गाँव कनेक्शन : ईमानदारी की पत्रकारिता के आठ साल, प्यार दीजिए, हौसला बढ़ाइए

चंद लोगों ने मिलकर कुछ साल पहले जो सपना देखा था आज वो एक सितारा बनकर गाँव से जुड़े, शहर से जुड़े, देश से जुड़े अनगिनत लोगों की आंखों में टिमटिमा रहा है। आप दर्शक और पाठक हमारी ताकत हैं। आपके सहयोग से ही हम ग्रामीण भारत की आवाज़ हैं। पढ़िए आठ साल के सफर के बारे में ...

गाँव कनेक्शन : ईमानदारी की पत्रकारिता के आठ साल, प्यार दीजिए, हौसला बढ़ाइए

ग्रामीण भारत के मुद्दे, खेती किसानी, महिलाओं और युवाओं से जुड़े मुद्दों के साथ ही सरोकार की पत्रकारिता करने वाला आपका गांव कनेक्शन आज आठ साल का हो गया है। हमारे अथक प्रयासों और आपके प्यार की बदौलत गांव कनेक्शन आज ग्रामीण भारत का सबसे बड़ा मीडिया प्लेटफार्म है। आप दर्शक और पाठक हमेशा से हमारी ताकत रहे हैं। आपके सहयोग से ही हम ग्रामीण भारत की बुलंद आवाज़ बनने में सफल रहे हैं।

इन आठ वर्षों में गाँव कनेक्शन के काम को देश-विदेश की कई मीडिया संस्थानों ने सराहा है। गाँव कनेक्शन ने अपने इस सफर में कई उपलब्धियां हासिल की हैं। इन उपलब्धियों ने हमारा हौसला बढ़ाया है, हमें प्रोत्साहित किया कि हम और ज़िम्मेदार होकर काम कर सकें जिससे ग्रामीण भारत की तस्वीर को पूरे देश के सामने लाया जा सकें।

डिजिटल, प्रिंट्, वीडियो, आडियो कंटेन्ट, भारत की सबसे बड़ी मीडिया सर्वे टीम और जिलों, ब्लॉक और ग्राम पंचायत स्तर पर स्मार्टफोन से लैस हमारे प्रतिनिधि गाँव कनेक्शन की उपस्थिति सुदूर गाँवों तक दर्ज़ कराते हैं। अगर इन सभी आयामों को ग्रामीण भारत में पहुंच के हिसाब से एक साथ देखा जाए तो गाँव कनेक्शन किसी भी मीडिया संस्थान से कहीं आगे है। गाँव कनेक्शन वर्तमान में उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, पंजाब, उड़ीसा, गुजरात, आसाम, मेघालय, कर्नाटक, आंध्रप्रदेश जैसे तमाम राज्यों के 400 जिलों (डिजिटल और वीडियो) तक उपस्थिति दर्ज करा रहा है। अपनी उत्कृष्ट पत्रकारिता के लिए गाँव कनेक्शन चार बार देश का सबसे बड़ा मीडिया पुरस्कार रामनाथ गोयनका अवार्ड, और जेंडर सेंसिटिविटी के लिए यूएनएफपीए समर्थित लाडली अवार्ड से अब तक 12 बार सम्मानित हो चुका है।


गाँव कनेक्शन का सपना चंद लोगों ने मिलकर कुछ साल पहले देखा था आज वो सपना एक सितारा बनकर गाँव से जुड़े, शहर से जुड़े, देश से जुड़े अनगिनत लोगों की आंखों में टिमटिमा रहा है। दो दिसंबर 2012 को लखनऊ जिला मुख्यालय से 30 किलोमीटर दूर कुनौरा गांव में भारतीय ग्रामीण विद्यालय में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गाँव कनेक्शन के प्रिंट एडीशन को लांच किया था। इन आठ वर्षों में गाँव कनेक्शन ने कई नए मुकाम हासिल किए हैं। पहले साप्ताहिक, फिर दैनिक अखबार के बाद अब हम डिजिटल माध्यम और राष्ट्रीय चैनलों के साथ मिलकर करोड़ों दर्शकों तक पहुंचे लेकिन सबसे बहुमूल्य है लाखों ग्रामीण नागरिकों का स्नेह।

भारत की दो तिहाई आबादी भले ही गाँवों में रहती हो, लेकिन देश की मीडिया में ग्रामीण खबरों को तव्वज़ो नहीं मिलती। एक रिपोर्ट के अनुसार भारत में मुख्यधारा की मीडिया से गाँव गायब हो गए हैं। हालांकि ग्रामीण पत्रकारिता के लिए 'गाँव कनेक्शन' को सराहा गया है। अल जजीरा चैनल ने ग्रामीण खबरों को जानने के लिए गाँव कनेक्शन को सबसे माध्यम माध्यम बताया है।

देश के मीडिया पर सर्वे करने वाली संस्था सीएसडीएस मीडिया ने नवंबर, दिसंबर 2014 में देश के प्रमुख अखबारों के सर्वे में पाया कि इनके पहले पेज पर ग्रामीण भारत की खबरों का प्रतिशत शून्य रहा। बस दिसंबर में अंग्रेजी अखबार द हिन्दू ने पहले पेज की खबरों के कुल प्रतिशत का 1.37 प्रतिशत ग्रामीण भारत की खबरों को स्थान दिया। इसी तरह, टीवी चैनलों के प्राइम टाइम प्रोग्रामिंग का जब विश्लेषण किया गया तो किसी भी चैनल ने ग्रामीण भारत की खबरों को सात प्रतिशत से अधिक का समय नहीं दिया। गाँव कनेक्शन को एक प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय ऑनलाइन पुरस्कार के लिए नामित किया गया था। जर्मन मीडिया हाउस 'डायचे विले' ने दुनियाभर से 4800 नामांकनों में से गाँव कनेक्शन की वेबसाइट को 14 अंतर्राष्ट्रीय प्रविष्टियों में चुना था, ये भारत से एक मात्र नामांकन था।

अल जजीरा चैनल ने भारत के ग्रामीण खबरों को जानने के लिए गाँव कनेक्शन को भी बनाया माध्यम

गांव कनेक्शन (Gaon Connection) गांव के लोगों की आवाज़ शहर तक तो पहुंचाता ही है साथ ही शहर के लोगों को गांव के करीब लाने का, उनके रिश्ते को जोड़ने का भी काम करता है। हम भारत के ग्रामीणों तक उनके हित की सूचनाएं पहुंचाते हैं, साथ ही, गांव में आ रहे बदलाव की कहानियों से शहरी लोगों को रुबरू कराते हैं। गांव कनेक्शन की शुरुआत वर्ष 2012 में साप्ताहिक अख़बार के रुप में हुई थी, जिसके बाद वर्ष 2014 में हमने दूरदर्शन के राष्ट्रीय चैनल डीडी नेशनल के साथ हमारा गांव कनेक्शन शो किया। गांव की बदलती कहानियों को दिखाने वाले इस शो ने काफी लोकप्रियता बटोरी थी।

टीवी पर दोबारा ये सफर देश के नंबर एक न्यूज चैनल आज तक के साथ आज तक का गांव कनेक्शन के रुप में टीवी पर लौटा। जबकि वर्ष 2018 में हमने डिजिटल मीडिया प्लेटफार्म क्विंट हिंदी और दी क्विंट के साथ विशेष सीरीज की। गांव कनेक्शन की रूरल इनसाइट विंग के द्वारा अलग-अलग मुद्दों पर ग्रामीण भारत में सर्वे भी होते हैं। हमने साल 2020 में दो बड़े सर्वे किये। पहला कोविड-19 का ग्रामीण भारत पर क्या असर पड़ा और दूसरा तीन कृषि कानूनों के बारे में किसानों की राय। हमारे इस सर्वे की रिपोर्ट को काफी सराहा गया।

आठ साल का यह सफर इतना आसान नहीं था हमने कई उतार-चढ़ाव देखे। कई मुश्किलें आईं और कई उपलब्धियां भी। हमारी कुछ ख़बरों को अगर देश के सबसे बड़े पत्रकारिता पुरस्कारों से सम्मानित किया गया तो कुछ ऐसी भी ख़बरें थीं जिनमें हम अपने पाठकों की उम्मीदों पर पूरी तरह खरे नहीं उतर पाए। हमारी कोशिश यही रही है कि हम सफलता को साथ लेकर चलें लेकिन गलतियों को न दोहराएं। आज गाँव कनेक्शन जहां भी है सिर्फ आप सबकी वजह से है।

पत्रकारिता के सरोकारों को पूरा करने के साथ ही गाँव कनेक्शन, स्वयं फाउंडेशन के साथ मिलकर कुछ सामाजिक मुहिम का भी हिस्सा बना। जमीनी स्तर पर अपनी उपस्थिति के कारण ही वर्ष 2015-16 में गाँव कनेक्शन फाउंडेशन द्वारा स्वयं फेस्टिवल का आयोजन किया गया था। वर्ष 2017 के दौरान 25 जिलों में पूरे हफ्ते ग्रामीण क्षेत्रों में 1000 कार्यक्रम आयोजित हुए, जिन्हें जीपीएस से मैप भी किया गया। विश्व माहवारी स्वच्छता दिवस, मलेरिया दिवस, महिलाओं के लिए मार्शल आर्ट्स, मृदा परीक्षण, जॉब फेयर, हेल्थ कैम्प, किसान गोष्ठी, बीज वितरण, नशा मुक्ति अभियान, पशुओं का टीकाकरण, डीएम चौपाल जैसे कई कार्यक्रमों का आयोजन उत्तर प्रदेश के कई ज़िलों में इस तरह के कार्यक्रम होते रहते हैं। इन कार्यक्रमों के ज़रिए अगर हमने ग्रामीण भारत की कुछ समस्याओं को दूर करने की एक छोटी सी कोशिश की तो वहां से कई ऐसे मुद्दे भी हमें मिले जहां तक शायद हमारी नज़र भी नहीं पहुंची थी।

आठ साल पूरे होने का ये जश्न सिर्फ गाँव कनेक्शन का नहीं बल्कि आप सबका जश्न है, हम सब मिलकर ये जश्न मनाएं। आठ साल का ये सफर आपके सहयोग से पूरा हुआ है। सभी पाठकों को बहुत शुक्रिया, अपना प्यार और स्नेह बनाएं रखिए। हमें आपके सुझाव और प्रतिक्रियाओं का हमेशा इंतजार रहता है। आपका गांव कनेक्शन आज से आठ साल का हो गया है,प्यार दीजिए, हौसला बढ़ाइए।

पत्रकार, गीतकार और कहानीकार नीलेश मिसरा द्वारा शुरू किया गया यह अनोखा प्रयास गाँव कनेक्शन, देश का सबसे बड़ा रूरल मीडिया प्लेटफार्म बन चुका है। ग्रामीण युवकों को पत्रकारिता की ट्रेनिंग देने के लिए, ताकि वह अपने गाँव की आवाज सशक्त तरीके से साथ उठा सकें, गाँव कनेक्शन ने मुफ्त ऑनलाइन पत्रकारिता की ट्रेनिंग की शुरुआत की है। गाँव कनेक्शन का मूल सिद्धांत 'स्वयं प्रोजेक्ट' के बैनर तले डिजिटल दुनिया से कदमताल मिलाते कम्युनिटी जर्नलिस्ट का कैडर स्थापित करना है।

ये कम्युनिटी जर्नलिस्ट कई विधाओं-वीडियो, ऑडियो कंटेन्ट, कम्युनिटी न्यूजपेपर बनाने में मदद करने के साथ ही सुदूर गाँवों में कार्यक्रम करवाने में निपुण होंगे। इन सभी कम्युनिटी जर्नलिस्ट को प्रशिक्षित और मॉनीटर करने के लिए ब्लॉक और जिला स्तर पर स्वयं प्रोजेक्ट के तहत इन्हें प्रशिक्षण भी दिया जता है।


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