आ गया जीएसटी : आज से भारत में एक देश , एक टैक्स ,एक बाजार 

आ गया जीएसटी : आज से भारत में एक देश , एक टैक्स ,एक बाजार प्रधानमंत्री मोदी 

लखनऊ एक देश-एक कर के सपने जीएसटी को लॉन्च हो गया है इस मौके पर संसद में मध्यरात्रि में स्पेशल सेशन बुलाया गया थाजीएसटी लागू होने के मौके पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई दिग्गज मौजूद रहे लॉन्च से पहले ही सरकार ने किसानों को बड़ी राहत दी है, जीएसटी काउंसिल की बैठक में फर्टिलाइजर पर GST 12% से घटाकर 5% कर दिया गया है, इसके अलावा ट्रैक्टर पार्ट्स में भी छूट की गई हैउन्हें 28% टैक्स स्लैब से लाकर 18% में कर दिया गया है

इससे पहले पीएम मोदी GST को लेकर विशेष सत्र को संसद में संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा- राष्ट्र के निर्माण में कुछ ऐसे पल आते हैं। कुछ देर बाद देश एक नई व्यवस्था की ओर चल पड़ेगा। सवा सौ करोड़ देशवासी, इस ऐतिहासिक घटना के साक्षी हैं। जीएसटी की प्रक्रिया सिर्फ अर्थव्यवस्था के दायरे तक है ऐसे मैं नहीं मानता।

पिछले कई सालों से अलग-अलग टीमों के द्वारा जो प्रक्रियाएं चली हैं, वो एक प्रकार से भारत के लोकतंत्र की। भारत के संघीय ढांचे की, को-ऑपरेटिव फेडरेलिज्म के मिसाल के तौर पर आया है। इस पवित्र अवसर पर आप सब अपना बहुमूल्य समय निकाल के आए हैं। दिल से आपका स्वागत है। आपका आभार व्यक्त करता हूं।

ये जो दिशा और रास्त हमने चुना है। य़ह किसी एक दल की सिद्धि नहीं है। यह किसी एक सरकार की सिद्धी नहीं है। ये हम सब की सांझी विरासत है। हम सबके साझे प्रयासों का परिणाम है। रात्रि के 12 बजे इस सेंट्रल हॉल में एकत्र हुए हैं। ये वो जगह है जो इस राष्ट्र के अनेक महापुरुषों के पदचिन्हों से इस जगह ने पावन किया है।

9 दिसंबर 1946 से इस जगह को हम याद करते हैं। संविधान सभा की पहली बैठक से यह हॉल साक्षी है। जब संविधान सभा की पहली बैठक हुई, पंडित जवाहर लाल नेहरु, डॉक्टर पटेल, उस सदन में जहां, कभी 14 अगस्त 1947 रात 12 बजे देश की स्वतंत्रता पवित्र और महान घटना का साक्ष्य है।

26 नवंबर 1949 देश ने संविधान को स्वीकार किया। यह वही जगह है, और आज जीएसटी के रूप से बढ़कर कोई और स्थान नहीं हो सकता, इस काम के लिए। संविधान का मंथन 2 साल 11 महीने 17 दिन चला था। हिंदुस्तान के कोने कोने से विद्वान उस बहस में हिस्सा लेते थे। वाद-विवाद होते थे, राजी नाराजी होती थी. सब मिलकर बहस करते थे रास्ते खोजते थे। इस पार उस पार नहीं हो पाए तो बीच का रास्ता खोजकर चलने का प्रयास करते थे।

जीएसटी भी लंबी विचार प्रक्रिया का परिणाम है, सभी राज्य समान रूप से केंद्र सरकार उसी की बराबरी में और सालों तक चर्चा की है। संसद में इसके पूर्व और उसके पूर्व के सांसदों ने लगातार इस पर बहस की है। जब संविधान बना, तब पूरे देश के नागरिकों को समान व्यवस्था खड़ी कर दी थी। जीएसटी ने सभी राज्यों के मोतियों को एक धागे में पिरोने का प्रयास है। जीएसटी को-ऑपरेटिव फेडरिलज्म का प्रयास है।

जीएसटी टीम इंडिया का क्या परिणाम हो सकता है, यह उसके सामर्थ का परिचायक है। जीएसटी काउंसिल केंद्र और राज्य ने मिलकर, जिसने गरीबों के लिए पहले उपलब्ध सेवाओं को बरकरार रखा है। दल कोई भी हो, सरकार कोई भी गरीबों के प्रति संवेदनशीलता सबने रखी है।

इसमें जिन जिन लोगों ने इस प्रकिया को आगे बढ़ाया। आज जीएसटी काउंसिल की 18 वीं मीटिंग हुई। ये संयोग है कि गीता के 18 अध्याय है, और जीएसटी के भी 18 मीटिंग है। आज हम उस सफलता के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि चाणक्य ने कहा था, 'कोई वस्तु कितनी भी दूर क्यों न हो, उसका मिलना कठिन न क्यों न हो, कठिन तपस्या और परिश्रम से उसे भी पाया जा सकता है। हम कल्पना करें देश आजाद हुआ, 500 रियासतें थीं। अगर सरदार पटेल ने सबको मिलाकर एक न किया होता तो देश का मानचित्र कैसा होता? जिस प्रकार से पटेल ने एकीकरण का काम किया था उसी तरह आज जीएसटी के द्वारा आर्थिक एकीकरण का महत्वपूर्ण काम हो रहा है।'

गंगानगर से लेकर ईटानगर, लेह से लेकर लक्ष्यद्वीप से लेकर वन नेशन, वन टैक्स। ये सपना हमारा सराकर होके रहेगा। एल्बर्ट आइस्टिन ने कहा था, दुनिया में कोई चीज समझना सबसे ज्यादा मुश्किल है वो है इनकम टैक्स। मैं सोच रहा होता तो वो इतना टैक्स देखकर क्या कहते?

एक ही चीज दिल्ली में एक दाम, गुरुग्राम में दूसरा, नोएडा में गए तो अलग। इन सारे राज्यों के टैक्स के कारण अलग अलग टैक्स। एक प्रकार से हर किसी के लिए कन्फयूजन की स्थिति रहती थी। विदेशी निवेशकों के लिए भी कन्फ्यूजन का माहौल बना रहता था।

जीएसटी के कारण एंट्री, टोल टैक्स खत्म हो जाएंगे। घंटों ट्रक खड़े रहते हैं। फ्यूल का नुकसान होता है। पर्यावरण को नुकसान होता है। अब इन सबसे मुक्ति मिलेगी। कुछ सामान को वक्त पर पहुंचना जरूरी होता है। वो अब समय से पहुंचेगा। जीएसटी के तौर पर देश एक आधुनिक टैक्स सिस्टम की ओर कदम रख रहा है। एक ऐसी व्यवस्था है जो काले धन, करप्शन को रोकने में अवसर प्रदान करती है। ईमानदारी से व्यापार करने के लिए उमंग मिलेगा।

टैक्स टेरेरिज्म और इंस्पेक्टर राज नई नहीं है। हमने देखा है, लोग भोगते आए हैं। अफसरशाही बिल्कुल समाप्त हो रहा है। जो सामान्य व्यापारियों, कारोबारियों को जो परेशानियां होती रही हैं, उससे मुक्ति का मार्ग मिलेगा। कोई ईमानदार कारोबारी परेशान हो, उससे मुक्ति की संभावना जीएसटी के अंदर है। 20 लाख का तक का व्यापार करने वाले को मुक्ति दे दी गई है। 75 लाख तक का कारोबार करने वालों को भी नाममात्र जोड़ा गया है।

सामान्य मानवीय को इस नई व्यवस्था से कोई बोझ नहीं होगा। जीएसटी की व्यवस्था आर्थिक भाषा में ही सीमित नहीं है। सरल भाषा में कहूं तो यह देश के गरीबों के हित में सार्थक होने वाली है। आजादी के 70 साल बाद भी गरीबों को जो पहुंचा नहीं पाए हैं, सब सरकारों ने मेहनत की, पर संसाधनों की कमी रही। कच्चा बिल पक्का बिल का खेल खत्म हो जाएगा। छोटे कारोबारी भी लाभ को आम आदमी को ट्रांसफर करेंगे।

Share it
Top