंकड़ों पर गौर करें तो अब तक 52 गांवों की करीब 3,400 हेक्टेयर कृषि उपयुक्त भूमि बाढ़ में कट चुकी है और करीब 62,000 आबादी सरयू नदी की बाढ़ से प्रभावित हुई है। इतनी तबाही के बाद भी सरयू नदी अभी भी अपना रौद्र रूप धारण किए हुए है।

तिलवारी गांव के 65 वर्षीय सूर्य लाल बताते हैं, "साहब अधिकारी कई बार आए, देखे और चले गए, लेकिन कोई काम नहीं नजर आ रहा है जिससे नदी का कटान रुक सके। बाढ़ से तो फिर भी हमें राहत मिली है लेकिन नदी लगातार कटान कर रही है जिसमें हमारा गांव धीरे-धीरे खत्म हो रहा है।"


बाराबंकी की बात करें तो जिले की तीन तहसीलें रामनगर, रामसनेहीघाट और सिरौलीगौसपुर में अब तक 88 गाँव बाढ़ से प्रभावित हैं। इन गांवों में बाढ़ से अब तक सात लोगों की मौत के मामले सामने आ चुके हैं। ग्रामीणों के साथ-साथ 16,300 पशु भी बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। नदी में कटान की वजह से गांव में जाने के लिए रास्ता भी नहीं बचा है। तिलवारी गाँव भी इन्हीं में से एक है।

एसडीएम सिरौलीगौसपुर छत्रपाल सिंह चौहान 'गाँव कनेक्शन' से बताते हैं, "तिलवारी गांव में सरयू नदी ने कटान शुरू कर दी है जिसकी जानकारी बाढ़ खंड अधिकारी को दे दी गई है। कटान रोकने का काम शुरू कर दिया गया है और बाढ़ पीड़ितों को हर तरह की मदद देने के प्रयास किए जा रहे हैं।"

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