टैक्सी चलाने वाले पिता का अभिमान है ये कॉमनवेल्थ गोल्ड मेडेलिस्ट

टैक्सी चलाने वाले पिता का अभिमान है ये कॉमनवेल्थ  गोल्ड मेडेलिस्टकॉमनवेल्थ यूथ गेम्स 2015 में जैवलिन थ्रो स्पर्धा में स्वर्ण पदक विजेता हदीश अली 

मुंबई में टैक्सी चलाकर अपने घर के लिए पैसे जोड़-जोड़ कर भेज रहे मोहम्मद मुस्तफा ने कभी भी नहीं सोचा था, कि एक दिन उनका बेटा हदीश अली ( 20 वर्ष) देश का नाम रौशन करेगा। कंधे पर परिवार को संभालने का बोझ और आर्थिक तंगी ने हदीश को कभी भी पीछे हटने नहीं दिया। उसकी लगन और हिम्मत ने आखिरकार उसे उस मुकाम तक पहुंचा ही दिया , जहां पर जाने का सपना उसे दिन-रात सोने नहीं दे रहा था।

हदीश अली ने समोआ में वर्ष 2015 में हुए कॉमनवेल्थ यूथ गेम्स में देश के लिए 79.29 मीटर भाला फेंककर एक नया रिकॉर्ड बनाया है। हदीश उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ ज़िले के पूरे हुड़हा गाँव के रहने वाले हैं।

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हदीश अली की राह इतनी आसान नहीं थी, पिता मोहम्मद मुस्तफा मुंबई में रहकर टैक्सी चलाते हैं। घर में अम्मी और दो छोटे भाई और एक बहन है। उसका घर ऐसे गाँव में है , जहां पर गाँव तक जाने के लिए एक पक्का पुल तक नहीं है। उसका गाँव तीन तरफ नदी से घिरा है, तो एक तरफ रेलवे लाइन गुजरती है। गाँव में आने जाने के लिए एक पुराना लकड़ी का पुल या फिर नाव का ही सहारा है।

प्रतापगढ़ ज़िले के पूरे हुड़हा गाँव में जाने के लिए बना लकड़ी का पुल।

मुंबई में टैक्सी चलाने वाले पिता का सीना उस दिन गर्व से चौड़ा हो गया, जब उनका बेटा कॉमनवेल्थ गेम्स में देश के लिए भाला फेंक प्रतियोगिता का स्वर्ण पदक लेकर आया। उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के हुड़हा गाँव से आने वाले हदीश अली अभी केवल 20 साल के हैं, लेकिन देश में खेल जगत के लिए उनका योगदान उम्र से कई गुना बड़ा है।

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हदीश का स्वर्ण पदक पाने तक का सफर बहुत मुश्किलों से भरा था। घर की आर्थिक हालत अच्छी नहीं थी। अब्बू टैक्सी चलाकर घर पर पैसे भेजते थें। हदीश ने खेल के साथ अपनी पढाई भी जारी रखी है। हाई स्कूल तक प्रतापगढ़ के तिलक इंटर कॉलेज में पढ़ाई करने के बाद प्राइवेट पढ़ रहे हैं। अपने बेटे की जीत से खुश हदीश के अब्बा कहते हैं कि कितने लोगों ने मना किया पैसा बर्बाद कर रहे हो। इतने वर्षों में जितना भी कमाया हदीश की कोचिंग पर ही खर्च किया। लेकिन अब वही लोग मेरे बेटे से मिलने आते हैं।

आज हदीश का लक्ष्य है ओलंपिक में खेलने का है। इसके लिए उन्होंने अभी से ही इसकी तैयारी शुरू कर दी है। मौजूदा समय नें हदीश पंडित मदन मोहन मालवीय स्पोर्टस कॉलेज, इलाहाबाद में ओलंपिक की तैयारी कर रहे हैं। वो जब भी गाँव में आते हैं, उन्हें देखकर बच्चे इकठ्ठा हो जाते हैं। उन्हें वो खेल के नए गुर भी सिखाते हैं। हदीश के घर में उसके अलावा छोटी बहन सहाना बानो के साथ ही दो छोटे भाई आकिब ज़ावेद और आशिक अली भी हैं। जिन्हें वो आगे अच्छे स्कूलों में पढ़ाना चाहते हैं।

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