बोर्ड रिजल्ट में नंबर कम लाने वाले छात्र-छात्राएं भी करते रहे हैं कमाल, पढ़िए इनकी कहानियां

बोर्ड रिजल्ट में नंबर कम लाने वाले छात्र-छात्राएं भी करते रहे हैं कमाल, पढ़िए इनकी कहानियांबोर्ड एग्जाम में नंबर कम लाने वाले बच्चे भी कमाल करते हैं। (फोटो-साभार इंटरनेट)

लखनऊ। बोर्ड एग्जाम शुरू हो चुके हैं। रिजल्ट भी कुछ दिन बाद आने लगेंगे। अच्छे नंबर लाने वालों बच्चों की फोटो पैरेंटस खूब शेयर करेंगे। उनकी तारीफें भी होंगी, लेकिन कम नंबर या ग्रेड लाने वालों का क्या होगा ? उनको ताने मारे जाएंगे, दूसरों बच्चों से उनकी तुलना की जाएगी।

तुम कुछ नहीं कर पाओगे, कुछ बन नहीं पाओगे। पैसे नहीं कमा पाओगे। उनके बेटे को देखो, इतने अच्छे नंबर आए हैं, उसे अच्छे कॉलेज में एडमिशन मिल जाएगा। ऐसी तमाम बातें माता-पिता कम नंबर वाले लाने वाले बच्चों को सुनाएंगे। इसके बाद ही बच्चों का आत्मविश्वास डोला जाता है और वो कुछ अनर्थ करने की ओर बढ़ चलते हैं। हर साल बोर्ड एग्जाम के बाद आत्महत्या के मामले सामने आते हैं, इसलिए अपने बच्चों के फेल होने या कम नंबर आते पर उनका हौसला न तोड़ें।

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ऐसा नही हैं कि असफल या पढ़ाई में कमजोर रहने वाले छात्र अपने जीवन में आगे नहीं बढ़ पाते या मुकाम हासिल नहीं कर पाते। ऐसे एक नहीं हजारों उदाहरण हैं। असफल होने वाले या पढ़ाई में कमजोर रहने वाले छात्र अपनी हुनर और कामयाबी का लोहा दुनिया को मनवाते हैं। यहां ये भी याद रखने वाले बात है कि इतिहास फिनिशिंग लाइन पर पहले पहुंचने वालों को ही याद रखता है। शुरू में बहुत तेज़ दौड़ने वाले ज़रूरी नहीं की इसी दमखम से लगे रहे। सबसे आगे वो आएगा जो धैर्य पूर्वक लगा रहेगा। जो बिना हार माने दौड़ता रहेगा।

ऐसे में ये स्टोरी उन माता-पाता के लिए है जिनके बच्चों के नंबर बोर्ड एग्जाम में कम आए हों। ऐसे माता-पिता से ये अपील है कि वे अपने बच्चों को डांटने से पहले ऐसे लोगों की कहानी सुनाएं जो असफल होने के बावजूद सफल हुए।

रबिंद्रनाथ टैगोर।

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रबिंद्रनाथ टैगोर

भारत की ओर से इकलौते नोबल पुरस्कार जीतने वाले महान क़वि और साहित्यकार रबिंद्रनाथ टैगोर स्कूल में फेल हो गए थे। उनके शिक्षक उन्हें पढ़ाई में ध्यान न देने वाले छात्र के तौर पर पहचानते थे। बच्चे उन्हें चिढ़ाते थे। बाद में वही टैगोर देश का गर्व साबित हुए। उनका लिखा साहित्य देश के सर्वश्रेष्ठ साहित्यों में से एक है। रबिंद्रनाथ टैगोर ने ही लिखा था कि "हर ओक का पेड़, पहले ज़मीन पर गिरा एक छोटा सा बीज होता है।"

रुक्मिणी रायर।

रुक्मिणी रायर

चंडीगढ़ में पैदा हुई रुक्मिणी रायर ने 2011 में आईएएस परीक्षा में देश में दूसरा स्थान हासिल किया था। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज से मास्टर्स डिग्री लेने के बाद उन्होंने फर्स्ट टाइम में यह कामयाबी हासिल की थी। रुक्मिणी की कामयाबी इसलिए भी खास है, क्योंकि उन्होंने बिना किसी कोचिंग के यह उपलब्धि अपने नाम की। 6वीं क्लास में फेल हो गई थीं रुक्मिणी। उसके बाद वे अपने घर वालों और अध्यापकों के सामने आने से कतराने लगीं। लेकिन बाद में उन्होंने कठिन परिश्रम के बल पर सफलता अर्जित की।

अल्बर्ट आइंस्टीन।

अल्बर्ट आइंस्टीन

दुनिया में जीनियस के तौर पर पहचाने जाने वाले वैज्ञानिक आइंस्टीन चार साल तक बोल और सात साल की उम्र तक पढ़ नहीं पाते थे। इस कारण उनके मां-बाप और शिक्षक उन्होंने एक सुस्त और गैर-सामाजिक छात्र के तौर पर देखते थे। इसके बाद उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया और ज़्यूरिच पॉलिटेक्निक में दाखिला देने से इंकार कर दिया गया। इन सब के बावजूद वे भौतिक विज्ञान की दुनिया में सबसे बड़ा नाम साबित हुए।

वॉल्ट डिज्नी।

वॉल्ट डिज़्नी

वॉल्ट डिज़्नी एक अमेरिकन सिनेमा के निर्माता, निर्देशक, सिनेमा लेखक, आवाज़ कर्ता और कार्टून फिल्म बन्ने वाले दिग्दर्शक थे। उन्होंने डिज्नी की स्थापना की। इनकी संस्था आज वाल्ट डिज्नी कंपनी के नाम से जानी जाती है। डिज्नी ने अपना पहला बिजनेस खुद के ही घर में शुरू किया और उनका निर्माण किया पहला कार्टून असफल भी हुआ। उनके पहले पत्रकार सम्मलेन में, एक अखबार के संपादक ने उनका उपहास भी किया क्यों की उनके पास एक अच्छी सिनेमा बनाने की कल्पना नहीं थी।

थॉमस एडीशन।

थॉमस एडीसन

क्या आप 1000 बार असफलता प्राप्त करने के बाद सफलता की आशा कर सकते है? एक इंसान ने की थी, जिसकी बदौलत हमारे जीवन में आज उजाला है। यह इंसान है थॉमस अल्वा एडिसन। हम इन्हें सिर्फ लाईट बल्ब ही नहीं परंतु और भी कई महत्त्वपूर्ण खोजों के लिए जानते है। इन्होंने सफलतापूर्वक लाईट बल्ब बनाने से पहले 1000 निष्फल प्रयत्न किए थे। बचपन में इन्हें उनके शिक्षक द्वारा बताया गया था की वे कभी भी जीवन में आगे नहीं बढ़ पाएंगे, क्योंकि उनका दिमाग कमजोर है। आज उस शिक्षक का नाम किसी को याद नहीं, लेकिन एडिसन को सभी लोग जानते हैं।

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स्टीवन स्लिपवर्ग।

स्टीवन स्पिलबर्ग

दु‌निया में अरबों कमाने वाली जुरासिक पार्क जैसी फिल्म के निर्देशक स्पिलबर्ग को एक बार नहीं तीन बार कैलिफॉर्निया की साउदर्न यूनिवर्सिटी ऑफ थियेटर एंड टेलीविज़न में दाखिले से इंकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने कहीं और से शिक्षा ली और अपने काम के लिए बीच में पढ़ाई छोड़ दी। 35 साल बाद वो दोबारा उस कॉलेज में पहुंचे और ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की।

चाल्स डार्विन।

चार्ल्स डार्विन

इंसानी विकास सिद्धांत के जनक के तौर पर पहचाने जाने वाले चार्ल्स डार्विन को अक्सर सपने में खोए रहने वाला आलसी जैसे शब्दों को सुनना पड़ता था। स्कूल के शुरुआती दिनों में उन्हें कमजोर माना जाता था। उन्होंने लिखा कि मेरे पिता और मुझे सिखाने वाले मुझे बेहद साधारण और औसत बुद्धिमता का मानते थे।

विंस्टन चर्चिल।

विंस्टन चर्चिल

विंस्टन चर्चिल 6वीं कक्षा फेल हो गए थे, लेकिन उन्होंने कठिन परिश्रम करना कभी नहीं छोड़ा. वो प्रयत्न करते रहे और दुसरे विश्व युद्ध के दौरान यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री बने। चर्चिल साधारणतः ब्रिटेन और दुनिया के इतिहास में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण नेता थे। बीबीसी के 2002 के चुनाव में जिसमे 100 महानतम ब्रिटिश लोगो का चुनाव होना था उसमे सभी ने चर्चिल को सबसे ज्यादा महत्त्व दिया गया।

जैक मा।

जैक मा

आज लोग मुझे दुनिया के अरबपतियों में शुमार करते हैं लेकिन बहुत कम लोगो को पता है की मैं प्राइमरी स्कूल में 2 बार और मीडिल स्कूल में 3 बार फेल हुआ था फिर भी मैं हार्वर्ड में एडमिशन लेना चाहता था। ये शब्द चीन के सबसे धनी व्यक्तियों में से एक जैक मा के हैं। जैक मा ई-कॉमर्स कंपनी अलीबाबा के संस्थापक हैं। स्कूल में जैक ठीक से बोल भी नहीं पाते थे। रीब 30 नौकरी से रिजेक्ट होने के बाद जैक मा ने अलीबाबा की शुरुआत की और सफलता का स्वाद चखा। आज ये इंटरनेट कंपनी ज़बरदस्त फ़ायदे में है और दुनिया के ई-कॉमर्स बाज़ार में सबसे आगे है।

गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में ।
वो तिफ़्ल क्या गिरेगा जो घुटनों के बल चले ।।

सफलता का जश्न

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