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जमीन और फसलों की प्यास बुझा रहे ये 18 हजार गड्ढे

सागर (मध्य प्रदेश)। बरसात के पानी को आसान तरीके से एक साधारण किसान कैसे बचा सकता है, इस तरकीब को बताने के लिए एक युवा किसान देश के हजारों किसानों को प्रशिक्षित कर रहा है। इनका बताया तरीका भू-जलस्तर रिचार्ज करने का सबसे सस्ता, सरल और सहज तरीका है, जिसे बिना किसी लागत के कोई भी किसान एक बारिश में दस से पन्द्रह लाख लीटर पानी बचा सकता है।

“तीन से चार महीने होने वाली बारिश में हर साल एक किसान के एक एकड़ खेत से लाखों लीटर पानी और मिट्टी बर्बाद हो जाती है। मुझे लगा अगर किसान इस पानी और मिट्टी को संरक्षित कर लें तो इससे वाटर लेवल रिचार्ज होगा। दो घंटे मेहनत करके एक एकड़ खेत के ढलान वाले जगह पर ये एक गड्ढा खोदकर दस से पन्द्रह लाख लीटर पानी, दो ट्राली मिट्टी तीन से चार महीने होने वाली बरसात में संरक्षित किया जा सकता है।” ये कहना है आकाश चौरसिया (29 वर्ष) का। ये मध्य प्रदेश के सागर जिले के रेलवे स्टेशन से महज छह किलोमीटर दूर राजीव नगर के रहने वाले हैं।

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फौज के जवान भी यहां खेती के तौर-तरीके सीखने आते हैं

आकाश ने ‘वाटर रिचार्ज हार्वेस्टिंग एंड रिसाइक्लिंग सिस्टम’ (गढ्ढा) बनाकर एक ऐसी तरकीब निकाली जिससे एक साधारण किसान करोड़ों लीटर पानी और कई ट्राली उपजाऊ मिट्टी को संरक्षित कर सकता है। जिसमें उसकी लागत शून्य होगी और खेत उपजाऊ होगा। इन गड्ढों से सिर्फ पानी ही संरक्षित नहीं हो रहा है बल्कि खेतों की उपजाऊ मिट्टी भी बहने से रुक रही है।

आकाश हर महीने की 27-28 तारीख को देश के हजारों किसानों को कम लागत में खेती करने और गड्ढा बनाने की नि:शुल्क तरकीब बताकर मिट्टी और पानी को बहने से रोकने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। वर्ष 2014 से अब तक इनके प्रशिक्षित किए देश के अलग-अलग हिस्सों से सात हजार से ज्यादा किसान 18,000 गड्ढे बना चुके हैं।

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आकाश बताते हैं, “अगर एक घंटे बारिश हुई और उस दौरान खेत में 25 हजार लीटर पानी गिरा तो ये पानी इस गढ्ढे में इकठ्ठा हो जाता है। दो दिन फिर बारिश नहीं हुई तो इस पानी से भूमि रिचार्ज होती रहती है। जब-जब बारिश होगी गढ्ढे में पानी होगा और उससे भू-जलस्तर रिचार्ज होगा।”

वो आगे बताते हैं, “इस गड्ढे में पानी के साथ-साथ खेत की उपजाऊ मिट्टी भी एकत्रित हो जाती है। इस उपजाऊ मिट्टी को किसान पु:न खेत में डाल सकता है, जिससे हमारे वायुमंडल में मौजूद अनगिनत जैव उर्वरक तत्व जमीन में पहुंच जाते हैं। जहां का वाटर लेवल 400-500 फिट गहरा था वहां इन गड्ढों को बनाने से 250-300 वाटर लेवल हो गया है।”

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हर महीने की 27-28 तारीख को किसान यहां प्रशिक्षण लेने आते हैं

ये तीन एकड़ जमीन में पूरी तरह से जैविक खेती करते हैं, मल्टीलेयर फॉर्मिंग इनके द्वारा बनाई गयीं जैविक खादें, कीटनाशक दवाइयां, खेती के आसान तौर-तरीके सीखने यहाँ देश के विभिन्न हिस्सों से किसान हर महीने आते हैं।

ऐसे बनता है पानी रिचार्ज करने का ये गढ्ढा

आकाश ने साल 2014 में अपने खेत की ढलान वाली जगह जहाँ से पूरे खेत का पानी बह जाता था वहां 10\10 का एक गढ्ढा खोदा। जिसमें इनके खेत का पानी और मिट्टी इकट्ठा होती रहती है। ये गढ्ढा 10 मीटर लम्बा, 10 मीटर चौड़ा, 10 मीटर गहरा होता है। इसे किसान अप्रैल-मई महीने में अपने खेत के बाहर ढलान वाली जगह पर एक एकड़ खेत में एक या उससे ज्यादा भी गड्ढे बना सकते हैं।

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आकाश का कहना है, “मेरे ट्यूबवेल का वाटर लेवल 65 फिट गहरा है जो पिछले पांच साल से घटा नहीं है। इससे खेत की नमी कम नहीं होती है। इमरजेंसी में थोड़ा बहुत पानी इस गढ्ढे का इस्तेमाल भी किया जा सकता है, इसमे जानवर पानी पी सकते हैं, मैं तो कच्चे पान का बंडल भी इसी पानी में डाल देता हूँ, इसके लिए हमे अलग से इंतजाम नहीं करना पड़ता है।”

वो आगे बताते हैं, “हमारे खेतों की मिट्टी बहुत ताकतवर होती है, जिसमें वायुमंडल के बहुत सारे तत्व होते हैं। जिन तत्वों को किसान बाजार से नहीं खरीद सकता है वो सारे तत्व इस मिट्टी के जरिये खेत में पहुंच जाते हैं।”

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