शहरी उपभोक्ताओं के सस्ते भोजन के लिए किसानों का बलिदान क्यों ?

शहरी उपभोक्ताओं के सस्ते भोजन के लिए किसानों का बलिदान क्यों ?कार्यक्रम में खाद्य एवं निवेश नीति विश्लेषक देविंदर शर्मा का स्वागत करते आयोजक।

“खेती पर त्रासदी से जल्द ही शहर भी घिरे होंगे, वास्तव में हम संकट के लिए एक तरह से जिम्मेदार हैं, आखिरकार शहरी उपभोक्ताओं को सस्ते भोजन उपलब्ध कराने के लिए किसानों का बलिदान किया जा रहा है।“ यह चेतावनी प्रख्यात खाद्य एवं निवेश नीति विश्लेषक देविंदर शर्मा ने दी।

वे हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में रविवार को 9वें भारतीय युवा विज्ञान कांग्रेस में ‘कृषि संकट से बाहर निकलना: एक नीति अनिवार्य' विषय पर अपने विचार रख रहे थे। इस कार्यक्रम में 21 राज्यों के उपाध्यक्ष, निदेशक, प्रोफेसर, वैज्ञानिक समेत हजारों की संख्या छात्र मौजूद रहे।

उन्होंने आगे कहा, “ऐसा मत सोचो कि किसान कहीं सोमाली या इथियोपिया या उप-सहारा अफ्रीका में मर रहे हैं। यह आपके पिछवाड़े में अगले दरवाजे हो रहा है। खेती पर जल्द ही या बाद में त्रासदी शहर में भी घिरी होगी।“

कृषि क्षेत्र में लगातार संकट के पीछे के कारणों को समझाते हुए उन्होंने आगे कहा, “खाद्य और कृषि की राजनीतिक अर्थव्यवस्था को समझने के लिए कुछ उपचारात्मक उपाय तुरंत उठाए जाए जाने चाहिए क्योंकि आर्थिक सुधारों को व्यवहार्य रखने के लिए कृषि को जानबूझकर बलिदान किया जा रहा है इसलिए हमारा कर्तव्य है कि इस समय एक अभूतपूर्व कृषि आपातकाल के दौरान किसानों के सड़क पर खड़े हैं और देश बड़े संकट का सामना कर रहा है।“

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युवाओं को संबोधित करते हुए उन्होंने आगे कहा, “अन्यथा बहुत देर हो जाएगी, ऐसे में युवा पीढ़ी को कारणों को समझने के साथ उचित नीतिगत हस्तक्षेप करना है। उन्हें अपने एंटेना बढ़ाने की जरूरत है, क्योंकि आर्थिक नीतियों का सवाल है।“

कार्यक्रम में सोलन के शुलनी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पीके खोसला, हमीरपुर के कैरियर प्वाइंट विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर प्रो. पीएल गौतम, डॉ. मीना कुमार समेत कई गणमान्य मौजूद रहे।

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