पानी की त्रासदी- फ्लोराइड युक्त पानी से पूरे गांव के दांत खराब, कमर हो रही टेढ़ी

पानी की त्रासदी- फ्लोराइड युक्त पानी से पूरे गांव के दांत खराब, कमर हो रही टेढ़ी

उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भूगर्भ जल में फ्लोराइड की मात्रा ज्यादा, फ्लोराइड वाला पानी पीने से तमाम बीमारियों का शिकार हो रहे लोग

Chandrakant Mishra

Chandrakant Mishra   10 Aug 2019 5:41 AM GMT

लखनऊ। "बीस साल पहले जब मैं इस गांव में ब्याह कर आई थी तो मेरे दांत बिल्कुल ठीक थे। लेकिन ये पानी (पीला पानी दिखाते हुए) पीते पीते मेरे दांत खराब हो गए, बाल सफेद हो गए, हाथ पैर की हड्डियां टेढ़ी हो गई हैं। ये दिक्कत हमारे पूरे गांव में है।" उत्तर प्रदेश के उन्नाव के मार्क्स नगर की निशा (40 वर्ष) बताती हैं।

मार्क्स नगर गांव में करीब ३०० लोग रहते हैं। इनमें लगभग हर आदमी के दांत खराब हैं। 50 फीसदी महिलाओं की जवानी में कमर टेढ़ी हो गई है। 40-45 की उम्र आते-आते गांव के लोग बूढ़े दिखने लगते हैं। ग्रामीणों के मुताबिक गांव में समस्या इतनी गंभीर हो गई है कि अब बच्चे भी दिव्यांग पैदा होने लगे हैं। गांव के लोग इन समस्याओं के लिए दूषित पानी को जिम्मेदार बताते हैं।

ये भी पढ़ें:यूपी: फ‍िरोजाबाद में दूषित पानी पीने से मासूम भाई-बहन की मौत, 30 से अधिक बच्‍चे बीमार

फ्लोराइड की मात्रा ज्यादा होने से लोग हो रहे बीमार।

पांच साल पहले इसी गांव के सुरेश के घर जब बेटे का जन्म हुआ तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं था, लेकिन उनकी खुशियां एक साल में दुख में बदल गईं। सुरेश का बेटा मुश्किल से अपने पैरों पर खड़ा हो पाता था।

"जन्म के समय से ही इसके हाथ पैर टेढ़े थे, काफी इलाज कराया लेकिन ठीक नहीं हुआ। ये मुश्किल से चल पाता है।" अपनी बेटे अभिषेक को गोदी में उठाए सुरेश (35 वर्ष) की आंखें डबडबा जाती हैं। अभिषेक अब पांच साल का है। सुरेश आगे बताते हैं, "गांव का पानी ठीक नहीं है। डॉक्टरों ने बताया इसकी मां के अंदर फ्लोरोसिस की मात्रा ज्यादा होने के कारण इसे यह बीमारी हुई।"

ये भी पढ़ें: आपकी जिंदगी में घुलता जहर : इसके खिलाफ संघर्ष की एक कहानी

वर्ष 2018 में जल निगम, लखनऊ के असिस्टेंट रिसर्च अफसर मनोज कुमार की रिपोर्ट के अनुसार लखनऊ के साथ-साथ, बाराबंकी, उन्नाव, हरदोई और रायबरेली के भूजल फ्लोराइड के अंश मिले हैं। रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश भर में जमीन के नीचे प्रथम तल पर मिलने वाला पानी 30 साल पहले ही प्रदूषित हो चुका है। यह पानी मानव स्वास्थ्य के लिए काफी नुकसादायक है।

फ्लोराइड वाला पानी पीने लोगों के दांत हो रहे खराब।

जल निगम के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "उन्नाव के इस गांव में भूमिगत जल का स्तर 150 फीट से ज्यादा है। इतने गहराई से आने वाली पानी में फ्लोराइड की मात्रा बढ़ जाती है।"

इसी गांव कई बार कैंप लगा चुके, सैकड़ों दौरे कर चुके सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सरकारी अस्पताल) नवाबगंज के दंत विशेषज्ञ डॉक्टर रजत मेहरोत्रा ने बताते हैं, " गांव के पानी में फ्लोराइड की मात्रा बहुत ज्यादा है। अगर पानी में तय मानक से ज्यादा फ्लोराइड होगा तो फ्लोरोसिस नामक बीमारी हो जाती है। इससे पहले तो पीड़ित के दांत खराब होते हैं, धीरे-धीरे हड्डियां टेढ़ी होने लगती हैं।"

ये भी पढ़ें:दूषित पानी से प्यास बुझाने को मजबूर ग्रामीण

एक लीटर पीने के पानी में एक मिलीग्राम से ज्यादा फ्लोराइड नहीं होनी चाहिए। लेकिन यहां के पानी में फ्लोराइड की मात्र पांच मिलीग्राम है। गांव के लोगों ने कई साल पहले से गांव में लगे हैंडपंप से पानी पीना बंद कर दिया है। कुछ साल पहले गांव में पाइप लाइन बिछाई गई थी लेकिन पानी में इतना ज्यादा केमिकल है कि पाइप लाइन खराब हो गई। अब गांव से आधा किलोमीटर दूर लगे एक नल से पूरे गांव के लिए पीने का पानी आता है।

गाँव में सप्लाई के लिए लगा नल नहीं करता है काम।

पानी से न सिर्फ ये लोग रोगी हो रहे हैं बल्कि इनकी जिदंगियां भी तबाह हो रही हैं। मार्क्स नगर के ही अनूप (45 वर्ष) की कहानी इस त्रासदी का भयावह परिणाम है। " मेरे घुटनों में बहुत दिक्कत रहती है। लखनऊ के पीजीआई से लेकर दिल्ली में एम्स तक दिखाया लेकिन कोई लाभ नहीं मिला। बहुत देर तक न तो खड़ा हो पाता हूं और न बैठ पाता हूं। इसी चक्कर में नौकरी भी छूट गई। बहुत दिक्कत है।"

ये भी पढ़ें:पंजाब के पेयजल में मिला यूरेनियम का गंभीर स्तर

गांव के लोग बीमारियों और बार-बार की जांचों से इतना परेशान हो गए हैं कि वो किसी पत्रकार को अपनी समस्या तक नहीं बताते हैं। कई बार वो नाराज भी होते हैं। 60 साल की रमा देवी पिछले कई दशकों से कमर की दिक्कत से परेशान हैं। वो झल्लाते हुए कहती हैं, " क्या बताए कितने साल से बीमारी है। हर महीने तुम्हारे जैसे लोग आते हैं और यही सवाल पूछ कर चले जाते हैं। सब कहते हैं, पानी की समस्या दूर हो जाएगी, बीस साल हो गए यह सुनते-सुनते। लगता है अब मरने के बाद ही मेरी परेशानी दूर होगी।"


उत्तर प्रदेश के उन्नाव और सोनभद्र सबसे ज्यादा फ्लोराइड की समस्या से परेशान हैं। उन्नाव के कई ब्लॉक में लोग इससे परेशान हैं। फ्लोराइड युक्त पानी गर्भवती महिलाओं को भी नुकसान पहुंचा रहा है। राम मनोहर लोहिया संस्थान, लखनऊ की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर नीतू ने बताया, " फ्लोराइड वाला पानी हर किसी के लिए नुकसानदायक होता है। अगर गर्भवती महिला लगातार फ्लोराइड युक्त पानी पी रही है तो उस महिला के साथ-साथ गर्भ में पल रहे शिशु के लिये बहुत ही हानिकारक होता है। कई बार इसके दुष्प्रभाव से बच्चा अपंग भी पैदा हो जाता है। ऐसे में साफ पानी ही पीना चाहिए।"

ये भी पढ़ें:जल्‍द दूर हो जाएगा जल संकट, खारे पानी को पीने योग्य बनाने की योजना पर हो रहा काम

उत्तर प्रदेश में लोगों तक पेय जल पहुंचाने के जिम्मेदार विभाग यूपी जल निगम के मुख्य अभियंता (ग्रामीण) जीपी शुक्ला गांव कनेक्शन को बताते हैं, "अत्यधिक जलदोहन की वजह से भूगर्भ जल बहुत तेजी से नीचे जा रहा है। कल कारखानों से निकलने वाली दूषित पानी नदियों में छोड़ा जा रहा है जो भूगर्भ जल को दूषित कर रहा है। प्रदेश सरकार मार्च 2021 तक फ्लोराइड प्रभावित जिलों में पाइप लाइन से पानी मुहैया कराने जा रही है। इसके लिए युद्ध स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं।

ये भी पढ़ें: हर ग्राम प्रधान ऐसा करे तो, बुंदेलखंड में खत्‍म हो जाएगी पानी की समस्‍या


More Stories


© 2019 All rights reserved.

Top