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Ghazipur Border: राकेश टिकैत के आंसुओं ने चार घंटे में पलटा नजारा, कोई खाना छोड़ तो कोई सीधे अस्पताल से दौड़ा

गुरुवार को जब किसान नेता राकेश टिकैत को नोटिस दिया गया तब लगा कि शायद गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों का आंदोलन खत्म हो जायेगा, लेकिन कुछ ही घंटों में पूरा माहौल ही बदल गया। गांव कनेक्शन के एसोसिएट एडिटर अरविंद शुक्ला गुरुवार सुबह से ही गाजीपुर बॉर्डर पर हैं। वहां क्या-क्या हुआ, कैसे माहौल बदला, पूरी घटनाक्रम की जानकारी उन्हीं की जुबानी।

Arvind ShuklaArvind Shukla   29 Jan 2021 4:30 AM GMT

Farmers protest, ghazipur border, rakesh tikait, delhi police, rapid action forceगुरुवार को एक समय लग रहा था कि गाजीपुर बॉर्डर से किसान वापस चले जाएंगे, लेकिन कुछ ही घंटों में पूरा महौल ही बदल गया। (फोटो- अरविंद शुक्ला, गांव कनेक्शन)

गाजीपुर बॉर्डर ( उत्तर प्रदेश)। तेजिंदर सिंह (45 वर्ष) के एक हाथ में ग्लूकोज चढ़ाने वाला वीगो लगा था तो दूसरे में अस्पताल का बैंड था। गाजियाबाद के अस्पताल में जहां वे भर्ती थे, वहां उन्होंने मोबाइल पर राकेश टिकैत का आंखों में आसूं वाला वीडियो देखा और 10 बजे गाजीपुर बॉर्डर पर धरना स्थल पर पहुंच गए। सुबह तक आग के सहारे बैठे रहे।

28 साल के सतेंद्र कुमार गुरुग्राम में थे और उन्होंने 7 बजे शाम के आसपास राकेश टिकैत का भावुक वीडियो देखा और सीधे गाजीपुर बॉर्डर आ गए। सतेंद्र बताते हैं, "मैं खाना खाने जा रहा था, लेकिन रोटी का निवाला तोड़ी ना गई, पत्नी ने कहा दूध ही पी लो, मैंने कहा अब तभी खाऊंगा जब टिकैत जी को देख लूंगा, उनकी वो दशा देखी नहीं गई।"

शाम पांच बजे के आसपास गाजीपुर में थोड़ी मायूसी और डर का माहौल था। राकेश टिकैत मंच से 26 जनवरी की हिंसा और लाल किले ये घटनाक्रम के बाद धरनास्थल से वापस लौटते लोगों में हौंसला भर रहे थे। एक तरह से वो सरेंडर करने का मन बना चुके थे, जिसका जिक्र उन्होंने कुछ देर बाद मंच से ही किया था। नेशनल हाईवे-24 पर वाहनों की आवाजाही रोक दी गई थी।

भारी संख्या में पुलिस बल तैनात था। मंच से नेता कह भी रहे थे ऐसा लग रहा था कि पुलिस किसी भी पल बलपूर्वक उन्हें हटा सकती हैं। खुद राकेश टिकैत ने कई बार मंच से कहा कि अगर उनकी गिरफ्तारी होती नहीं है तो आंदोलन नहीं रुकना चाहिए।

इसी बीच गाजियाबाद जिला प्रशासन और पुलिस के अधिकारी मंच पर पहुंचे। कुछ 15 मिनट की वार्ता हुई होगी और माहौल बदल गया।

राकेश टिकैत ने कहा कि वे सरेंडर नहीं करेंगे क्योंकि विधानसभा की पास लगी कई गाड़ियां धरना स्थल के पास घूम रही हैं। बीजेपी के कुछ विधायक साजिश कर रहे हैं। अगर उन्होंने ने सरेंडर किया तो उनके बाद आदंडोलन में शामिल किसानों के साथ कुछ भी हो सकता है। वे उन्हें छोड़ कर नहीं जाएंगे। अब चाहे गोली चले या डंडे यहां से नहीं जाएंगे। भारतीय किसान यूनियन के मीडिया प्रभारी धर्मेंद्र मलिक ने भी मंच से साजिश करने वालों को ललकारा।

एडीएम नोटिस थमा कर वापस लौटे तो आशंका जताई गई कि अब पुलिस एक्शन लेगी, लेकिन इसी बीच मीडिया से बात करते हुए राकेश टिकैत भावुक हो गए। उनके बहते आंसुओं वाला वीडियो टीवी और सोशल मीडिया में वायरल हो गये। राकेश टिकैत के भाई नरेश टिकैत ने टिकैत के गांव से ऐलान कर दिया कि गाजीपुर में आंदोलन चलता रहेगा।

जिसके बाद मुजफ्फरनगर, बागपत, मेरठ , बुलंद शहर, गाजियाबाद से सैकड़ों किसान गाजीपुर बॉर्डर की तरफ कूच कर गये, लेकिन गाजीपुर बॉर्डर पर एक डर और मायूसी फैली रही। कई ट्रैक्टर ट्रालियां बांध कर वापस लौटने लगीं। इसी दौरान किसानों का एक गुट गाजीपुर बॉर्डर पर पहुंच गया और किसान जिंदाबाद और राकेश टिकैत जिंदाबाद के नारों से बॉर्डर का पूरा माहौल ही बदल गया।

जैसे-जैसे रात ढलती गई, किसानों की संख्या बढ़ती गई। सुबह होते-होते किसानों की संख्या फिर बढ़ गई है। सोशल मीडिया में राकेश टिकैत को ट्रेंड चल रहा है। उधर हरियाणा से भी किसानों का जत्था निकल चुका है।

जो आंदोलन खत्म होता नजर आ रहा था उसमे नया जोश भर गया है। टिकैत ने भी ऐलान कर दिया है कि अब आंदोलन कृषि कानूनों का मुद्दा सुलझने तक जारी रहेगा।

मुजफ्फरनगर से अहसान आलम ने अपने 18 साथियों के साथ ट्रैक्टर से यह पहुंचे है। वे बताते हैं, "उनके जिले के तमाम गांवों के घरों में चूल्हा नहीं जला। आज इतना कोहरा था ती हम लोग 7 घंटे में यहां पहुंचे। अभी सैकड़ों ट्रैक्टर और आ रहे हैं।

मुजफ्फरनगर में आज किसान यूनियन की रैली भी है। सुबह से ही डुगडुगी बजाकर किसानों को एकत्र किया जा रहा।

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