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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को लेकर सरकार का बयान, बदलावों का किसानों पर फर्क नहीं

Arvind ShuklaArvind Shukla   24 Feb 2020 1:08 PM GMT

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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में पिछले दिनों से चल रही अटकलों पर सरकार की तरफ से बताया गया है कि योजना में किये गये बदलावों से किसान के प्रीमियम पर फर्क नहीं पड़ेगा। कृषि मंत्रालय में संयुक्त सचिव और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के सीईओ आशीष भूटानी ने जारी एक बयान में कहा, "प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रावधानों में किए बदलावों से किसानों के प्रीमियम पर किसी तरह का फर्क नहीं पड़ेगा। यानी प्रीमियम की दरें नहीं बढ़ी हैं।"

बाइस फरवरी को जारी प्रेस नोट और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अधिकारिक ट्वीटर हैंडल से बताया गया कि बीमा के लिए किसान की तरफ से दिए जाने वाले प्रीमियम में कोई बदलाव नहीं किया गया है। किसान पहले की तरह खरीफ की फसल पर 2 फीसदी, रबी की फसलों पर 1.5 फीसदी और बागवानी नकदी फसलों पर अधिकतम 5 फीसदी का प्रीमियम देना होगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 19 फरवरी को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में फसली बीमा योजनाओं प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) और मौसम आधारित फसल बीमा योजना (Weather Based Crop Insurance) में कई बड़े बदलावों को मंजूरी मिली थी। जिसमें फसल बीमा को स्वैच्छिक किए जाने जैसा महत्वपूर्ण निर्णय भी शामिल था। इसके साथ ही पहले जो किसान केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) के तहत लोन लेते थे उनसे बैंक में बिना बताए भी प्रीमियम काट लिया जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। इसके साथ ही पीएमएफबीवाई और आरडब्ल्यूबीसीआईएस (Weather Based Crop Insurance) के तहत केंद्रीय सब्सिडी को गैर सिंचित क्षेत्रों में 30 फीसदी और सिंचित क्षेत्रों में 25 फीसदी तक कर दिया है। इसके साथ नए फैसले के तहत 50 फीसदी सिंचित क्षेत्र सिंचित में ही गिना जाएगा।

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इसके बाद कांग्रेस और किसान नेताओं ने आरोप लगाया था कि केंद्र सरकार ने फसल बीमा योजना के लिए अपने हिस्से की वित्तीय संसाधनों में कटौती कर किसानों के साथ धोखा किया है।

कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने नरेंद्र मोदी कैबिनेट के फैसले के दूसरे दिन सरकार पर गुपचुप तरीके से बीमा योजनाओं में प्रीमियम कटौती का आरोप लगाया।


सुरजेवाला ने कहा, "अभी तक प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में 2 प्रीमियम राशि किसान देता था जबकि बाकी का 98 फीसदी प्रीमियम केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर (50-50 फीसदी) देती थीं। लेकिन मोदी कैबिनेट ने केंद्र की हिस्सेदारी 50 की बजाए 25 प्रतिशत कर दी है। मतलब कि अब किसान को 2 फीसदी की जगह (25 प्रतिशत प्लस 2 फीसदी-27 फीसदी ) का भुगतान करना पड़ेगा। ऐसे में किसान न इनता प्रीमियम भर पाएगा और न बीमा करवा पाएगा।"


लेकिन 22 फरवरी को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के ट्वीटर और इस संबंध दी गई जानकारी के मुताबिक फसल बीमा योजना में किए गए बदलावों से किसान पर फर्क नहीं पड़ेगा। पीएमएफबीआई के सीईओ ने कहा, "प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को पारदर्शी और भ्रष्टचार मुक्त बानने के लिए कुछ एहतियाती कदम उठाए गए हैँ इसके लिए 55 जिलों को चुना गया है। जहां पिछले तीन वर्षों में कई तरह की गड़बड़ियां की गईं और राज्य उसे रोकने में नाकाम रहे। जिससे उनकी जिम्मेदारियां बढ़ा दी गई हैं। केंद्र ने किसी भी तरह अपनी वित्तीय जिम्मदारियां कम नहीं की हैं।"

कैबिनेट की बैठक के बाद केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा था कि, "फसल बीमा योजनाओं को और प्रभावी बनाने के लिए कुछ बदलाव किए गए हैं। पिछले तीन सालों में बीमा कराने वालों में लोन लेने वाले किसानों का प्रतिशित 58 औऱ गैर ऋणी किसानों का प्रतिशत 42 था। 2015 से पहले गैर ऋणी किसानों का प्रतिशत सिर्फ 5 था। लेकिन राज्य सरकारों और किसान संगठनों की मांग थी, इसलिए स्वैच्छिक बनाया गया है।"

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भुटानी ने अपने बयान में ये भी कहा कि "फसल बीमा योजना की खामियों को दूर करने के लिए खेती योग्य जमीन को डिजिटल सिस्टम से लिंक कर दिया गया है। क्षति के आंकलन के लिए कटाई प्रणाली में निर्धाति समय में विलंब होने पर स्मार्ट सिस्टम को अंतिम मान लिया जाएगा।"

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में हुए ये बदलाव

  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और मौसम आधारित फसल बीमा योजना अब स्वैच्छिक होगा, केसीसी से पैसा नहीं कटेगा।
  • किसान अपनी पसंद और जरुरत के मुताबिक बीमा ले सकें। जैसे सूखा या बाढ़ के लिए अलग-अलग या फिर दोनों में में कोई एक भी।
  • PMBFY और RWBCIS के तहत सिंचित क्षेत्रों में केंद्रीय सब्सिडी 25 और गैर सिंचित क्षेत्र के लिए बीमा केंद्रीय सब्सिडी 30 फीसदी तक सीमित होगी।
  • तय समय में बीमा राशि का भुगतान न करने वाले राज्यों को योजना से बाहर किया जाएगा।
  • राज्यों में बीमा कंपनियां एक साल के बजाए कम से कम तीन साल के लिए टेंडर भरेंगी।
  • देश के आपदाग्रस्त ( बाढ़ और जलभराव आदि) 151 जिलों से लिए विशेष बीमा योजना बनेगी।
  • नुकसान आंकलन और दावा निपटान के लिए मौसम उपग्रह जैसी तकनीकी का सहारा लिया जाएगा।
  • फसल बीमा योजना में पहले प्रशासनिक व्यय शामिल नहीं था, जब 3 फीसदी होगा।

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