आखिर कितनी कारगर होगी स्वास्थ्य बीमा योजना 

आखिर कितनी कारगर होगी स्वास्थ्य बीमा योजना अस्पताल 

बाराबंकी जिले से अपने कैंसर का इलाज करवाने आये रामदयाल ने जब डॉक्टर से अपने इलाज की फीस पूछी तो उनको फीस का पता चलते ही वो चौक गए और बोले अब अपना इलाज करवा नहीं पायेंगे क्योंकि डॉक्टर ने उनके इलाज की फीस डेढ़ लाख रुपए बताई थी।

वित्त मंत्री के इस बार के बजट में राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत 10 करोड़ परिवारों को पांच लाख रुपए हर साल इलाज के लिए मिलेंगे, लेकिन सवाल खड़ा यह होता है कि क्या वाकई में स्वास्थ्य बीमा योजना कितना काम कर पायेगी।

राम दयाल से जब पूछा गया कि क्या उनका कोई स्वास्थ्य बीमा है तो उनका कहना था कि स्वास्थ्य बीमा क्या होता है? स्वास्थ्य बीमा की जानकारी नहीं है लोगों को तो वह स्वास्थ्य बीमा करवाएंगे कैसे?

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मध्य प्रदेश के हरदा जिले से कुछ किमी की दूरी पर खिरकिया गाँव में रहने वाले जितेन्द्र सिंह साध (28 वर्ष) बताते हैं, “स्वास्थ्य बीमा की योजना को ग्रामीण क्षेत्रों में लागू करना बहुत ज्यादा ही मुश्किल है। ग्रामीण लोगों को किसी भी योजना की जानकारी ही नहीं होती है तो क्या उसका लाभ लेंगे। अन्य योजनाओं की तरह यह योजना भी कहीं न कहीं दबी रह जाएगी।” स्वास्थ्य मंत्रालय की नई रिपोर्ट (2017 में प्रकाशित) नेशनल हेल्थ अकाउंट्स 2014-15 के तथ्य बताते हैं कि स्वास्थ्य पर होने वाले कुल खर्च का दो तिहाई से ज्यादा (67फीसद) अभी लोगों को अपनी जेब से खर्च करना पड़ता है।

बिहार के नवादा जिले से लगभग 29 किमी दूरी पर रजौली गाँव के प्रशांत कुमार (21 वर्ष) ने बताया, “वित्तमंत्री के मुताबिक ‘राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना’ दुनिया का सबसे बड़ा हेल्थकेयर स्किम है और इससे 10 करोड़ गरीब लोगों को हेल्थ इंश्योरेंस मिलेगा। यह योजना चाहे जितना प्रसिद्ध हो जाये पर जबतक ग्राउंड स्तर पर अस्पतालों की स्थिति अच्छी नहीं हो जाती और मेडिकल सुविधाएं नहीं मिल जाती यह असफल साबित होगी। यह योजना आने वाले कई वर्षों में भी नहीं हो पाएगी।”

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वर्ष 2015-16 में आरएसबीवाय के लिए पंजीकृत परिवारों की संख्या 4.13 करोड़ थी जो 2016-17 में घटकर 3.63 करोड़ पर पहुंच गई। इस बीमा-कवर के तहत उपचार मुहैया कराने वाले निजी अस्पतालों की संख्या भी घटी। साल 2009-10 में आरएसबीवाय के तहत 7865 प्रायवेट हास्पिटल उपचार मुहैया करने को तैयार थे तो 2015 में इनकी संख्या घटकर 4926 हो गई।

मध्य प्रदेश के वेंकटनगर जिले के नीरज केशरवानी बताते हैं, “स्वास्थ्य बीमा का लाभ हम ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों को तभी जाकर मिल पायेगी जब इसकी रूपरेखा स्पष्ट हो और अभी यहाँ दीनदयाल कार्ड चलना जिसमें प्रदेश के चुनिंदा अस्पतालों में 50000 तक की नि:शुल्क इलाज कराने की सुविधा है, लेकिन इसकी प्रक्रिया और उन चुनिंदा अस्पतालों में पहुंचने भर में लोगों की हालत खराब हो जाती है। यह स्वास्थ्य बीमा योजना कैसे काम करेगीं?”

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स्वास्थ्य बीमा योजना पर रेजिडेंट डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष और दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के सीनियर रेजिडेंट डॉ हरिजीत सिंह भाटी ने बताया, “सरकार बड़ी-बड़ी बातें तो बोल देती है लेकिन उसे निभा पाना बहुत मुश्किल होता है। देश की जनता को मजाक समझ कर योजनाओं की घोषणा तो कर देती है लेकिन जनता तक कभी पहुंचा नहीं पाती है।”

सबसे पहले आपको इलाज पूर्णतया मुफ्त करना चाहिए था, स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी चीजों पर जीएसटी बिलकुल हटा देना चाहिए। कोई व्यक्ति अस्पताल में एमआरआइ करवाने जाता है तो उसे वेटिंग में लग्न पड़ जाता है और कई कई महीनों तक उसका नम्बर नहीं आता है। आपके पास डॉक्टर की भारी कमीं है प्राथमिक स्वस्थ्य केन्द्रों की हालत सही नहीं है तो स्वास्थ्य बीमा योजना शायद ही चल पायेगी।” डॉ भाटी ने बताया।

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किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के श्वसन विभाग के अध्यक्ष और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन लखनऊ के अध्यक्ष डॉ सूर्यकांत ने बताया, “सरकार द्वारा इस बार लाई जा रही स्वास्थ्य बीमा योजना से लोगों को बहुत लाभ होगा। लोगों को सस्ता इलाज मिल सकेगा आर बीमारी के लिए लोगों को अपनी सम्पतियों नहीं बेचनी पड़ेगी। उन्होंने बताया पिछली बार योजना तो लागू की गई थी लेकिन कोई प्लान नहीं किया गया था इस बार सरकार ने पूरी प्लानिंग से साथ पहले ही काम कर लिया है।”

क्या है यह योजना

यह योजना बड़ी महत्वाकांक्षी बताई जा रही है। इस योजना से देश के 10 करोड़ परिवारों के सेहत को एक सुरक्षा-कवच मिल जाएगा। परिवार का औसत आकार पांच व्यक्तियों का मानें तो स्वास्थ्य संरक्षण योजना से देश के 50 करोड़ लोग अब मान सकते हैं। सामाजिक-आर्थिक और जाति-जनगणना में भारत में परिवारों की कुल संख्या तकरीबन 25 करोड़ (24.45 करोड़) है तो देश के सर्वाधिक गरीबों में 40 फीसद आबादी को अब रोग के उपचार के लिए पहले की तरह घर-संपत्ति बेचनी या गिरवी नहीं रखनी होगी क्योंकि सरकार इसके लिए 'पर्याप्त धनराशि उपलब्ध' कराएगी।

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विश्व बैंक और विश्व स्वास्थ्य संगठन के हिसाब से वर्ल्डर बैंक के इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत में हेल्थब सर्विसेज इतना महंगा है कि इस कारण हर साल 5 करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे जा रहे हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत समेत दुनिया की आधी आबादी जरुरी स्वास्थ्य सेवाएं लेने में अक्षम है। स्वास्थ्य सर्विसेज पर खर्चे के कारण हर साल 10 करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे जा रहे हैं। उनमें से अकेले भारत में 5 करोड़ लोग हैं।

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