गरीबी के कारण शादी के लिए बिकने को मजबूर लड़कियां

गरीबी के कारण शादी के लिए बिकने को मजबूर लड़कियांप्रतीकात्मक तस्वीर 

इलाहाबाद। ‘‘शादी तो मेरी एक व्यक्ति से हुई थी, लेकिन वहां जाने के बाद परिवार के कई लोग मेरे साथ गलत करते थे। कैसे भी करके मैं वहां से भाग आई। अब मैं वहां नहीं जाना चाहती हूं।’’ ऐसा कहना है हरियाणा में शादी के बाद अपने गाँव छिपिया भागकर आईं निशा (बदला नाम) का।

लोग यहां गरीब ज़रूर हैं, लेकिन दहेज मांगने में पीछे नहीं है। दहेज देने में असमर्थ होने के कारण लोग अपनी बेटियों की शादी बाहर करने को मजबूर है। बाहर जो शादी होती उसमें दूल्हा पक्ष ही सारा खर्चा भी उठाता है।
गेम कली (50 वर्ष) स्थानीय महिला

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यह कहानी सिर्फ निशा की नहीं है, निशा जैसी कई लड़कियां गरीबी और अज्ञानता की वजह से अंधेरे में जीने को मजबूर है। इलाहाबाद जनपद से 45 किलोमीटर दूर शंकरगढ़ के छितिया, रमना, बुध नगर, बदामा गाँव, हड़ही, जनवा और सिद्धपुर पहाड़ी का क्षेत्र की लड़कियों की शादी गरीबी की वजह से हरियाणा और बिहार जैसे प्रदेशों में हो रही है। लड़कियों की शादी के लिए दलाल यहां बहुत सक्रिय हैं।

बुध नगर गाँव की रहने वाली और महिला समाख्या से जोड़ी बुजुर्ग बेला बताती हैं, ‘‘यहां लड़कियों की शादी बाहर कराने के लिए दलाल बहुत हैं। सिर्फ पुरुष ही नहीं महिला दलाल भी गाँवों में घूम-घूमकर माँ-बाप को बहलाती-फुसलाती हैं। एकबार एक महिला मेरे पास भी आई और बोली कि अपनी बिटिया की शादी हरियाणा में कर दो तो शादी के खर्चे के साथ-साथ पच्चीस हज़ार रुपए अलग से देंगे। मैंने उसे मारकर भगाया दिया। मैं जागरूक हूं तो उनके कहे में नहीं आई, लेकिन जिन्हें समझ नहीं है वो लोग उनके कहे में आ जाते हैं।’’

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शंकरगढ़ की हालत बुन्देलखण्ड जैसी है.

इलाहाबाद से 45 किलोमीटर दूर चित्रकूट जनपद के पास स्थित शंकरगढ़ पथरीला इलाका है। यहां के लोगों की ज़िन्दगी खनन कारोबार से चलती थी। सरकार ज्यादातर संख्या में अवैध खनन होने के कारण खनन पर रोक लगा दी तो लोगों की ज़िन्दगी सड़क पर आ गयी। लोगों के पास खाने तक के पैसे नहीं होते है तो शादी कैसे करें। रोजाना कमाते है तो खा पाते हैं।

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स्थानीय महिला गेम कली (50 वर्ष) बताती हैं, ‘‘लोग यहां गरीब ज़रूर हैं, लेकिन दहेज मांगने में पीछे नहीं है। दहेज देने में असमर्थ होने के कारण लोग अपनी बेटियों की शादी बाहर करने को मजबूर हैं। बाहर जो शादी होती उसमें दूल्हा पक्ष ही सारा खर्चा भी उठाता है।’’

स्थानीय निवासी सूरज बताते हैं कि यहां गरीबी ज्यादा है। लोग लड़कियों की शादी में ज्यादा खर्च का बोझ नहीं उठा सकते तो दूर हरियाणा में अपनी लड़कियों की शादी कर देते हैं। लड़की के पक्ष वाले लड़के के परिवार के बारे में कुछ भी नहीं जानते हैं। लड़कियां वहां जाती हैं तो परेशान होती हैं। कुछ लड़कियां तो जैसे-तैसे वहां रुक जाती हैं, लेकिन कुछ लड़कियां परेशान होकर भाग आती हैं।

शादी के बाद छोड़ भी देते हैं

छिपिया गाँव की रहने वाली फूलकली (35 वर्ष) बताती हैं, ‘‘कुछ लड़कियां तो परेशान होकर भाग आती हैं और कुछ लड़कियों को वहां के लोग छोड़ भी देते हैं। हमारे गाँव की एक लड़की की शादी हरियाणा में हुई थी, कुछ दिनों बाद वो वापस चली आई। अब यहीं रहकर मजदूरी करके रहती है। अब उस लड़के के परिवार वाले लड़की को ले जाना भी नहीं चाहते है। ऐसी स्थिति कई गाँवों में देखी जा सकती है।

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शंकरगढ़ थाने के एसएचओ अमित मिश्रा से जब इस समबन्ध गाँव कनेक्शन ने बातचीत किया तो उनका कहना था कि इस सम्बन्ध में हमें कोई शिकायत नहीं आई है। अगर कोई लड़की हमें शिकायत करती कि उसकी शादी जबरदस्ती हो रही है तो हम इसपर करवाई ज़रूर करते। आपके दिए जानकारी पर हम जांच करेंगे और अगर कोई दोषी पाया गया तो कठोर सज़ा होगी।

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