किसानों की टूट गई उम्मीद, उत्तर प्रदेश में 4.5 करोड़ लाख रुपए की फसल बर्बाद

किसानों की टूट गई उम्मीद, उत्तर प्रदेश में 4.5 करोड़ लाख रुपए की फसल बर्बादबाढ़ में डूबी फसल

लखनऊ। बाढ़ के कहर से देश के कई राज्यों के साथ बिहार और उत्तर प्रदेश में त्राहिमाम मचा हुआ है। गाँव के गाँव पानी में डूब चुके हैं, बाढ़ की सबसे ज्यादा मार किसानों और फसलों पर पड़ी है। खरीफ सीजन की मुख्य फसल धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, तिल, उर्द, मूंग, अरहर और मूंगफली की अच्छी पैदावार की उम्मीद लगाकर बुवाई करने वाले किसानों की उम्मीद टूट चुकी है।

कृषि विभाग और राज्य आपदा प्रबंधन विभाग की तरफ से जारी की गई 21 अगस्त की रिपोर्ट के अनुसार पूरे उत्तर प्रदेश में 243253.32 हेक्टेयर खेत में पानी भरने से 4.5 करोड़ लाख मूल्य की फसल बर्बाद हो चुकी है। फसलों के इस नुकसान से किसानों के साथ-साथ की कृषि विभाग भी चिंतित है।

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उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन विभाग के राहत आयुक्त रजनीश दुबे ने बताया, ''प्रदेश में बाढ़ से 2855 गाँवों की 355392.32 हेक्टेयर प्रभावित हुआ है, जिसमें 257392.27 खेती वाली जमीन है।''

उत्तर प्रदेश कृषि विभाग के अनुसार इस साल खरीफ सीजन में 91.58 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में बुवाई का लक्ष्य तय किया गया था, जिसमें से 85.88 लाख हेक्टेयर में फसलों की बुवाई हो चुकी थी जिसमें से बुवाई को बड़ा क्षेत्रफल बाढ़ की चपेट में है।

गोरखपुर जिले के पीपीगंज ब्लॉक के सरहरी गाँव के किसान राधेश्याम यादव ने बताया, ''मानूसन अच्छा होने के कारण इस बार 15 बीघे में धान की रोपाई कराई थी। अच्छी बरसात के कारण लगा था कि इस बार अच्छी पैदावार की उम्मीद थी लेकिन बाढ़ ने सबकुछ चौपट कर दिया। पूरी फसल बर्बाद हो गई। परिवार और मवेशियों को लेकर रोड किनारे किसी तरह रह रहा हूं।''

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ऐसा दर्द सिर्फ एक किसान का नहीं है बल्कि प्रदेश 5 लाख से ज्यादा किसानों का है। उत्तर प्रदेश के बाढ़ प्रभावित 24 जिलों की 20 लाख, 79 हजार 928 की जनसंख्या में पांच लाख से ज्यादा किसान हैं। पिछले एक दशक बाद उत्तर प्रदेश में नेपाल के जरिए आने वाले पानी के कारण ऐसी बाढ़ आई है।

महराजंगज जिले के नौतनवा ब्लॉक के फुलवरिया गाँव के किसान रामकिशुन त्रिपाठी ने बताया, ''नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही मूसलाधारा बारिश के कारण सीमा से सटे गाँवो में बाढ़ की भयावह स्थिति है। मेरा 10 बीघा खेती पूरी तरह पानी में डूब गया है। इस बार धान की नई किस्म की रोपाई कराई थी। समझ में नहीं आ रहा कि इस बर्बादी से कैसे उबर पाऊंगा।'' बाढ़ का पानी तो कुछ महीनों में कम हो जाएगा लेकिन इससे फसलों की जो बर्बादी हुई है उसे किसानों का उबरना मुश्किल होगा।

सिद्धार्थनगर के इटवा तहसील के सफियापुर गाँव के किसान मोहम्मद जमील ने बताया, ''पूरा गाँव पानी में डूब चुका है। खेत से जबतक पानी हटेगा उससे पहले ही रोपाई किए धान खराब हो चुके होंगे। इस साल बाढ़ ने बर्बाद कर दिया। हम लोग दाने-दाने के मोहताज हो जाएंगे।''

उत्तर प्रदेश में भीषण बाढ़ से जनधन के साथ ही पशुधन पर भी बहु प्रभाव पड़ा है। खेती के बाद किसानों की आजीविको सबसे बड़े साधन पशुपालन पर ज्यादा असर पड़ने से किसान परेशान हैं। बाढ़ से प्रदेशभर में 1 लाख 10 हजार 350 बड़े पशु, 58 हजार 421 छोटे पशु और 7 हजार 347 कुक्कुट प्रभावित हुए हैं।

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