स्प्रिंकलर विध‍ि से गुजरात का यह जिला बना आलू का हब, पीएम ने भी कही ऐसी ही बात

माइक्रो इरीगेशन के फायदे : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में गुजरात के अपने दौरे के दौरान खेती में माइक्रो इरीगेशन से हुए फायदे की बात बताई। उन्‍होंने IIM अहमदाबाद की स्टडी का जिक्र करते हुए कहा, ''स्‍टडी में सामने आया है कि माइक्रो इरीगेशन के कारण गुजरात में 50 प्रतिशत तक पानी की बचत हुई है।''

स्प्रिंकलर विध‍ि से गुजरात का यह जिला बना आलू का हब, पीएम ने भी कही ऐसी ही बात

लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में गुजरात के अपने दौरे के दौरान खेती में माइक्रो इरीगेशन से हुए फायदे की बात बताई। उन्‍होंने IIM अहमदाबाद की स्टडी का जिक्र करते हुए कहा, ''स्‍टडी में सामने आया है कि माइक्रो इरीगेशन के कारण गुजरात में 50 प्रतिशत तक पानी की बचत हुई है।''

उन्‍होंने कहा, ''इसकी वजह 25 प्रतिशत तक फर्टिलाइजर का उपयोग कम हुआ। वहीं, 40 प्रतिशत तक लेबर कॉस्ट कम हुई और बिजली की बचत हुई सो अलग।'' पीएम की इस बात को गुजरात के किसान भी सही ठहराते हैं।

हाल ही गांव कनेक्‍शन की एक टीम भी गुजरात गई थी। जब टीम गुजरात के बनासकांठा जिले में पहुंची तो यहां हर खेत में स्प्रिंकलर इरीगेशन (फव्वारा विधि) से सिंचाई होते देखा गया। बनासकांठा पूरे देश में आलू के उत्पादन के लिए जाना जाता है। इसी वजह से इसे बटाटा नगरी भी कहते हैं। यहां के किसानों का कहना था कि स्‍प्रिंकलर इरीगेशन की वजह से उनकी खेती अच्‍छी हुई है और कम पानी में भी वो बेहतर फसल उगा पा रहे हैं।

बनासकांठा जिले के चतराला गांव में रहने वाले हितेश भाई (30 साल) भी आलू के किसान हैं। वो बताते हैं, ''आलू में ज्‍यादा पानी की जरूरत होती है। पहले हम ग्राउंड वॉटर पर निर्भर थे। पानी की बहुत समस्‍या थी। बाद में सिंचाई की व्‍यवस्‍था बदल गई, जिससे पानी की समस्‍या खत्‍म हो गई। मिनी स्प्रिंकलर, स्प्रिंकलर और ड्र‍िप इरीगेशन की वजह से पानी तो कम लगता ही है और उत्‍पादन भी बढ़ जाता है। पहले हमें खेतों में आठ से 10 घंटे तक पानी देना होता था, इसके बाद भी उत्‍पादन कम था।''

पीएम मोदी ने भी गुजरात के अपने दौरे में कहा था, ''माइक्रो इरिगेशन का दायरा साल 2001 में सिर्फ 14 हज़ार हेक्टेयर था और सिर्फ 8 हज़ार किसान परिवारों को इसका लाभ मिल पा रहा था। आज 19 लाख हेक्टेयर जमीन माइक्रो इरीगेशन के दायरे में है और करीब 12 लाख किसान परिवारों को इसका लाभ मिल रहा है।''

बनासकांठा जिले में स्‍थ‍ित कृष‍ि विकास केंद्र के साइंटिस्‍ट योगेश पवार कहते हैं, ''बनासकांठा देश का पहला ऐसा जिला है जहां सिंचाई 100% स्प्रिंकलर से होती है। इसकी वजह से बनासकांठा जिले के आलू के किसान का एरिया हर साल बढ़ता जा रहा है। स्प्रिंकलर से पानी की भी बचत भी होती है और उत्‍पादन में भी बढ़ोतरी होती है। फिलहाल बनासकांठा में 65 हेक्‍टेयर के आस पास आलू की खेती हो ती है और प्रति हेक्‍टेयर 25 से 40 टन उत्‍पादन हो रहा है।

बनासकांठा जिले के मालगढ़ गांव के रहने वाले आलू के किसान वसंत भाई (40 साल) बताते हैं, ''पहले जब स्प्रिंकलर से सिंचाई नहीं होती थी तो बहुत दिक्‍कत थी। पानी की कमी थी और इससे खेती भी अच्‍छी नहीं होती थी। बाद में स्प्रिंकलर विध‍ि से सिंचाई शुरू हुई। इससे हमारा आलू का उत्‍पाद बढ़ा है।''

पीएम ने भी अपने संबोधन में कहा था, ''आपने जब मुझे यहां का दायित्व दिया, तब हमारे सामने दोहरी चुनौती थी। सिंचाई के लिए, पीने के लिए, बिजली के लिए, डैम के काम को तेज करना था, दूसरी तरफ नर्मदा कैनाल के नेटवर्क को और वैकल्पिक सिंचाई व्यवस्था को भी बढ़ाना था, लेकिन गुजरात के लोगों ने हिम्मत नहीं हारी और आज सिंचाई की योजनाओं का एक व्यापक नेटवर्क गुजरात में खड़ा हो गया है। बीते 17-18 सालों में लगभग दोगुनी जमीन को सिंचाई के दायरे में लाया गया है।''


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