आरुषि मर्डर केस में नया मोड़, सुप्रीम कोर्ट जाएगी हेमराज की विधवा, सीबीआई पर लगाए गंभीर आरोप

आरुषि मर्डर केस में नया मोड़, सुप्रीम कोर्ट जाएगी हेमराज की विधवा, सीबीआई पर लगाए गंभीर आरोपआरुषि-हेमराज मर्डर केस

नई दिल्ली। 15-16 मई, 2008 की रात हुए आरुषि-हेमराज मर्डर मामले में नया मोड़ आ गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा दिए गए फैसले में आरुषि के पिता राजेश और मां नूपुर तलवार की रिहाई के बाद हेमराज का परिवार अब न्याय के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएगा।

सीबीआई पर जांच में गड़बड़ी का लगाया आरोप

हेमराज के परिवार ने सीबीआई पर जांच में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए कहा है कि उनके साथ न्याय नहीं किया गया। हेमराज की पत्नी खुमकला बन्जादे (50 वर्ष) अपने गाँव धारापानी में रहती हैं जो काठमांडु से 118 किमी दूर है। हेमराज की विधवा खुमकला ने बताया, 'हमारे पास दिल्ली से अपने गाँव आने-जाने का पैसा नहीं है, लेकिन हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।' खुमकला ने कहा कि यह उनके पति हेमराज के लिए न्याय की लड़ाई है। तलवार दंपती पर रिहाई का फैसला सुनाते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सबूतों से छेड़छाड़ और गवाहों को प्लांट करने के लिए सीबीआई की निंदा की थी।

'लोग जानना चाहते हैं कि आखिर आरुषि और हेमराज को किसने मारा'

खुमकला के भाई अशोक कुमार का कहना है कि तलवार के बरी हो जाने के बाद क्या सीबीआई की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती? अशोक कुमार पेश से इलेक्ट्रिशन हैं और परिवार की मदद के लिए इराक की अपनी नौकरी छोड़ घर लौट चुके हैं। अशोक सवाल करते हैं, 'अब वे (सीबीआई) क्या ऐक्शन ले रहे हैं? उन्हें साफ करना चाहिए कि उन्होंने जांच के साथ कैसे गड़बड़ी की?' अशोक का कहना है कि लोग जानना चाहते हैं कि आखिर आरुषि और हेमराज को किसने मारा।

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पति के मरने के बाद जीवन असहनीय हो गया : खुमकला

खुमकला का कहना है कि हेमराज जब जीवित थे तब भी जीवन कठिन था, लेकिन उनके मरने के बाद यह असहनीय हो गया है। उन्हें भाई से मदद मिलती थी जो अब खुद नौकरी छोड़ वापस आ गया है। उनका 20 साल बेटा बीमारी की वजह से बिस्तर पर है। खुद खुमकला के दाहिने हाथ में समस्या है।

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हेमराज पैसे के साथ चिट्ठी भी भेजता था घर

खुमकला बताती हैं कि उनके पास खेत का एक छोटा टुकड़ा है। शरीर की स्थिति ठीक नहीं होने के बावजूद उन्हें दूसरे के खेतों में काम करना पड़ता है। खुमकला ने बताया कि हेमराज जब 12 साल के थे दिल्ली में काम ढूंढने गए थे। उसी उम्र से हेमराज लोगों के घरों में काम कर रहे थे। उन लोगों के पास टेलिफोन कॉल तक के लिए पैसे नहीं होते थे। हेमराज जब पैसे भेजते थे तो साथ में चिट्ठी भी होती जिसमें वह अपनी जिंदगी के बारे में बताते थे।

किसी तरह की नहीं मिली मदद

खुमकला ने बताया कि हेमराज ने अपनी हत्या के 10 महीने पहले ही तलवार के घर पर काम करना शुरू किया था। हेमराज से खुमकला की अंतिम मुलाकात जनवरी 2008 में हुई थी। खुमकला का कहना है कि उन्हें न तो किसी से वित्तीय मदद मिली और न ही लीगल।

ये था मामला

14 साल की आरुषि की 15-16 मई 2008 की रात उसके घर में गला काट हत्या कर दी गई थी। शुरुआत में घर के नौकर हेमराज को इस हत्याकांड का संदिग्ध माना गया, लेकिन उसकी भी डेड बॉडी छत से बरामद हो गई।

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