पढ़िए, आज तक के मैनेजिंग एडिटर सुप्रिय प्रसाद ने गांव कनेक्शन के 5 साल पूरे होने पर क्या कहा

पढ़िए, आज तक के मैनेजिंग एडिटर सुप्रिय प्रसाद ने गांव कनेक्शन के 5 साल पूरे होने पर क्या कहाब्राडकास्ट एडिटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं सुप्रिय प्रसाद।

पिछले कई वर्षों से आज तक भारत का नंबर एक चैनल है। इस चैनल को लोकप्रियता के शिखर पर लाने वालों में सुप्रिय प्रसाद अहम किरदार हैं। हालांकि वो टीवी स्क्रीन पर न के बराबर नजर आते हैं लेकिन परदे के पीछे वो पत्रकारिता का खाका खींचते हैं। वो आज तक हिंदी के मैनेजिंग एडिटर हैं। इसके साथ ही ब्राडकास्ट एडिटर्स एसोसिएशन (बीईए) के अध्यक्ष भी हैं। बीईए देश के राष्टीय और क्षेत्रीय न्यूज चैनलों के एडिटर्स की सर्वोच्च संस्था है।

पढ़िए ब्राडकास्ट एडिटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सुप्रिय प्रसाद के गांव कनेक्शन के 5 सा पूरे होने पर क्या कहा

सुप्रिय प्रसाद

असली भारत की धड़कन है 'गांव कनेक्शन'

गांव कनेक्शन एक अखबार ही नहीं, बल्कि एक जिद है, एक मिशन है, ग्रामीण भारत का देश के साथ कनेक्शन जोड़ने वाला एक मजबूत माध्यम है। देश भर में जाने माने गीतकार, किस्सागो और पत्रकार नीलेश मिसरा ने पांच साल पहले एक मिशन के तौर पर 'गांव कनेक्शन' की शुरुआत की थी। मुख्यधारा की मीडिया से कटे गांवों, चौपालों की खबरों का सशक्त माध्यम किया और उसे मीडिया की मुख्यधारा से जोड़ने में जुट गए। नीलेश ने एक अलग किस्म के कॉन्सेप्ट को लेकर 'गांव कनेक्शन' की शुरुआत की। ये आइडिया पूरे देश को पसंद आया। मुझे खुशी है कि 'गांव कनेक्शन' से देश के नंबर वन न्यूज चैनल आजतक का भी शानदार कनेक्शन जुड़ा। 'गांव कनेक्शन' और आजतक की साझेदारी में हमने ‘आज तक का गांव कनेक्शऩ’ के नाम से आज तक पर लंबे समय तक सीरीज चलाई, जिसे देशभर ने सराया।

'गांव कनेक्शन' के पांच साल के इस सफर में नीलेश को तमाम मुश्किलें आई होंगी, लेकिन उन्होंने हर मुश्किल को पार किया। आज गांव कनेक्शन मुख्यधारा की मीडिया में मजबूती के साथ खड़ा है। कामयाबी के पांच साल पूरे होने पर मैं 'गांव कनेक्शन'की पूरी टीम और नीलेश मिसरा को बधाइयां देता हूं। 'गांव कनेक्शन' असली भारत को इंडिया से जोड़ने का कनेक्शन यूं ही आगे भी बनता रहे।- सुप्रिय प्रसाद, मैनेजिंग एडिटर- आजतक (देखिए वीडियो)

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सुप्रिय का भी है गांव से नाता

मूलरुप से दुमका (झारखंड) में पले-पढ़े सुप्रिय ने पत्रकारिता की शुरुआत दुमका में प्रभात ख़बर के लिए रिपोर्टिंग से की। हालांकि, उस समय सुप्रिय पढ़ ही रहे थे। 1990 में रथयात्रा के लिए निकले आडवाणी अरेस्ट हुए और दुमका जेल में रखे गए। दुमका देश भर के पत्रकारों की गतिविधियों का केंद्र बन गया, वहां रोज कुछ न कुछ घटित होता रहता था। इस गहमागहमी और लाइव खबरों के साथ बने रहने के रोमांच ने सुप्रिय के मन में यह इरादा पक्का कर दिया कि, अब तो पत्रकारिता ही करनी है।

दुमका से ग्रेजुएशन पूरी करने के बाद सुप्रिय दिल्ली आए, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन में दाखिला लिया। 1995 में आईआईएमसी में कोर्स पूरा करते ही आज तक के साथ जुड़ गए। आज तक में सुप्रिय 12 साल रहे। यहीं एसपी सिंह, नकवी, मृत्युंजय कुमार झा जैसे दिग्गज पत्रकारों के संपर्क में आए। बाद में सुप्रिय ने न्यूज 24 के लिए भी काम किया। सुप्रिय फिर आजतक से जुड़े, हाल ही में जब आज तक को बेस्ट हिंदी न्यूज चैनल का अवॉर्ड मिला तो उसे सुप्रिय ने ही ग्रहण किया।

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