‘मैं जानती हूं मेरे इस कदम से पिता को बहुत दुख पहुंचेगा, लेकिन वो दुख कर्ज के बोझ से कम होगा’

‘मैं जानती हूं मेरे इस कदम से पिता को बहुत दुख पहुंचेगा, लेकिन वो दुख कर्ज के बोझ से कम होगा’फोटो साभार: गूगल इमेज

लखनऊ। दहेज प्रथा का दंश हमारे समाज से अब तक नहीं मिट पाया है। अब महाराष्ट्र में एक बेटी को इसलिए आत्महत्या करना पड़ी, ताकि उसके गरीब पिता को दुल्हे वालों की दहेज की मांग पूरी करने के लिए कर्ज न लेना पड़े। मामला किनवट तहसील के भिशी गांव का है। विलास शिरगिरे की बेटी पूजा ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। वह अपने छोटे भाई के साथ किनवट में किराए के कमरे में रह कर पढ़ाई कर रही थी।

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पिता छोटे किसान हैं। वे दूसरों के खेत में काम करके परिवार पालते थे। वे चाहते थे कि पूजा अच्छी पढ़-लिख जाए और किसी अच्छे घर में उसकी शादी हो जाए। पिता ने एक परिवार के साथ पूजा की शादी की बात चलाई, लेकिन उस परिवार ने 5 लाख रुपए का दहेज मांगा। इसी मांग को पूरा करने के लिए पिता और कर्ज लेने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन पूजा को नागवार गुजरा। वो नहीं चाहती थी कि उसके कारण पिता पर और बोझ बढ़े। यही सोचते हुए उसने आत्महत्या कर ली।

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पूजा ने अपने सुसाइड नोट में अपील की है कि सभी को दहेज का विरोध करना चाहिए। हमारी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। स्कूल की किताबों का खर्च उठाना भी बड़ी चुनौती है। ऐसी स्थिति में मैं अपने पिता पर और बोझ नहीं डालना चाहती। यही कारण है कि मैंने अपनी जिंदगी खत्म करने का कदम उठाया है।

पूजा ने आग लिखा है, 'मैं जानती हूं मेरे इस कदम से पिता को बहुत दुख पहुंचेगा, लेकिन वो दुख कर्ज के बोझ से कम होगा।

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