ग्राउंड वाटर को रिचार्ज करने की अनूठी पहल आप भी कर सकते हैं शुरुआत

ग्राउंड वाटर जल संरक्षण: रामवीर तंवर की इस पहल में सैकड़ों लोग ग्राउंड वाटर रिचार्ज करने के लिए तालाबों का संरक्षण करने में जुटे हैं... देखिए उनसे खास बात...

Neetu SinghNeetu Singh   21 Oct 2019 8:22 AM GMT

पानी बचाना कितना जरूरी है, ये हम सब समझ चुके हैं, लेकिन कई बार हम लोग समझ नहीं पाते कि कैसे इसकी शुरुआत हो। लेकिन थोड़ी समझदारी से हम अपने घर और आसपास पानी बचा सकते हैं। कई लोग ऐसा करके मिसाल बने हैं। ऐसे ही एक युवा हैं.. रामवीर तंवर

अगर आपके आसपास कोई तालाब सूख चुका है, वो कूड़ाघर बन गया है, गन्दगी की वजह से वहां लोग आवागमन नहीं करते...ऐसे तालाबों को संरक्षित करने की एक अनूठी मुहिम एक युवा ने इंजीनियरिंग की नौकरी छोड़कर उठाई है। रामवीर तंवर की इस मुहिम में सैकड़ों लोग जुड़ चुके हैं जो ग्राउंड वाटर ground water रिचार्ज करने में जुटे हैं।

यूपी के गौतमबुद्धनगर नगर के डाढा गाँव में किसान परिवार में जन्में रामवीर तंवर (26 वर्ष) को अपनी इंजीनीयरिंग की नौकरी रास नहीं आ रही थी क्योंकि बचपन में उन्होंने जिन तालाबों में नहाया था, अपनी भैंसों को पानी पिलाया था, वहां घंटो बैठकर पानी में कंकड़ फेके थे...वो तालाब कूड़े के ढेर बन गये थे। गन्दगी की वजह से लोग वहां आना जाना पसंद नहीं करते थे। तालाबों की ये स्थिति रामवीर को बेचैन करने लगी। वो पढ़ाई और नौकरी के दौरान तालाबों को संरक्षित करने के लिए गाँव-गाँव जाकर लोगों से चर्चा तो करते थे लेकिन पूरा वक़्त नहीं दे पाते। इसलिए उन्होंने अपनी अच्छी सैलरी वाली इंजीनियरिंग की नौकरी 2017 में छोड़ दी और पूरी शिद्दत के साथ इस काम में जुट गये।

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दिल्ली रेलवे स्टेशन से लगभग 60 किलोमीटर दूर रामवीर तंवर जिस डाबरा गाँव के शहीद सरोवर तालाब पर खड़े थे, वो साफ़-सुधरा था और उसमें पानी भरा था। उसके आसपास हरी-भरी फसलें लहला रही थीं। रामवीर ने बताया, "ये तालाब आज जैसा दिख रहा है ये दो साल पहले ऐसा नहीं था। यहाँ तालाब के नाम पर कूढ़े का ढेर जमा था, जब गाँव में जल चौपाल लगाई और लोगों को इसके फायदे बताये तो सब इसको साफ़ करने में आगे आये। अब यहाँ के लोग इस तालाब के पानी से अपने खेतों की सिंचाई करते हैं जिससे उनके पैसों की बचत होती है।"

ये वही डाबरा तालाब है जिसकी फोटो को प्रधानमन्त्री के 'मन की बात' कार्यक्रम में भी शामिल किया गया था जिसके बाद ये तालाब चर्चा का विषय बन गया। रामवीर ने बताया, "मैं अबतक 15 तालाबों को जन भागीदारी, कुछ गैर सरकारी संगठन और सीएसआर के फंड से संरक्षित कर चुका हूँ। जिन तालाबों में कूड़े का ढेर बहुत जमा होता है उसे बुलडोजर से साफ़ करवाना पड़ता है। कूड़ा हटवाने और तालाब को समतल कराने में पैसे भी खर्च होते हैं। जिसका मैं इंतजाम करता हूँ। गाँव के लोग ही तालाब की देखरेख करें इसलिए वहां के किसी व्यक्ति को इसकी जिम्मेदारी सौंप दी जाती है।" अब इन तालाबों में लोग खेत की सिंचाई , मछली पालन करने लगे हैं। यहाँ कुछ लोग सुबह की सैर करते हैं तो कुछ शाम को चौपाल लगाकर बैठते हैं।

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रामवीर द्वारा ग्रेटर नोएडा से शुरू हुआ ये अभियान अब यूपी के कई जिलों में पहुंच गया है। ये अलग-अलग जिलों में जाकर कुछ गैर सरकारी संगठनों की मदद से कूड़ा ढेर बन चुके तालाबों को चिन्हित करते हैं। फिर राजस्व विभाग से अनुमति लेकर उन तालाबों को जन सहभागिता की मदद से ठीक करते हैं। गौतमबुद्ध, बुलंदशहर, दिल्ली, सहारनपुर, सीतापुर और दिल्ली मिलाकर कुल 15 तालाबों का सौंदर्यीकरण कर चुके हैं। ये दर्जनों गाँव में जल चौपाल लगा चुके हैं। इनकी इस मुहिम में 200 से ज्यादा वालेंटियर जुड़ गये हैं। जबकि 10-12 लोगों की वो टीम है जो जॉब के साथ-साथ इस काम को भी कर रहे हैं, इसमें एक दो लोग अपनी जॉब छोड़कर पूरी तरह से इस काम में जुट गये हैं। रामवीर केन्द्रीय नियंत्रण बोर्ड से जल एवं वायु नियंत्रण का प्रशिक्षण भी ले चुके हैं।

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"तालाबों को ठीक करना कोई रॉकेट साइंस नहीं है। बस इसके लिए मजबूत इच्छा शक्ति चाहिए। मुझे इन तालाबों में भरे पानी को देखकर बड़ा सुकून मिलता है। जहाँ के तालाब पिछले कुछ वर्षों में ठीक हुए हैं अब वहां के ग्रामीण इसका पानी खेतों में सिंचाई, जानवरों को नहलाने और पानी पिलाने में इस्तेमाल कर रहे हैं।" रामवीर तंवर ने बताया, "कुछ तालाबों पर लोग सुबह-शाम टहलने भी जाते हैं। इन तालाबों का अब वही नजारा है जिसे मैंने अपने बचपन में जिया था। जो भी लोग चाहते हैं कि हम उनके गाँव का तालाब ठीक करें वो हमसे हमारे फेसबुक पेज या 'बूँद-बूँद पानी' नाम के पेज से संपर्क कर सकते हैं।"


इन वजहों से गाँव के तालाबों में रहती हैं गन्दगी

रामवीर तालाबों को कूड़े के ढेर में तब्दील होने की वजह जानने के लिए यूपी के कई जिलों में गये जहाँ उन्होंने ग्रामीणों के बीच रहकर इसकी मुख्य वजह जानी। उन्होंने पाया कुछ तालाबों में कब्जा करके लोगों ने अपने घर बना लिए हैं जिसे खाली कराना मुश्किल है इसलिए उन्होंने ऐसे तालाबों को चुना जहाँ अब लोग कूड़ा फेंकने लगे हैं। रामवीर ने बताया, "गाँव में पहले प्लास्टिक का उपयोग नामात्र होता था लेकिन अब शहर और गाँव में ज्यादा फर्क नहीं रह गया है। यहाँ भी अब शहरों जैसा कूड़ा निकलने लगा है लेकिन इसे उठाने यहाँ शहर से कोई गाड़ी नहीं आती। गाँव वाले मजबूरी में इस कूड़े को तालाब में डाल देते हैं।"

उन्होंने आगे बताया, "जब ये प्लास्टिक के बैग सीधे तालाब में पड़ते हैं तो ग्राउंड वाटर रिचार्ज होना बंद हो जाता है। गाँव में जबतक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम नहीं होगा तबतक इस समस्या से निकलने में मुश्किलें आयेंगी। यही वजह से अरबो लीटर बरसात का पानी बेकार जाता है जिसका गाँव वाले उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। जबकि तालाबों का असली उद्धेश्य ग्राउंड वाटर रिचार्ज save water करना ही था।"

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तालाबों की इस स्थिति पर लोग बात करें, चर्चा करें और इसे जनभागीदारी का हिस्सा से ठीक करने का प्रयास करें इसके रामवीर ने 'सेल्फी विद पोंड' नाम की मुहिम शुरू की। जिसमें लोग अपने आसपास के किसी भी अच्छे या खराब तालाब के पास जाएं एक तालाब के साथ सेल्फी लें और उसके बारे में कुछ लिखें। उनकी इस मुहिम से सोशल मीडिया के जरिए 10,000 से ज्यादा लोग जुड़ चुके हैं। अब कई जगहों पर जल चौपाल की टोली भी बन गयी है। किसी भी तालाब की सफाई से पहले ये उसमें भरे पानी का टेस्टिंग करते हैं और सफाई के बाद भी करते हैं जिससे पानी की गुणवत्ता पता चल सके।

रामवीर का बचपन जंगलों और तालाबों के बीच गुजरा

किसान परिवार में जन्में रामवीर तंवर पांच भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं। इनकी दसवीं तक की शिक्षा सरकारी स्कूल में हुई। आठवीं से दसवीं की पढ़ाई के दौरान इनका ज्यादातर वक़्त जंगलों और तालाबों के बीच गुजरा। रामवीर ने बताया, "घर में सब लोग खेतों पर चले जाते थे. मेरे यहाँ भैंसे बहुत थी उनको चराने जंगल हम जाते थे। वहीं कॉपी किताब साथ में ले जाते. कभी पेड़ की छाँव में तो कभी तालाब के पास बैठकर पढ़ाई करते। भैंसों को इन्ही तालाबों में नहलाते थे और हम भी मस्ती करते थे। पर जैसे-जैसे हम बड़े हुए तो ये चीजें खत्म हो गईं जिनसे मुझे बेहद लगाव था।"

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यही वो वजह थी जिसकी वजह से रामवीर ने बीटेक की पढ़ाई के दौरान वर्ष 2013 में जब ये ट्यूशन पढ़ाते थे तभी से भूजल रिचार्ज पर लोगों से बात करने लगे थे। दो साल तक ये अपने स्टूडेंट की मदद से पानी बचत कैसे करें और वाटर रिचार्ज कैसे करें इसपर चर्चा करते थे। वर्ष 2014 के बाद इन्होंने तालाबों के सुधारीकरण पर काम शुरू किया।

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यहाँ देखें रामवीर तंवर से बातचीत...


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