आपकी रूह कंपा देंगी एसिड अटैक सर्वाइवर्स की ये 10 कहानियां

आपकी रूह कंपा देंगी एसिड अटैक सर्वाइवर्स  की ये 10 कहानियांयूपी की दस एसिड अटैक सरवाइवर 

तेजाब सिर्फ जिस्म नहीं झुलसाता.. .वो आत्मा पर घाव छोड़ जाता है। किसी के प्रेमी ने, किसी के पति तो किसी पर उसके पिता ने ही एसिड फेंक दिया। तेजाब ने किसी का चेहरा खराब किया तो किसी की आंखों की रोशनी छीन ली..लेकिन वो फिर भी जीती हैं, पढ़िए गांव कनेक्शन की स्पेशल रिपोर्ट में इनकी आपबाती...

रेशमा: 5 लड़कियां हुईं तो पति ने गुप्तांगों पर एसिड डाल दिया

रेशमा जब 16 साल की थी तब इनकी शादी लखनऊ में दस साल बड़े एक टैक्सी ड्राइवर से हुई थी।कुछ साल जिंदगी खुशहाल रही लेकिन फिर विवाद शुरु हो गए। लड़ाई की जड़ थी बेटे का न होना। वो पांच बेटियों को जन्म दे चुकी थी और पति को बेटे की चाह थी। 24 जुलाई 2013 एक रात को रेशमा लखनऊ में अपने कमरे में अकेले ही सो रही थी, उनके पति ने हैवानियत दिखाते हुए उसके गुप्तांगों पर तेज़ाब दाल दिया। उस मंजर को याद कर रेशमा आज भी सिहर उठती हैं, “दरिंदगी वहीं खत्म नहीं हुई, मुझे तीन दिन तक उसी कमरे में बंद रखा गया। चौथे दिन मेरे पिता आये और मुझे लेकर कानपुर चले गए। डॉक्टरों ने मेरे शरीर से 500 ग्राम मांस का लोथड़ा निकाला।” वो प्रेगनेंट थी और इस बार बेटा हुआ था, लेकिन उसकी दुनिया उजड़ चुकी थी। इज्जत की खातिर मेरे पिता ने कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की। लोगों ने कहा कि आपस की बात है आपस में सुलझाओ।

रेशमा

कुंती: अफेयर का शक होने पर पति ने फेंका तेजाब

शराबी पति ने घर में आतंक मचाया तो घरवालों ने दोनों को घर से निकाल गया। रोजगार की तलाश में कुंती भी अपने पति के साथ लखनऊ आ गई। दोनों ने एक ही कारखाने में काम करते थे। कुंती बताती हैं, “पति को शक था कि फैक्ट्री में मेरा किसी से अवैध संबंध है। कई बार लड़ाई हुई मैंने सफाई भी दी, लेकिन 22 अक्टूबर 2011 को जब घर लौट रही थी पति ने ही पीछे से तेजाब फेंक दिया।” पति से अलग कुंती अब शिरोज में नौकरी कर अपनी जिंदगी आसानी से जी रही हैं।

कुंती

प्रीती पटेल : प्रॉपर्टी हड़पने के लिए पड़ोसी ने उड़ेल दिया था एसिड

प्रीती बताती हैं कि सन 2014 में जब वो 12वीं में पढ़ाई कर रही थी उस समय गाँव में पड़ोस में रहने वाले ननकू पटेल (45) ने उन पर दोपहर में घर के बाहर हैण्डपंप से पानी भरते समय पीछे से एसिड अटैक किया, जिससे उनकी पूरी पीठ जल गयी। प्रीती ने बताया कि वो आदमी मुझे मार कर मेरे पिता की पूरी संपत्ति हड़पना चाहता था क्योंकि मै अपने माँ-बाप की एकलौती बेटी थी। प्रीती बताती हैं, “आज वो आदमी जेल में है और मैं चाहती हूँ कि ऐसे लोग जेल से कभी भी न छूटे। मैं अभी और पढ़ना चाहती हूँ, इसलिए वो नौकरी करते हुए पढ़ाई कर रही हैं।

प्रीती

आसमां : ससुराल में बहन को पिटने से बचाने दौड़ी थी, पति ने 6 माह की गर्भवती का पेट जला दिया

आसमाँ बताती है मेरी और मेरी बड़ी बहन की शादी एक ही घर में हुई थी। वर्ष 2012 में जब में निकाह के बाद शहरयार पहुंची थी तो आपसी विवाद में अक्सर लड़ाई-झगड़े हुआ करते थे। उस वक्त मैं 6 महीने की गर्भवती थी। एक दिन मैं आँगन में खड़ी थी कि तभी बड़ी बहन के चीखने की आवाज सुनी। ससुराल वाले उसकी हत्या करने जा रहे थे, मैं पहुंची तो सास ने कहा पहले इसे ही मार डालो। जेठ ने मुझे पकड़ लिया और पति घर में रखा तेजाब ले आए और उडेल दिया। तीन दिन तक कोई दवा नहीं दी गई। मेरा पूरा पेट सड़ चुका था, पति पांच साल में जेल में हैं, जेठ को अभी जमानत मिल चुकी है।

आसमां

गरिमा : 8 साल हो गए, पता नहीं किसने एसिड फेंका था

गरिमा की कहानी सबसे अलग है। उसे आज तक नहीं पता उस पर तेजाब किसने फेंका। 2008 में जब गरिमा छठी कक्षा में पढ़ती थी, किसी ने उस पर तेजाब फेंक दिया था। वो बताती हैं,मुझे आजतक नहीं पता किसने फेंका और क्यों फेका। मेरी पीठ और पेट जल गया था। मापा-मम्मी सहारा नहीं देते तो मैं मर ही जाती।” जख्म दिखते हैं तो अक्सर सोचती हूं किसने और क्यों मेरी जिंदगी खराब की।

गरिमा

विमला : रेप के बाद कोर्ट तक न पहुंच सकूं इसलिए तेजाब से मारने की कोशिश की

विमला ने बताया कि सन 2008 में मेरे गाँव के एक ठाकुर भूटा सिंह ने मेरा बलात्कार किया । बलात्कार के बाद जब बात कोर्ट तक पहुंचीं तो उसने अपने आदमियों से मुझे डरवाया धमकाया कि मैं बयान बदल दूं। एक दिन कोर्ट में हमारी पेशी लगने वाली थी, उससे पहले मेरे ऊपर हमला किया गया। मेरे गुप्तांगों में लोहे की रॉड डाल कर मुझे मारने की कोशिश की गयी । मैं फिर नहीं मानी तो दूसरी पेशी पर जिला कोर्ट जा रही थी अचानक कुछ लोगों ने तेजाब फेंक दिया। मामला अभी कोर्ट में है रोज दुआ करती हूं कि उन्हें फांसी हो।

नीतू : दो बेटियों और पत्नी को मारकर पति दूसरी शादी करना चाहता था, लेकिन

नीतू बताती है कि मैं ढाई साल की थी और मेरी छोटी बहन डेढ़ साल रही होगी। मुझे कुछ याद नहीं लेकिन सब लोग बताते हैं, वो 16 जुलाई 1992 की तारीख थी। मेरे पिता शाहगंज से फतेहपुर आए और रात में जब हम सब सोने लगे तो तीनों पर तेजाब फेंक दिया। मेर बहन की मौके पर ही मौत हो गई थी। मेरी एक आंख बची लेकिन उससे सिर्फ 15-16 फीसदी ही दिखता है। मम्मी भी जल गई थीं। बात में पता चला पिता और ताऊ ने साजिश रची थी, पिता हम तीनों को मारकर दूसरी शादी करना चाहते थे।

नीतू

जीतू : कंपनी ने उसकी जगह मुझे नौकरी दी थी, उसको बदला लेना था

17 साल की जीतू को नोएडा की कंपनी में जिस काउंटर पर नौकरी मिली वहां पहले साजिद नाम का आदमी काम करता था। जीतू बताती हैं, “उसकी नजर ठीक नहीं थी, उसे लगता था मेरी वजह से उसकी नौकरी गई है। 2014 में जब मैं ऑफिस से लौट रही थी, साजिद अपने एक दोस्त के साथ बाइक से आया और एसिड डाल दिया।जब होश आया तो मुझे पता चला कि मै एक साइड से गले तक पूरी जल चुकी हूँ।” मैंने उसकी शिकायत ऑफिस में की थी, इसीलिए उसने बदला लिया था।

जीतू

बाला : मां पर बुरी नजर रखने वाले खेत के मालिक ने मुझ पर तेजाब फेंक बदला लिया

बाला प्रजापति बताती हैं कि उस समय मै 17 साल की थी ,12 मई 2012 को दिन में घर के अंदर मिट्टी के चूल्हे पर मै खाना बना रही थी। तभी मेरे माता-पिता जिन खेतों में काम करते थे उसका मालिक हरिकेत सुहान (45)मेरे घर आ गया । उसके हाथों में एक जग था जिसमें तेज़ाब भरा हुआ था ,वो उसने मेरे ऊपर डाल दिया। वो आगे बताती हैं, हरिकेत के खेत में मेरा माता-पिता मजदूरी करते थे, वो मां पर बुरी नजर रखता था, इसलिए उसके यहां काम छोड़ दिया था। जिसका बदला लेने के लिए उसने मेरे साथ ये सुलूक किया।

बाला प्रजापति

अंशू : जब 10वीं में पढ़ती थी वो रोज छेड़ता था, शिकायत की तो चेहरा जला दिया

अंशू राजपूत जब दसवीं क्लास में थी तो उनके घर के सामने एक आदमी रहता था। वो अक्सर छेड़खानी करता था। अंशू ने एक दिन उसकी शिकायत अपने पिता से कर दी। अंशू के पापा ने उसे आरोपी को बहुत डांटा। फिर उसने वो किया जिसकी अंशू ने कल्पना भी नहीं की होगी। अंशू बताती हैं, 2014 की बात है मैं रोज की तरह छत पर सो रही थी, वो (कपिल शर्मा) चुपके से आया और तेजाब उड़ेल दिया। आंख, कान नाक, चेहरा सब जल गया था।” आरोपी को गांव के लोगों ने गांव से बाहर निकाल दिया, घाव इतने थे कि भरने में वर्षों लग गए। वो बताती हैं, मुझे बाइक चलाना बहुत पसंद था लेकिन बाकी सपनों की तरह वो भी टूट गया...

नोट ये सभी पीड़ित शिरोज कैफे में काम करती हैं।

अंशू अब शिरोज कैफे में काम करती हैं।

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