काश ! ये फर्जी वायरल खबरें सच होतीं

काश ! ये फर्जी वायरल खबरें  सच होतींकुछ फेक न्यूज का सही होना अच्छा भी हो सकता।

लखनऊ। हमें अक्सर बाद में पता चलता है कि हमने अपने सोशल साइट्स पर जो खबर शेयर की है वो फर्जी है। सोशल साइट्स पर प्रतिदिन ऐसी ही सैकड़ों फर्जी या झूठी खबरें प्रसारित की जाती हैं जिसका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं होता। कई बार बड़े प्रमुख अखबार या मीडिया संस्थान भी बिना सच्चाई की जांच किए खबरें प्रकाशित कर देते हैं।

ऐसा ही एक मामला आजकल सुर्खियों में है। कुछ दिनों पहले ही कुछ समाचार पत्रों और वेब पोर्टलों ने प्रॉपर्टी के रिकॉर्ड्स को आधार से लिंक कराने की एक खबर को खूब चालाया। खबर इतनी तेजी से आगे बढ़ी कि इस पर सफाई देने के लिए खुद सरकार को आगे आना पड़ा। सरकार ने इस खबर और झूठे लेटर को गंभीरता से लिया है और मामले की जांच की जा रही है।

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लेकिन इन्हीं झूठी खबरों में कुछ खबरें ऐसी भी होती हैं जिनके बारे में हम सोचते हैं कि अगर ये खबर सही होती तो कितना अच्छा होता। हम आज कुछ ही ऐसी ही खबरों की बात करेंगे जो थीं तो फर्जी लेकिन अगर वो सही भी होतीं तो तो उसका प्रभाव सकारात्मक ही होता।

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का 2000 रुपए का नया नोट।

2000 के नोट में चिप लगे होने की अफवाह

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर को 500 और 1000 हजार रुपए के पुराने नोट को बंद करने का फैसला लिया था। इसके बाद आरबीआई द्वारा जारी किए 2000 रुपए के नोट को लेकर यह अफवाह फैली कि इनमें चिप लगा है। इस फर्जी खबर ने आम नागरिक के साथ-साथ मीडिया को भी अपनी चपेट में ले लिया था। अफवाह फैली कि 2,000 रुपए के नए नोटों में जीपीएस चिप लगी हुई है, जिससे सरकारी एजेंसी कहीं भी रखे नोट का पता लगा सकती हैं। दावा यह भी किया गया था कि नए नोटों को अगर जमीन में 120 मीटर नीचे भी दबा दिया जाए तो जीपीएस चिप सरकार को यह संकेत देगी। इस अफवाह का लाभ उठाते हुए कुछ लोगों ने ऐसे मोबाइल ऐप बना दिए, जिससे नोट स्कैन करने पर प्रधानमंत्री का भाषण चलने लगता है।

खबर सच होती तो- अगर ये अफवाह सच होती तो इसमें कोई शक नहीं कि कालाधन रखने वाले लोग सरकार की नजर बच नहीं पाते। इससे कालेधन पर लगाम लगती।

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नोट में रेडियोएक्टिव स्याही का प्रयोग

चिप के साथ-साथ ये फर्जी खबर भी खूब चर्चित रही। ऐसी फर्जी खबरें प्रसारित की गईं कि नए नोटों की छपाई में रेडियोएक्टिव स्याही का इस्तेमाल हुआ है। इसकी मदद से आरबीआई एकसाथ बड़े पैमाने पर रखे नोटों का पता लगा सकती है।

खबर सच होती तो- अगर ये फर्जी खबर सच होती तो इससे भी कालेधन पर लगाम लगाने में मदद मिलती। लोग बहुत ज्यादा कैश नहीं रख पाते। कैश बैंकों में रखते तो उसका पूरा हिसाब देना होता।

नरेंद्र मोदी

नरेंद्र मोदी को सर्वश्रेष्ठ प्रधानमंत्री

ये खबर भी सोशल साइ्टस पर खूब शेयर की गई। खूब चर्चा भी हुई। लेकिन ये खबर पूरी तरह फर्जी थी। यूनेस्को ने ऐसा कोई ऐलान नहीं किया था।

खबर सच होती तो- खबर न सिर्फ समर्थक बल्कि पूरे देश के लिए अच्छी खबर होती। दुनिया भारत को दबदबा और बढ़ जाता। होती क्यों न, देश का प्रधानमंत्री दुनिया का सर्वश्रेष्ठ प्रधानमंत्री जो होता।

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'जन गण मन' दुनिया का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगान

यह अफवाह भी खूब प्रचारित-प्रसारित हुई। से फर्जी खबर पहली बार पहली बार 2008 में एक ईमेल के जरिए फैलाई गई थी, जिसमें कहा गया था कि यूनेस्को ने ये घोषणा की है। जबकि कुछ समय बाद ही यूनेस्को ने इसका खंडन किया था, लेकिन पिछले सा स्वतंत्रता दिवस के आस—पास इस फर्जी खबर को फिर शेयर किया गया। फेसबुक और वाट्सएप पर इसे शेयर किया गया।

खबर सच होती तो- खबर सच होती तो देश के नागरिकों के लिए इससे ज्यादा गौरव का विषया और क्या होता। अपने देश के राष्ट्रगान से भला कौन प्यार नही करता। ये झूठी खबर सच होती तो पूरा देश गौरवान्वित होता।

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2,000 का नोट बेस्ट करेंसी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर को नोटबंदी का ऐलान किया था। इसके बाद रिजर्व बैंक की तरफ से जारी 2000 रुपए के नोट को लेकर यह अफवाह फैली। यूनेस्को की सांस्कृतिक जागरुकता विभाग के अध्यक्ष सौरभ मुखर्जी के हवाले से यह अफवाह फैली थी।

खबर सच होती तो- ये भी देश के लिए गौरव की बात होती। देश की करेंसी दुनिया की बेस्ट करेंसी तो दुनिया में देश का नाम और ऊंचा होता।

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