राम रहीम ने खेती के लिए मांगी परोल, किसानों से लेकर वकीलों तक की नजर

Arvind ShuklaArvind Shukla   26 Jun 2019 1:10 PM GMT

राम रहीम ने खेती के लिए मांगी परोल, किसानों से लेकर वकीलों तक की नजर

लखनऊ। बलात्कार और हत्या के दोषी राम रहीम ने खेती करने के लिए 42 दिन की परोल मांगी है। हरियाणा में जेल प्रशासन और जिला प्रशासन उसकी याचिका पर रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। जेल प्रशासन ने डेरा सच्चा प्रमुख के पक्ष में रिपोर्ट दी है। हरियाणा सरकार के कई मंत्री परोल के समर्थन में हैं। ऐसे में सोशल मीडिया में राम रहीम की परोल पर खिलाफत के साथ ये भी सवाल उठ रहे हैं, इसका असर क्या होगा? राम रहीम को अगर परोल मिलती है तो जेलों में बंद खेती वाले लोग भी इसी आधार पर परोल मांग सकेंगे?

भारत में परोल सजायाफ्ता कैदी जेल अधिनियम 1984 और कैदी अधिनियम, 1900 के तहत बनाए गए नियमों के तहत दिया जाता है। इस मामले में प्रत्येक राज्य के अपने नियम है। परिवार में मौत, परिवार में शादी, गंभीर बीमारी, समेत कई मामलों में कैदी को शर्तों के साथ जेल से बाहर जाने की अनुमति मिल सकती है। राम रहीम ने खेती करने के लिए 42 दिनों के परोल (जेल से बाहर जाने) की अनुमति मांगी है।

सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता प्रज्ञा पारिजात परोल के नियम शर्तों पर बताती हैं, "कैदी के जेल में व्यवहार, जेल में निभाई ड्यूटी आदि के आधार पर घर में इमरजेंसी, बीमारी के अलावा जमीन और फसल को लेकर कुछ मामलों में जमानत मिल सकती है। लेकिन ये कैदी का अधिकार नहीं है, ये जज के विवेक पर निर्भर करता है। इसमें उस पर लगे केस, उसका पुराना रिकॉर्ड, जेल में बिताए दिन, उसका आचरण आदि ध्यान में रखा जाता है।"

दो साध्वियों से दुष्कर्म और एक पत्रकार की हत्या का दोषी 52 साल का राम रहीम इस वक्त रोहतक की सुनारिया जेल में बंद है। 25 मई 2017 को सीबीआई अदालत ने उसे 20 साल कैद की सजा सुनाई थी। हरियाणा के सिरसा जिले में हजारों एकड़ क्षेत्रफल में डेरा सच्चा सौदा है। यहां पर डेरा की जमीन पर खेती के लिए ही राम रहीम ने परोल मांगा है। जेल अधीक्षक ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि राम रहीम का जेल में आरचण अच्छा है।

"अभी परोल पर कोई फैसला नहीं आया है, लेकिन कैदी (राम रहीम) पर गंभीर आरोप हैं, उसका मोरल टर्पीट्यूड (ऐसा आचरण जो समाज को ठेस पहुंचाए) कहते हैं कि उसे परोल नहीं मिलनी चाहिए, वर्ना एक गलत परंपरा की शुरुआत हो सकती है।" प्रज्ञा परिजात कहती हैं।


राम रहीम के परोल के फैसले पर उसके अनुयायियों, नेता, अधिकारी, वकीलों और किसान, किसान संगठनों की नजरें टिकी हैं। कृषि प्रधान देश में 67 फीसदी आबादी गांवों में रहती है। विभिन्न मामलों में लाखों किसान जेलों में बंद हैं। कोर्ट में चल रहे मामलों में राजस्व के मामले करोड़ों में हैं।

किसान नेता और मध्य प्रदेश में किसान कांग्रेस के कार्यवाहक अध्यक्ष केदार सिरोही कहते हैं, ''खेती के आधार पर अगर परोल मिलती है तो देश के हजारों किसान जेलों में बंद है। किसान आंदोलनों में बहुत सारे किसान बंद हैं, जेल जाने से इनमें से हजारों के घर परिवार उजड़ गए हैं। वो भी परोल मांग सकेंगे।''

हरियाणा के सिरसा जिले के शाहपुर बेगू में डेरा सच्चा सौदा है। यहीं पर डेरा की 260 एकड़ जमीन हैं। इसी जमीन पर खेती के लिए राम रहीम ने परोल मांगी है। स्थानीय पत्रकार सतनाम सिंह गांव कनेक्शन को बताते हैं, ''2012-13 के जमाबंदी (लैंड रिकार्ड) के मुताबिक जमीन डेरा की है लेकिन उसमें किसानी बाबा (राम रहीम) करता है। ये रिपोर्ट हर पांच साल में बनती है। 2017-18 में जमाबंदी के आंकड़ों में उसका नाम नहीं है, क्योंकि वो 2 साल से जेल में है। बाकी प्रशासन क्या कर रहा इसकी अब जानकारी नहीं है।'' नियमों के अनुसार हरियाणा में पटवारी हर गांव में जाकर देखता है कि किस किसान ने खेत में क्या बोया है, जिसके आधार पर गिरदावरी रिपोर्ट तैयार होती है और पांच साल में जमाबंदी की रिपोर्ट आती है, जिसमें गांव, रकबा किसान आदि का जिक्र होता है।

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राम रहीम जिस पत्रकार (रामचंद्र छत्रपति) की हत्या के मामले में जेल में बंद हैं, उनके बेटे अंसुल प्रजापति ने गांव कनेक्शन से कहा, ''हम लोग इसका विरोध कर रहे हैं। जिला प्रशासन की अभी रिपोर्ट नहीं आई है। लेकिन उससे पहले हम पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को रिप्रटेंश देंगे, ताकि वो उसमें दखल देकर हरियाणा सरकार को ऐसा करने से रोके। दूसरा अगर परोल मिलता है तो हम उसके विरोध में हाईकोर्ट जाएंगे।''


अपने पिता को इंसाफ दिलाने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने वाले अंकुश हरियाणा सरकार के मंत्रियों के बयानों पर सवाल उठाते हैं। ''एक ऐसा व्यक्ति जो कानून व्यवस्था का दुश्मन है, जिसने लगातार कानून का मजाक उड़ाया, ऐसे अपराधी को किसी कीमत पर परोल नहीं मिलनी चाहिए। ये वही व्यक्ति है जिसकी वजह से 25 अगस्त 2017 को पंचकुला में जो हुआ वो दुनिया ने देखा था, कानून व्यवस्था के लिए सेना बुलानी पड़ी थी, फैसले के दौरान 38 लोगों की मौत हुई थी, उसके लिए ये भी जिम्मेदार हैं। ऐसे दोषी को परोल नहीं मिलनी चाहिए।''

गुरुमीत राम रहीम की परोल की अर्जी के समय को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। लोग इसे राजनीति से प्रेरित भी बता रहे हैं। रोहतक निवासी पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में अभिवक्ता करन सिंह नारंग कहते हैं, ''दो दो मामलों में बाबा को सजा हुई है। तीन केस लंबित हैं, लेकिन ये सब सियासी मामला है। हरियाणा में अगले कुछ महीनों में चुनाव होने हैं और सिरसा, फतेहाबाद समेत 12-13 विधानसभा सीटों पर बाबा का अच्छा दबदबा है। उसके अनुयायी वोटर भी हैं। इसलिए सबके अपने हित हैं।''

जेल जाने से पहले गुरुमीत राम रहीम प्रवचनों में कहता था कि उसके 2 करोड़ से ज्यादा अनुयायी है। 25 अगस्त 2017 को जिस दिन उसे सजा सुनाई गई। उस दिन की मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बाबा जब पंचकुला के लिए रवाना हुआ था उस वक्त उसके साथ 800 गाड़ियों का काफिला था। पल-पल की अपडेट दिखा रहे समाचार चैनलों के मुताबिक 5-7 लाख लोग सड़कों पर थे। 50 लाख लोग अकेले पंचकुला में थे, राम रहीम को सजा होने के बाद अनुयायियों ने बवाल कर दिया था, 38 लोगों की मौत हो गई थी, ढाई सौ से ज्यादा लोग घायल हुए थे, करोड़ों रुपए की सरकारी संपत्ति को नुकसान हुआ था और हालात पर काबू पाने के लिए सेना की मदद ली गई थी।

यूपी में लखनऊ हाईकोर्ट में अधिवक्ता आनंद प्रताप सिंह कहते हैं, ''राम रहीम का इतना बड़ा संगठन है। लाखों में उसके भक्त हैं ऐसे में सिर्फ खेती के लिए अगर उसे परोल की विधि सम्मत नहीं दिखता है। मुझे नहीं लगता कोर्ट इसे मंजूर करेगा।''

सुनारिया जेल अधिक्षक ने 18 जून को सिरसा जिला प्रशासन को खत लिखकर अधिकारियों से इसकी रिपोर्ट मांगी थी कि गुरमीत की परोल संभव है या नहीं। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जेल अधिक्षक ने लिखा था कि गुरमीत का जेल में आचरण ठीक है उसने किसी नियम का उल्लंघन नहीं किया है। सिरसा पुलिस और प्रशासन इस मामले की जांच कर रहे हैं।


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