विकासात्मक पत्रकारिता को बढ़ावा देने के लिए मीडिया महाकुंभ में जुटे दुनिया भर के दिग्गज

भारत में विकासात्मक पत्रकारिता को बढ़ावा देने के लिए यूनिसेफ राजस्थान और लोक संवाद संगठन की ओर से इस चौथे मीडिया महाकुंभ में देश भर से आए 47 आवेदनों में 'गाँव कनेक्शन' के डिप्टी न्यूज एडिटर अरविंद शुक्ला को प्रथम पुरस्कार से नवाजा गया।

विकासात्मक पत्रकारिता को बढ़ावा देने के लिए मीडिया महाकुंभ में जुटे दुनिया भर के दिग्गज

उदयपुर (राजस्थान)। "आज मीडिया सरकार द्वारा नियंत्रित उद्योग हो गया है। ऐसे में पत्रकारिता को बचाए रखने का संकट पैदा हो गया है। मैं चाहता हूं कि हर व्यक्ति पत्रकार बने और सच का साथ देकर आगे बढ़ता रहे," यह बात रेमन मैग्सैसे सहित दुनिया के कई पुरस्कारों से नवाजे जा चुके प्रख्यात पत्रकार पी. साईनाथ ने कही।

साईनाथ 27 सितंबर को उदयपुर में मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग और प्रीमियर मीडिया एडवोकेसी संगठन लोक संवाद संस्थान के साझे में हुए तीन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय मीडिया महाकुंभ को बतौर मुख्य अतिथि और मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे।

मीडिया महाकुंभ में देश भर से आए 47 आवेदनों में 'गाँव कनेक्शन' के डिप्टी न्यूज एडिटर अरविंद शुक्ला को प्रथम पुरस्कार से नवाजा गया

भारत में विकासात्मक पत्रकारिता को बढ़ावा देने के लिए यूनिसेफ राजस्थान और लोक संवाद संगठन की ओर से इस चौथे मीडिया महाकुंभ में देश भर से आए 47 आवेदनों में 'गाँव कनेक्शन' के डिप्टी न्यूज एडिटर अरविंद शुक्ला को प्रथम पुरस्कार से नवाजा गया। भारत और विदेशों के 300 से अधिक अकादमिक और प्रख्यात मीडिया पेशेवरों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

कार्यक्रम के पहले दिन पी साईनाथ ने आगे कहा, " पत्रकारिता अंबेडकर, गांधी, सुभाष, नेहरूजी ने भी की थी मगर वो ऐसी नहीं थी जैसी कि आज की है। हर रोज प्रकाशित होने वाले अखबारों में मुख्य पृष्ठ पर केवल 0.67 प्रतिशत स्थान ही गाँव की खबरों को जगह मिल पाती है। चुनाव के दिनों में यह संख्या बढ़कर चार प्रतिशत तक हो जाती है। ऐसे में हम गाँव की समस्याओं की कैसे पैरवी करेंगे।"

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उन्होंने कहा, "आजकल खबरों में क्राइम और इंटरनेट का ऐसा बेमेल मिश्रण हो गया है कि पता ही नहीं चलता कि सलमान खान की खबर दिखाई जा रही है या इंटरटेनमेंट परोसा जा रहा है।"

पी. साईनाथ ने इंटरनेट के एकाधिकार पर भी अपनी बात रखी और कहा, "इंटरनेट का रोमांचीकरण रोका जाना चाहिए। मौजूदा दौर में डिजिटल मोनोपोली दुनिया की सबसे बडी मोनोपोली है। ईबे, गुगल, फेसबुक की दुनिया में 60 प्रतिशत से ज्यादा मोनोपॉली है। इंटरनेट पर इस तरह की मोनोपॉली ने इतना नुकसान नहीं किया है जितना कि आज ये सब कर रहे हैं।"

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रेमन मैग्सैसे सहित दुनिया के कई पुरस्कारों से नवाजे जा चुके प्रख्यात पत्रकार पी. साईनाथ दर्शकों को संबोधित करते हुए।

"हमें नहीं पता है कि हमारी एल्गोरीदम बेची जा रही है और उसका उपयोग चुंनिदा नीतियां बनाने में हो रहा है। हमें अपने विद्यार्थियों को सबसे पहले इतिहास पढाना चाहिए क्योंकि जब तक हमें यह नहीं पता चलेगा कि हम कहां से आए हैं तब तक हम यह नहीं जान पाएंगे कि हमारा गंतव्य क्या है," उन्होंने आगे कहा।

मीडिया महाकुंभ में यूनिसेफ की संचार विशेषज्ञ सुचोरिता बर्धन ने कहा, "करीब 70 प्रतिशत लोगों के मुद्दे मुख्य धारा के मीडिया में रिपोर्ट नहीं किए जा रहे हैं। वास्तविक खबरें ग्रामीण भारतीय परिवेश से आ रही हैं। मीडिया वह नहीं दिखाती जो इंसानी जिंदगी के करीब है।"

"जैसे कोई बाल विवाह पीड़ित है, बच्चों के मसलों पर कोई काम कर रहा है, उसके अधिकारों का हनन होता है। जबकि मीडिया इंटरटेनमेंट परोस रहा है। हमारे अखबार व्यापार और राजनीति की खबरों से भरे हैं," सुचोरिता आगे कहती हैं।

वहीं कार्यक्रम में राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी ने कहा, "महात्मा गांधी की शिक्षाओं को इतने वर्षों बाद भी क्या हमने सच्चे अर्थों में आत्मसात और अंगीकार कर पाए हैं इस तथ्य को हम सब को वर्तमान डिजिटल संदर्भों में सोचने की आवश्यकता है।"

उन्होंने कहा, "महात्मा गांधी ने लोकतंत्र में शक्तियों के विकेंद्रीकरण की बात कही थी। आज मोबाइल तकनीक सूचना और उसके संचार का विक्रेंद्रीकरण कर रही है लेकिन इन सबके बीच सूचनाओं का रेगूलेशन करना जरूरी है।"

डॉ. जोशी ने कहा, "अभिभावकों को पता ही नहीं कि बच्चा इंटरनेट पर क्या देख रहा है। फेसबुक और यूट्यूब की सामग्री पर किसी का कोई नियंत्रण नहीं है। हम सब की प्राथमिकता आज युवा पीढ़ी को इस डिजिटल डिक्टेटरशिप से बचाना है।"

मीडिया महाकुंभ में यूनिसेफ की संचार विशेषज्ञ सुचोरिता बर्धन दर्शकों को संबोधित करते हुए।

दुर्लभ अखबारों की लगी प्रदर्शनी

जवाहर कर्णावट की अखबारों की प्रदर्शन को आगंतुकों ने बहुत सराहा। प्रदर्शनी का उद्घाटन बांग्लादेश के पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त डॉ. मोहम्मद गुलाम रहमान ने किया। प्रदर्शनी में 23 देशों में प्रकाशित होने वाले पिछले 115 साल के 95 हिन्दी पत्र पत्रिकाओं में से चुनिंदा व दुर्लभ पत्र-पत्रिकाओं का संकलन प्रदर्शित किया गया है।

इस प्रदर्शनी की खास बात यह रही कि इसमें ऐसे दुर्लभ अखबारों का संकलन है जिन्हें भारत की आजादी के समय दूसरे देशों में प्रकाशित किया गया था। इनमें से एक अखबार जवान सिंगापुर से प्रकाशित होता था। उसका 15 अगस्त, 1947 का दुर्लभ अंक भी है, जिसके बाद इस अखबार का प्रकाशन ही बंद कर दिया गया। इस अखबार के 15 अगस्त के अंक का शीर्षक था-आज आप आजाद हैं।

लाला हरदयाल की गदर पार्टी का 1 नवंबर 1913 का अखबार गदर भी प्रदर्शनी में रखा गया है। दक्षिण अफ्रीका से 1903 से निकलने वाला इंडियन ओपीनियन भी है। एक और प्रदर्शनी सूर्यप्रताप सिंह राजावत की-भारत के मूल संविधान में भारतीय सभ्यता का चित्रण विषयक प्रदर्शनी का उद्घाटन उजाला शाक्या, आउटरीच नेपाल के संस्थापक प्रबंधक ने किया।

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