प्रयोगशाला में विकसित स्वच्छ मांस भारत में वर्ष 2025 तक उपलब्ध होगा

प्रयोगशाला में विकसित स्वच्छ मांस भारत में वर्ष 2025 तक उपलब्ध होगायह मीट की दुकान। पर अब प्रयोगशाला में बने स्वच्छ मीट आपको जल्द उपलब्ध होंगे। फाइल फोटो

हैदराबाद। वैज्ञानिकों का दावा है कि भारतीय बाजारों में वर्ष 2025 तक ऐसा स्वच्छ मांस उपलब्ध हो सकता है जो प्रयोगशालाओं में विकसित किया गया होगा और इसके लिए पशुओं को अमानवीय स्थिति से नहीं गुजरना होगा।

वैज्ञानिकों के मुताबिक ऐसा मांस तैयार करने के लिए पशुओं की कोशिकाओं को लिया जाएगा और उन्हें उनके शरीर के बजाय, अलग से एक पेट्री डिश में विकसित किया जाएगा। आमतौर पर जानवरों के मांस के लिए पशुओं के मूलभूत कल्याण की उपेक्षा की जाती है जिससे पर्यावरण और खाद्य सुरक्षा को भी खतरा होता है।

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भारत में प्रयोगशाला में तैयार गोश्त को विकसित करने के लिए पशु कल्याण संगठन ह्यूमन सोसाइटी इंटरनेशनल (एचएसआई) इंडिया और हैदराबाद में स्थित सेंटर फॉर सेलुलर एंड मोलिकुलर बायोलॉजी (सीसीएमबी) ने हाथ मिलाया है। इस साझेदारी का मकसद स्वच्छ मांस विकसित करने की तकनीक को बढ़ावा देना तथा स्टार्ट अप और नियामकों को साथ लाना है।

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एचएसआई इंडिया में उपनिदेशक अलोकपर्णा सेनगुप्ता ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में वर्ष 2018 के अंत तक स्वच्छ मांस आने की उम्मीद है। भारत में हम उम्मीद कर रहे हैं कि यह वर्ष 2025 तक उपलब्ध हो जाएगा।

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पशुपालन उद्योग में बड़े पैमाने पर असुरक्षित तरीके सामने आने के बाद इस तरह के गोश्त को विकसित करने की जरूरत महसूस की गई। वर्ष 2013 में स्वच्छ मांस से एक बर्गर तैयार किया गया था।

शोधकर्ताओं ने बताया कि स्वच्छ मांस तैयार करने के लिए पारंपरिक मांस उत्पादन की तुलना कम भूमि और पानी का इस्तेमाल होता है, जो जलवायु परिवर्तन के खतरे को कम करता है।

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इनपुट भाषा

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