पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली का AIIMS में निधन, कई दिनों से चल रहा था इलाज

पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली का AIIMS में निधन, कई दिनों से चल रहा था इलाज

भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली का आज दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) अस्पताल में निधन हो गया। यह जानकारी न्यूज एजेंसी एएनआई ने दी। उन्होंने दोपहर 12 बजकर 7 मिनट पर अंतिम सांस ली। किडनी ट्रांसप्लांट करवा चुके जेटली को कैंसर भी हो गया था। उन्‍हें मोदी सरकार के प्रमुख रणनीतिकार और प्रभावशाली नेताओं में से एक माना जाता था।

गौरतलब है कि पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली को सांस लेने में तकलीफ और बेचैनी की शिकायत थी। इसी वजह से उन्‍हें 9 अगस्त को दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया था। बीते कुछ महीनों से पूर्व वित्त मंत्री की सेहत लगातार गिर रही थी। खराब सेहत की वजह से ही उन्होंने 2019 का लोकसभा चुनाव भी नहीं लड़ा था। इसी साल 14 मई को एम्स में जेटली के गुर्दे का प्रत्यारोपण किया गया था।

अरुण जेटली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल का खास चेहरा थे। इस दौरान उन्‍होंने वित्त एवं रक्षा दोनों मंत्रालयों का कार्यभार संभाला था। इनका जन्म 28 दिसंबर 1952 को नई दिल्ली में हुआ था। इनके माता का नाम रतन प्रभा और पिता का नाम महाराज किशन जेटली था। जेटली ने दिल्ली के राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से ग्रेजुएशन की पढ़ाई की। इसके अलावा दिल्ली यूनिवर्सिटी से उन्होंने लॉ में ग्रेजुएशन किया था। छात्र जीवन में वह दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्र इकाई के अध्यक्ष भी रह चुके थे।


अरुण जेटली ने करीब 1975 में सक्रिय राजनीति में पदार्पण कर दिया था। 1991 में वह भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य बन चुके थे। मुद्दों और राजनीति की बेहतर समझने रखने वाले अरुण जेटली को 1999 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा का राष्ट्रीय प्रवक्ता बना दिया गया था। 1999 के चुनाव में अटल बिहारी वायपेयी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकार सत्ता में आई। तब की वाजपेयी सरकार में जेटली को सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के साथ ही विनिवेश राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

23 जुलाई 2000 को केंद्रीय कानून, न्याय और कंपनी मामलों के कैबिनेट मंत्री राम जेठमलानी ने इस्तीफा दे दिया। जेठमलानी के इस्तीफे के बाद उनके मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी अरुण जेटली को ही सौंप दिया गया था। महज चार माह में उन्हें वायपेयी सरकार की कैबिनेट में शामिल कर कानून, न्याय और कंपनी मामलों के साथ-साथ जहाजरानी मंत्रालय की भी जिम्मेदारी सौंप दी गई। 2004 के चुनाव में वाजपेयी सरकार सत्ता से बाहर हुई तो जेटली पार्टी महासचिव बनकर संगठन की सेवा करने लगे। साथ ही उन्होंने अपना कानूनी करियर भी शुरू कर दिया था।


सरकार में हमेशा मजबूत स्थिति में रहे अरुण जेटली ने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में केवल एक बार 2014 में लोकसभा चुनाव लड़ा। मोदी लहर में जहां छोटे-मोटे प्रत्याशी भी कई लाख मतों से जीते, वहीं अरुण जेटली को अमृतसर लोकसभा सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी अमरिंदर सिंह के हाथों एक लाख से ज्यादा मतों से हार का सामना करना पड़ा था। बावजूद राजनीति में उनका कद और बढ़ा।

2014 के चुनावों में भाजपा ने बंपर जीत के साथ नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनाई तो एक लाख से ज्यादा मतों से हारने वाले अरुण जेटली को 26 मई 2014 को वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई। साथ ही उन्हें कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय और रक्षामंत्री का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया था। ये राजनीति और भाजपा में अरुण जेटली की अहमियत साबित करता है। मार्च 2018 में वह उत्तर प्रदेश से राज्यसभा पहुंचे थे। इसके पहले उन्हें गुजरात से राज्यसभा सांसद बनाया गया था।

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