पीएम मोदी के क्षेत्र में गंगा सफाई तेज, ‘नमामि गंगे’ को सफल बनाने में जुटे मंत्री

पीएम मोदी के क्षेत्र में गंगा सफाई  तेज, ‘नमामि गंगे’ को सफल बनाने में जुटे मंत्रीवाराणसी के एक घाट पर ‘नमामि गंगे’ के तहत चल रहा सफाई कार्य।

वाराणसी। 'नमामि गंगे' प्रोजेक्ट के तहत गोमुख से गंगासागर तक गंगा को पावन किया जाना है मगर इसका शुरुआती कार्य पूर्ण रूप से वाराणासी में ही केंद्रित हो चुका है। पीएम के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की गोद में विराजमान गंगा नदी के प्रदूषण को समाप्त करने और नदी को पुनर्जीवित करने का काम लम्बे समय से जारी है। हालांकि अब जाकर इस प्रोजेक्ट के तहत वरुणा से लेकर अस्सी घाट वाया भैंसासुर घाट तक गंगा की तलहटी तक मशीन द्वारा सफाई की जा रही है।

इस सफाई कार्य में कई सामाजिक संस्थाएं व गंगाप्रेमी भी जुटे हुए हैं, जिनका ज्यादातर जोर अहिल्याबाई, दशाश्वमेध और राजेंद्र प्रसाद घाट पर ही देखने को मिल रहा है। कारण भी है कि इन घाटों पर पर्यटकों की सबसे ज्यादा भीड़ दर्ज होती है। इस कारण इन तीनों घाटों को अक्सर मॉडल के रूप में दिखाया जाता है।

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शनिवार को बनारस दौरे पर आईं केंद्रीय जल संसाधन व गंगा पुनरुद्धार मंत्री उमा भारती ने आदि केशव घाट से नगवा घाट तक मुआयना करने के बाद कहा था कि निर्मल गंगा के काम में अब तेजी आ गई है। इसके अलावा सोमवार को कमिश्नर नितिन रमेश गोकर्ण ने करीब 135 करोड़ की धनराशि से हरिश्चंद्र समेत 10 घाटों का पुनरुद्धार, सुंदरीकरण एवं विकास कार्य कराने के निर्देश दिए।

'नमामि गंगे' के संयोजक राजेश शुक्ला ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंशा के अनुरूप बनारस के घाटों पर स्वच्छता और सफाई का विशेष ख्याल रखा जाता है। अस्सी से लेकर राजघाट तक गंगा की तलहटी में जमे कचड़े को मशीन द्वारा निकाला जा रहा है। तीन मशीनों से सफाई का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है। घाटों की स्वच्छता और सफाई के लिए लोगों को जागरूक किया जाता है। मां गंगा की पूजा के बाद बची सामग्री के लिए घाट पर एक यज्ञकुंड बनाया गया है, जो दशाश्वमेध घाट, राजेंद्र प्रसाद, केदार और अस्सी घाट पर लगाया गया है। पर्यटकों से पूजन सामग्री इसी यज्ञकुंड में डालने का निवेदन किया जाता है।

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उन्होंने बताया कि नालों से आने वाले पानी का ट्रीटमेंट और सहायक वरुणा और अस्सी नदी की सफाई के बाद ही गंगा पूरी तरह से साफ हो सकती है। सभी घाटों पर सामुदायिक शौचालय के निर्माण पर भी काम चल रहा है, जो लोगों के लिए निशुल्क होगा। गंगोत्री सेवा समिति से जुड़े मनीष शंकर दुबे ने बताया कि 'नमामि गंगे' के तहत काफी हद तक गंगा की सफाई हुई है। वैसे भी सभी घाटों को सुबह और शाम के वक्त आरती होती है। आरती के मद्देनजर भी घाटों पर प्रतिदिन सफाई का कार्य होता है। समस्या बाढ़ के दौरान आती है। इस पर मुख्य रूप से ध्यान देने की जरूरत है।

मौजूदा कछुआ सेंचुरी बनारस के लिए गंभीर खतरा

केंद्रीय जलसंसाधन व गंगा पुनरुद्धार मंत्री उमा भारती ने कहा कि बनारस में बनाई गई कछुआ सेंचुरी अवैध है। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने इसका डीमोडिफिकेशन कर दिया है। इस कछुआ सेंचुरी ने काशी को गंभीर खतरे में डाल दिया है। घाटों को इससे नुकसान हो रहा है। हम मौजूदा कछुआ सेंचुरी को शिफ्ट करेंगे। गंगा के किनारे ग्राम सभाओं की खाली जमीन पर बड़ी कछुआ सेंचुरी बनाए जाने की योजना है।

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शूलटंकेश्वर में ग्राम सभा की खाली जमीन पड़ी है। उमा भारती ने कहा कि गंगा के लिए गंगोत्री से गंगासागर तक सीवरेज और इंडस्ट्रीज के कचरे को रोकने के लिए तैयारी शुरू हो गई है। गंगा के लिए शीघ्र ही अलग से कानून आ रहा है। जस्टिस मालवीय की कमेटी ने एक्ट का ड्राफ्ट बनाकर दे दिया है। गंगा में पानी की कमी पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सिंचाई के लिए जाने वाली नहरों के पानी को उपयोग में लाने के लिए नई प्रणाली अपनानी होगी। इससे 30 से 40 प्रतिशत पानी बचाया जा सकेगा।

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