एमएसपी अधिकार के रूप में मनाया गया स्वराज यात्रा का चौथा दिन...

स्वराज यात्रा ने किसानों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाने और किसानों की फसल का डेढ़ गुना दाम दिलाने के लिए आज का दिन एमएसपी अधिकार दिवस के रूप में मनाया।

एमएसपी अधिकार के रूप में मनाया गया स्वराज यात्रा का चौथा दिन...

हरियाणा। किसान का खर्च बढ़ रहा है लेकिन आमदनी नहीं बढ़ रही है, फसलों का ठीक भाव नहीं मिलता। फसल अच्छी हो फिर भी घाटा हो जाता है। मजदूरी भी नहीं मिलती। खर्च बढ़ते जा रहा है। बीज, खाद, बिजली, डीज़ल सब मंहगे होते जा रहे हैं। घर खर्च भी तेजी से बढ़ रहा है। छोटी बड़ी आपदा को किसान सहन नहीं कर सकता। कर्ज में डूबा रहता है किसान, कर्ज से मुक्ति का कोई रास्ता नहीं है। ऐसे माहौल में स्वराज यात्रा ने किसानों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक बनाने और किसानों की फसल का डेढ़ गुना दाम दिलाने के लिए आज का दिन एमएसपी अधिकार दिवस के रूप में मनाया।


स्वराज इंडिया और जय किसान आंदोलन के तत्वधान से पिछले चार दिनों से चल रही स्वराज यात्रा आज रेवाड़ी के बेरवाल गांव से शुरू होकर धनियावाली ढाणी, गोविंदपुर बास, धारण, नरसिंहपुरा, टांकडी, मोहनपुरा, चांदुवास, ओढ़ी रामसिंहपुरा, साबन, माजरा से होते हुए भड़गी में पहुंची जहां पर दादा महेन्द्र जी व गांव के लोगों ने स्वराज यात्रा का जोरदार स्वागत किया व स्वराज यात्रियों कि दिल खोल कर आवभगत की। स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष व किसान नेता योगेंद्र यादव के नेतृत्व में चल रही इस यात्रा में पदयात्रियों ने आज का दिन आज दिन एमएसपी (MSP) अधिकार दिवस के रूप में मनाया।

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यात्रा जिस भी गांव से गुजरी वहां के किसानों की एक मुख्य समस्या उनकी फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलना था। मोहनपुरा, टांकडी, नारसिंहपुरा, चांदुवास गांवों में हुए सभाओं में किसानों ने बताया की बाजरे का समर्थन मूल्य 1400 रुपए प्रति कुंतल है जबकि किसानों को इसके लिए 1150 रुपए प्रति कुंतल से अधिक कीमत नहीं मिला। जबकि सरसों का समर्थन मूल्य जहां 4000 रुपए है पर इसके लिए भी ज्यादातर किसानों को 3200 रुपए प्रति कुंतल का ही दाम मिला।


इस यात्रा में वो जुनूनी क्रांतिकारी शामिल हैं जिन्होंने पिछले साल रेवाड़ी जिले के गांव गांव में घूमकर बाजरे की फसल पर किसान की लूट के खिलाफ चेतावनी दी। इसी कड़ी में जय किसान आंदोलन और स्वराज इंडिया के साथियों ने इस साल रेवाड़ी मंडी में 52 दिन तक धरना देकर सरकार को सरसो की खरीद के लिए मजबूर किया और किसानों के घर कम से कम चार करोड़ रुपया पहुंचाया।

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यात्रा के दौरान एक सभा को संबोधित करते हुए योगेन्द्र यादव ने कहा, "अगर हमें खेती-किसानी को बचाना है तो हम सबको कहना होगा, "मेरी जाति किसान, मेरा धर्म किसानी।" लोग हमसे पूछ रहें हैं कि आप 200 किलोमीटर की यात्रा क्यों कर रहें हैं, क्या बचा है अब गाँवों में, उनको हम कहते हैं, "गाँव, खेती, किसानी, मज़दूरी में ही इस देश का भविष्य है।"

सरकारी की एमएसपी संबंधी घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेन्द्र यादव ने कहा "खरीफ 2018/19 की MSP किसान आंदोलन की एक छोटी जीत है। किसानों के ऐतिहासिक संघर्ष ने इस किसान विरोधी सरकार को मजबूर किया कि वो चुनावी वर्ष में अपने पिछले चुनावी वादे को आंशिक रूप से लागू करे।"


साथ ही उन्होंनें किसानों को निम्न बातें याद दिलाईं:

लेकिन याद रहे सरकार द्वारा घोषित MSP:

• वो ड्योढ़ा दाम नहीं है जो किसान आंदोलन ने मांगा था

• वो दाम नहीं है जिसका वादा मोदीजी ने किया था

• सिर्फ वादा है, जो सरकारी खरीद पर निर्भर है

• अस्थाई है, अगली सरकार की मर्जी पर है

किसान को सम्पूर्ण लागत पर ड्योढ़ा दाम की गारंटी चाहिए

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जय किसान आंदोलन के राष्ट्रीय संयोजक अविक साहा ने कहा कि सरकार की घोषणा विशाल व किसान हितैषी लगने के बावजूद हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि चुनावी वर्ष में MSP में वृद्धि करना व किसान को MSP मिले, इससे सुनिश्चित करने के लिए कुछ नहीं करना; यह एक राजनीतिक हथकंडा बन गया है। इससे पहले 2008-09 में, निवर्तमान संप्रग सरकार ने पैडी कॉमन की MSP में 20.8% की वृद्धि की थी जब कि मोदी सरकार ने केवल 12.9% की वृद्धि की है। घोषणा मात्र से किसानों की एमएसपी संबंधी समस्या का कोई हल नहीं हुआ था क्योंकि घोषणा को लागू करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया था। केवल घोषणाओं से किसानों की आय में कोई वृद्धि नहीं होगी। अगर यह सरकार कृषि संकट को उबारने को लेकर गंभीर है तो उसे बाज़ार हस्तक्षेप व समर्थन योजनाओं को अविलंब मज़बूत करना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि यह हस्तक्षेप समयबद्ध, पर्याप्त और उचित निगरानी में हो।

योगेन्द्र यादव के साथ यात्रा में जय किसान आंदोलन के सह संयोजक कर्नल जयवीर, राजबाला, कुसुम, धर्मपाल नंबरदार,धर्म सिंह हेड मास्टर जी, बलवंत सिंह मिस्त्री लोधना, रजत और नीलेश जैन व अन्य बहुत से स्वराज साथी इस यात्रा में शामिल हैं।


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