किसानों के लिए त्रासदी बनी बाढ़, हर साल 1679 करोड़ रुपए की फसल हो रही बर्बाद

Mithilesh DubeyMithilesh Dubey   9 Aug 2019 7:00 AM GMT

crop damage in bihar flood, crop damage in asam flood, flood in bihar and assam, flood hits farmes in indiaनुकसान की अपेक्षा मुआवजा न मिलने से किसानों को हो रहा भारी नुकसान। (सभी तस्वीरें- अभिषेक वर्मा)

  • देश में बाढ़ की वजह से हर साल 1679 करोड़ रुपए की फसल बर्बाद होती है
  • 29,309 किसानों की 11 करोड़ 75 लाख रुपए की फ़सल बर्बाद हुई है इस वर्ष सिर्फ़ बिहार के मुजफ्फरपुर में

बिहार, असम और महाराष्ट्र में आई बाढ़ की वजह से लाखों किसानों की फ़सलें बर्बाद हो चुकी हैं। इस बर्बादी के बीच फ़सल के नुकसान का सही मुआवजा का न मिलना भी किसानों के लिए सबसे बड़ी त्रासदी है।

"सौ बीघे खेत में धान लगाया था। पिछले साल बहुत नुकसान हुआ था तो सोचा कि इस बार पूरे में धान लगाकर पिछले साल हुए नुकसान की भरपाई हो जाएगी, लेकिन किस्मत ही खराब निकली," असम के जिला गोलाघाट, ब्लॉक पोडुमोनी के नोपामुआ गाँव में रहने वाले किसान नबाज्योति साइका 'गाँव कनेक्शन' से फोन पर बताते हैं।

नबाज्योति आगे कहते हैं, "इस साल पूरी फसल ही बाढ़ में बह गई। तीन लाख रुपए से ज्यादा का नुकसान हुआ है। परिवार का खर्च चलाने के लिए अब मजदूरी करनी पड़ेगी। अभी तो हमें राहत सामग्री मिली है जिससे हमारा पेट भर जा रहा है, लेकिन आगे क्या होगा ये भगवान ही जाने।"

नबाज्योति के घर में कुल छह लोग रहते हैं और सभी खेती पर निर्भर है। जो पैदा होता है वही बेचते हैं और वही खाते हैं। इनकी गिनती गाँव के सबसे अमीर किसानों में होती है, लेकिन इस साल की भीषण बाढ़ से टूट चुके हैं। उनकी पूरी फसल बर्बाद हो गई है।

असम के 28, बिहार के 13 और महाराष्ट्र के चार जिले बाढ़ की चपेट में हैं और 209 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है जबकि लगभग डेढ़ करोड़ लोग अभी भी प्रभावित हैं। जो लोग बच गये हैं वे इस बात को लेकर चिंतित हैं कि आगे वे अपना और अपने परिवार का पेट कैसे पालेंगे, क्योंकि साल भर खाने के लिए जो अनाज वे पैदा करते हैं, बाढ़ के पानी के साथ वो भी बह चुका है।


इस बर्बादी के बीच किसानों के लिए सबसे बड़ी त्रासदी है नुकसान का सही मुआवजा न मिलना। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से भी किसानों के नुकसान की इतनी भरपाई नहीं हो पाती कि वे अगली फसल तक खुद और परिवार का पेट पाल सकें।

असम में बाढ़ के कारण अभी तक 9,496 हेक्टेयर की फसल बर्बाद हो चुकी है। वहीं बिहार में सरकार की तरफ से इस साल का कोई आंकड़ा अभी तक जारी नहीं किया गया, लेकिन जिला स्तर पर फसल नुकसान की रिपोर्ट जारी की जा रही है।

बिहार बाढ़ के बारे में जानकारों का कहना है कि यह बाढ़ 2017 से भी ज्यादा भीषण है। ऐसे में कयास लगाये जा रहे हैं कि नुकसान भी उससे ज्यादा होगा। वर्ष 2017 की बाढ़ में 872 लाख हेक्टेयर में लगी फसल बर्बाद हो गयी थी, जिसकी कुल कीमत का आकलन 68,587 लाख रुपए (682 करोड़) किया गया था।


किसान नबाज्योति आगे कहते हैं, "पिछले साल भी 50 बीघा की फसल बर्बाद हो गई थी। तब मैंने खर्च चलाने के लिए कोयले की दुकान खोल ली थी, हालांकि तब इतना नुकसान नहीं था। इस साल मैंने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा कराया है। अधिकारी लोग आये थे देखने, अब देखते हैं कि कितना मुआवजा मिलता है।"

"पिछली बार मेरे कई परिचितों को मुआवजा मिला था, लेकिन कुछ सौ रुपए थे जबकि नुकसान लाखों में था। इसलिए मुझे भी बहुत ज्यादा उम्मीद नहीं है। मजदूरी करके ही परिवार का पेट पालना होगा क्योंकि अभी इतना अनाज नहीं है कि साल भर का खर्च चल सके," नबाज्योति आगे कहते हैं।

फसलों के कुल नुकसान का अभी आकलन करना तो मुश्किल है लेकिन पिछले कुछ वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालेंगे तो नुकसान का अंदाजा लगाया जा सकता है।

तीन मार्च 2018 को राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में भारत सरकार की तरफ जल संसाधन मंत्रालय ने बताया कि 1953 से 2017 के बीच भारत में हर साल अलग-अलग राज्यों में 3.941 मीट्रिक हेक्टयेर की फसल बाढ़ के कारण बर्बाद होती है जिसकी कुल कीमत 1679 करोड़ रुपए आंकी गई है। वहीं 92,000 मवेशियों की मौत भी हो जाती है।

बारिश में भीगी उपज का सुखाने का प्रयास भी किया जा रहा

वर्ष 2017 की तरह उत्तर बिहार के 12 जिले बाढ़ की चपेट में हैं। मोतिहारी सुगौली के रहने वाले अखिलेश झा की 20 बीघे में लगाई गई मक्के की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है।

किसान अखिलेश 'गाँव कनेक्शन' से बताते हैं, "हमारे यहां तो प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना तो है नहीं। मेरा लगभग दो लाख रुपए का नुकसान हुआ है। प्रदेश सरकार अपनी तरफ से कुछ मुआवजा देने की बात कर रही है, लेकिन ये इतना कम होता है कि हम उससे महीने भर का खर्च भी नहीं चला पाते।"

वे आगे कहते हैं, "ये तो अच्छा रहा कि हमने ऊंचाई वाले क्षेत्र में कुछ फसल बोई थी। ये हमारे साथ पहली बार नहीं हुआ है। हर साल होता है और मुआवजे के नाम पर चंद रुपए दिये जाते हैं।"

पिछले साल राज्यसभा में पेश की गई रिपोर्ट


आपदा प्रबंधन विभाग बिहार के 2019 के आंकड़ों के अनुसार, मुजफ्फरपुर में 29,309 किसानों की 11 करोड़ 75 लाख रुपए की फसल बर्बाद हो गई है और 75 पंचायतों की 29,287.19 हेक्टेयर जमीन पर लगी खरीफ फसल बर्बाद हो गई है, और जिलों की रिपोर्ट आनी अभी बाकी है।

मधबुनी के विस्फी प्रखंड के मोहम्मद रिजवान ने 15 एकड़ में धान की फसल लगाई थी। बीती 17 जुलाई को आई बाढ़ से लगभग उनकी पूरी फसल बह गई। इससे उन्हें लगभग एक लाख रुपए का नुकसान हुआ है। वर्ष 2017 में आई बाढ़ में इनकी फसल बह गई थी जिसका मुआवजा इन्हें आज तक नहीं मिला।

रिजवान कहते हैं, "अभी जो तीन बीघे की फसल बच गई है उसमें पानी तीन फीट से ज्यादा है। पानी कम भी नहीं हो रहा है। ऐसे में बहुत कम उम्मीद है कि बाकि की फसल भी बच पाये।"

आपदा प्रबंधन विभाग बिहार के आंकड़ों के मुताबिक हर साल राज्य में छह लाख हेक्टेयर जमीन में खड़ी फसल बाढ़ के पानी में बह जाती है।

जहां कभी फसल लहलहा रही थी वहां अब पानी ही पानी है। तस्वीर बिहार के मधुबनी जिले की है।

बिहार सरकार ने अपने राज्य में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को लागू नहीं किया। ऐसे में वहां के प्रभावित किसानों को मुआवजा कैसे मिलेगा और उनके नुकसान की भरपाई कैसे होगी, इस बारे में आपदा प्रबंधन विभाग बिहार के संयुक्त सचिव अमोद कुमार शरण कहते हैं, "हम बिहार के किसानों को हुए नुकसान की भरपाई बिहार राज्य फसल सहायता योजना के तहत करेंगे। जिले स्तर पर सर्वे का काम शुरू हो चुका है। रिपोर्ट आने के बाद राहत राशि का वितरण किया जायेगा।"

हालांकि अमोद कुमार यह नहीं बताते कि इस योजना के तहत नुकसान के आकलन का पैमाना क्या होगा, किसानों को नुकसान का कितना प्रतिशत दिया जायेगा।

देश में अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग कंपनियां प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों से प्रीमियम लेकर फसल का बीमा करती हैं। असम के धेमजी जिले में एक प्राइवेट बीमा कंपनी के रिसर्च एग्जीक्यूटिव पराग कुमार फोन पर 'गाँव कनेक्शन' से कहते हैं, "प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत मुआवजे की राशि कितनी मिलती है इसके लिए कई तरह की शर्तें होती हैं। नुकसान के बाद हम सर्वे करके नुकसान का आंकलन करते हैं।"

"ज्यादातर मामलों में हम 25 फीसदी तक मुआवजा देते हैं। यह इस पर निर्भर भी रहता है कि नुकसान की जानकारी कब दी गई, फसल कटने के बाद बर्बाद हुई या पहले आदि। इन सब कवायदों के बाद ही मुआवजा दिया जाता है।"

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