...और इस तरह बना था भारत का 29 वां राज्य तेलंगाना

...और इस तरह बना था भारत का 29 वां राज्य तेलंगानाके. चंद्रशेखर राव 

लखनऊ। आज ही के दिन 2014 में तेलंगाना भारत का 29 वां राज्य बना था। के. चंद्रशेखर राव इसके पहले मुख्यमंत्री बने। वही चंद्रशेखर राव जिन्होंने तेलंगाना के अलग राज्य बनाने को लेकर संघर्ष किया था। चंद्रशेखर तेलंगाना राष्ट्र समिति के अध्यक्ष थे। क्या है तेलंगाना का पूरा इतिहास जानिए यहां-

-तेलंगाना नाम तेलुगू अंगाना शब्द से लिया गया है जिसका मतलब होता है वो जगह जहां तेलुगू बोली जाती है। यह कभी हैदराबाद प्रांत का हिस्सा था जिसका 17 सितंबर 1948 में विलय हो गया था।

-इस क्षेत्र में पहले अलग-अलग समुदायों का राज रहा। हालांकि 1687 में यहां मुगलों के शासक औरंगजेब ने राज किया और फिर ब्रिटिश शासन तक यहां निजामों का ही राज रहा।

-निजामों ने ही 1799 में ब्रिटिश के साथ अनुबंध पर हस्‍ताक्षर किए और देखते ही देखते हैदराबाद राज्‍य ब्रिटिश हुकूमत का पसंदीदा राज्‍य बन गया और निजामों के अधिकार छिन गए।

-स्‍वतंत्रता के बाद हैदराबाद के निजाम ने भारत सरकार के समक्ष प्रस्‍ताव रखा, जिसके अनुसार वो हैदराबाद राज्‍य को सरकार के अधीन नहीं बल्कि नियमों के तहत शाही राज्‍य का दर्जा मांग रहे थे लेकिन ऐसा हो नहीं सका और देखते ही देखते तुलुगू भाषी लोग 22 जिलों में बंट गए, जिनमें से नौ जिलों में निजामों का वर्चस्‍व कायम रहा।

-26 जनवरी 1950 को भारत सरकार ने एमके वेल्‍लोडी को हैदराबाद राज्‍य का पहला मुख्‍यमंत्री बनाया गया। वो मद्रास स्‍टेट और बॉम्‍बे स्‍टेट से शासन करते रहे।

-फिर 1952 में लोकंतांत्रिक चुनाव हुए और डॉ. बुर्गुला रामकृष्ण राव पहले मुख्‍यमंत्री बने और इसी समय तेलंगाना के अलग राज्य बनाए जाने की मांग उठी।

-1953 में पोट्टि श्री रामुलू के आमरण अनशन के बाद उत्‍तरी सिरकार और रायलसीमा को काटकर आंध्र राज्‍य को बनाया गया, जिसकी राजधानी कुरनूल हुई। इसी दौरान तेलंगाना को अलग राज्‍य बनाने के लिए 1946 से लेकर 1951 तक कम्‍युनिस्‍ट पार्टी ऑफ इंडिया के नेतृत्‍व में आंदोलन चले।

-इसके बाद एक नवंबर 1956 को राज्‍यों के गठन के लिए बनाए गए आयोग ने तेलंगाना को आंध्र प्रदेश में जोड़कर राज्‍य बनाने के पक्ष में न होने के बावजूद राजनीतिक दबाव के चलते हैदराबाद के तटीय इलाकों और तेलंगाना के इलाकों को एक में जोड़ते हुए आंध्र प्रदेश राज्‍य का गठन कर दिया।

-1969 में तेलंगाना को अलग राज्य घोषित करने के लिए 'जय तेलंगाना' आंदोलन की शुरुआत। यह आंदोलन पूरे राज्‍य में फैला इसमें आये दिन हिंसक झड़पों के कारण हजारों की संख्‍या में लोग घायल भी हुए।

-1972 में आंध्र प्रदेश के तटवर्ती इलाकों में 'जय आंध्र' आंदोलन की शुरुआत हुई। इस आंदोलन की आग तेलंगाना से निकली। यहीं से आंध्र प्रदेश के लोगों में तटीय आंध्रा और तेलंगाना क्षेत्र के लोगों के बीच द्वेष की भावना फैल गई। 2001 में तेलंगाना आंदोलत को जिंदा रखने के लिए के. चंद्रशेखर राव ने तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) की स्थापना की।

-2004 में टीआरएस ने कांग्रेस के साथ संयुक्त रूप से चुनाव में हिस्सा लिया और पांच लोकसभा सीटों और 26 विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की।

-चुनावों के चलते टीआरएस को मजबूती मिली और अब तेलंगाना राज्य बनने की रास्ते भी साफ होने लगे। तीन फरवरी 2010 को केंद्र सरकार ने भी इस मामले में संज्ञान लेते हुए तेलंगाना मुद्दे पर पांच सदस्यीय श्रीकृष्णा समिति गठित की। उस समय केंद्र में कांग्रेस की ही सरकार थी। 28 दिसंबर 2012 को गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने निर्णय लिया कि एक महीने के अंदर ही तेलंगाना के भविष्य पर फैसला हो जाएगा।

-12 जुलाई 2013 को तेलंगाना पर आई रिपोर्ट पर मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री और कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष के साथ चर्चा के लिए कांग्रेस की कोर कमेटी की बैठक हुई और 30 जुलाई को संप्रग की समन्वय समिति और कांग्रेस की कार्यकारी समिति की बैठक में पृथक तेलंगाना राज्य के गठन का निर्णय लिया गया।

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